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शाह श्री 1008 सिद्धचक्र विधान विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए

News Desk by News Desk
February 6, 2025
in देश
शाह श्री 1008 सिद्धचक्र विधान विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए
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नयी दिल्ली,06 फरवरी (कड़वा सत्य) केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया और श्री 1008 सिद्धचक्र विधान विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए।
श्री शाह ने इस दौरान आचार्य श्री विद्यासागर जी की स्मृति में 100 का रुपये स्मारक सिक्का, डाक विभाग का पांच रुपये का विशेष लिफाफा, 108 चरण चिन्हों एवं चित्र का लोकार्पण और प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ का शिलान्यास किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूज्य मुनि श्री समता सागर जी महाराज सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
श्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एक युग पुरुष थे जिन्होंने एक नए विचार और नए युग का प्रवर्तन किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में जन्में आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महामुनिराज अपने कर्मों से भारत, भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषाएँ और भारत की पहचान के ज्योतिर्धर बने। उन्होंने कहा कि शायद ही यह सम्मान किसी ऐसे धार्मिक संत को मिला होगा जिन्होंने धर्म के साथ-साथ देश की पहचान की व्याख्या विश्व भर में की हो। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी के शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण धर्म, संस्कृति और राष्ट्र को समर्पित रहा।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें कई बार आचार्य श्री विद्यासागर जी का सान्निध्य मिला और हर बार आचार्य जी ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन, देश के गौरव का विश्वभर में प्रसार और देश की पहचान ‘इंडिया’ की बजाय ‘भारत’ से होने पर जोर दिया।
श्री शाह ने कहा कि जी-20 सम्मेलन के निमंत्रण पत्र पर ‘प्राइम मिनिस्टर ऑफ भारत’ लिख कर मोदी जी ने विद्यासागर जी के विचारों को जमीन पर उतारने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आचार्य जी के विचार को जरा भी राजनीति किए बगैर जमीन पर उतारा और उनके संदेश का अनुकरण करने का काम किया।
उन्होंने कहा कि आचार्य जी ने जीवन के अंतिम क्षण तक तपस्या का मार्ग नहीं छोड़ा। श्री शाह ने कहा कि आचार्य जी ने न केवल जैन धर्म के अनुयायियों को बल्कि जैनेत्तर अनुयायियों को भी अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से मोक्ष का मार्ग बताने का काम किया।
उन्होंने कहा कि आचार्य जी ने ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के सिद्धांत की समय अनुकूल व्याख्या कर पूरे विश्व में इसे स्थापित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने जैन धर्म के सिद्धांत के अनुरूप इस बात का ख़याल रखा कि उनके शिष्य भी उन्हीं सिद्धांतों पर जीवन व्यतीत करें।
श्री शाह ने कहा कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के सिद्धांतों का प्रचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस अवसर के लिए स्मारक सिक्का और विशेष लिफाफा की स्वीकृति देने के लिए वह मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य जी को दी गई यह कार्यांजलि संत परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि आचार्य जी का प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ युगों-युगों तक आचार्य जी के सिद्धांतों, संदेशों और उपदेशों के प्रचार का स्थान बनकर रहेगा। श्री शाह ने कहा कि जिस संत ने अपना पूरा जीवन विद्या की उपासना में बिताया उनकी समाधि का नाम ‘विद्यायतन’ के अलावा कुछ और नहीं हो सकता।
श्री शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में निः शुल्क कन्या विद्यालय का भी शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय में कौशल विकास और रोजगार दोनों सम्मिलित होंगे और अध्यापन कार्य मातृभाषा में होगा। उन्होंने कहा कि आचार्य जी के 108 चरण चिह्नों का भी लोकार्पण हुआ है जो त्याग, तपस्या और संयम के जीवन का संदेश देंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत की संत परंपरा बहुत समृद्ध है। उन्होंने कहा कि देश को जब जिस भूमिका की ज़रूरत पड़ी, संत परंपरा ने उस भूमिका का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि संतों ने ज्ञान का सृजन किया, देश को एकता के सूत्र में बाँधा और जब गुलामी का कालखंड था, तब संतों ने भक्ति के माध्यम से राष्ट्र चेतना की लौ जलाए रखी। उन्होंने कहा कि देश का शासन और देश जब आज़ादी के बाद पाश्चात्य विचारों से प्रभावित होकर चलने लगा, तब विद्यासागर जी महाराज एकमात्र आचार्य थे जिन्होंने भारत, भारतीयता और भारतीय संस्कृति से खुद को जोड़े रखा।
श्री शाह ने कहा कि जैन मुनियों ने पूरे देश को एक करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर से लेकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला तक, बिहार के राजगीर से लेकर गुजरात के गिरनार तक हर जगह पैदल घूम कर अपने कर्मों से अपने त्याग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आचार्य जी ने हमें सिखाया कि हमारी पहचान हमारी संस्कृति में निहित है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने ‘मूकमाटी’ नामक हिन्दी महाकाव्य की रचना की, जिस पर अनेक लोगों ने शोध और निबंध लिखे हैं। सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के आचार्य जी के संदेश का पालन करते हुए उनके अनुयायियों ने ‘मूकमाटी’ का कई भाषाओं में अनुवाद किया है। उन्होंने कहा कि ‘मूकमाटी’ में धर्म, दर्शन, नीति और अध्यात्म को बहुत गहराई से समझाया गया है और इसमें शरीर की क्षणभंगुरता का वर्णन एवं राष्ट्र   का भी संदेश है।
उन्होंने कहा,“ आचार्य विद्यासागर जी महाराज का मानना था कि हमारे देश की भाषाई विविधता हमारी सच्ची शक्ति है। जिस देश में अनेक भाषाएँ, लिपियाँ और बोलियाँ हों और अलग-अलग प्रकार के व्याकरण और गाथाएँ हों, वह देश सांस्कृतिक रूप से उतना ही समृद्ध माना जाता है।”
श्री शाह ने कहा,“ मोदी जी और आचार्य जी के बीच बहुत ही आत्मीय संवाद रहा है। आचार्य विद्यासागर जी का संदेश, प्रवचन और लेखन जैन समुदाय के साथ-साथ पूरे राष्ट्र के लिए एक अनमोल धरोहर है।”
 , 
कड़वा सत्य

Tags: ShahShri 1008 Siddhachakra Vidhan participatedWorld Peace Mahayagyaशामिलशाहश्री 1008 सिद्धचक्र विधान विश्व शांति महायज्ञहुए
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