• About us
  • Contact us
Monday, January 12, 2026
17 °c
New Delhi
15 ° Tue
15 ° Wed
Kadwa Satya
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
Kadwa Satya
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
  • जीवन मंत्र
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • स्पेशल स्टोरी
Home मनोरंजन बॉलीवुड

सत्यजीत रे ने दिलाई थी भारतीय सिनेमा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

News Desk by News Desk
April 23, 2024
in बॉलीवुड
सत्यजीत रे ने दिलाई थी भारतीय सिनेमा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
Share on FacebookShare on Twitter

पुण्यतिथि 23 अप्रैल के अवसर पर

मुंबई, 23 अप्रैल (कड़वा सत्य) भारतीय सिनेमा जगत में युगपुरूष सत्यजीत रे को एक ऐसे फिल्मकार के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने अपनी निर्मित फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा जगत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई । सत्यजीत रे का जन्म कलकता में 02 मई 1921 को एक उच्च घराने में हुआ था। उनके दादा उपेन्द्र किशोर रे वैज्ञानिक थे, जबकि उनके पिता सुकुमार रे लेखक थे । सत्यजीत रे ने अपनी स्नातक की पढ़ाई कलकता के मशहूर प्रेसीडेंसी कॉलेज से पूरी की । इसके बाद अपनी मां के कहने पर उन्होंने रवीन्द्र नाथ टैगौर के शांति निकेतन में दाखिला ले लिया, जहां उन्हें प्रकृति के करीब आने का मौका मिला । शांति निकेतन में करीब दो वर्ष रहने के बाद सत्यजीत रे वापस कोलकता आ गए ।

सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 1943 में ब्रिटिश एडवरटाइजमेंट कंपनी से बतौर जूनियर विजुलायजर से की, जहां उन्हें 18 रुपए महीने बतौर पारिश्रमिक मिलते थे । इस बीच वह डी.के गुप्ता की पब्लिकेशन हाउस सिगनेट प्रेस से जुड़ गए और बतौर कवर डिजायनर काम करने लगे । बतौर डिजायनर उन्होंने कई पुस्तकों का डिजायन तैयार किया इसमें जवाहर लाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया प्रमुख है । वर्ष 1949 में सत्यजीत रे की मुलाकात फ्रांसीसी निर्देशक जीन रेनोइर से हुयी जो उन दिनों अपनी फिल्म द रिवर के लिए शूटिग लोकेशन की तलाश में कलकता आए थे। जीन रेनोर ने सत्यजीत रे की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें फिल्म निर्माण की सलाह दी ।

वर्ष 1950 में सत्यजीत रे को अपनी कंपनी के काम के कारण लंदन जाने का मौका मिला जहां उन्होंने लगभग 99 अंग्रेजी फिल्में देख डाली । इसी दौरान उन्हें एक अंग्रेजी फिल्म बाइसाईकिल थीफस देखने का मौका मिला। फिल्म की कहानी से सत्यजीत रे काफी प्रभावित हुये और उन्होंने फिल्मकार बनने का निश्चय कर लिया । सत्यजीत रे बंग्ला साहित्यकार विभूति भूषण बंधोपाध्याय के उपन्यास विलडंगसरोमन से काफी प्रभावित थे और उन्होंने उनके इस उपन्यास पर पाथेर पांचाली नाम से फिल्म बनाने का निश्चय किया । फिल्म पाथेर पांचाली के निर्माण में लगभग तीन वर्ष लग गये । फिल्म निर्माण के क्रम में सत्यजीत रे की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी, जिससे फिल्म निर्माण की गति धीमी पड़ गयी । बाद में पश्चिम बंगाल की सरकार के सहयोग से फिल्म को पूरा किया जा सका ।

वर्ष 1955 में प्रदर्शित फिल्म पाथेर पांचाली ने कोलकाता के सिनेमाघर में लगभग 13 सप्ताह हाउसपुल दिखाई गई इस फिल्म को फ्रांस में प्रत्येक वर्ष होने वाली प्रतिष्ठित कांस फिल्म फेस्टिबल में बेस्ट ह्यूमन डाक्यूमेंट का विशेष पुरस्कार भी दिया गया । फिल्म पथेर पांचाली के बाद सत्यजीत रे ने फिल्म अपराजितो का निर्माण किया । इस फिल्म में युवा अप्पू की महत्वाकांक्षा और उसे प्यार वाली एक मां की भावना को दिखाया गया है । फिल्म जब प्रदर्शित हुी तो इसे सभी ने पसंद किया लेकिन मशहूर समीक्षक मृणाल सेन और ऋतिविक घटक ने इसे पाथेर पांचाली से बेहतर माना । फिल्म वीनस फेस्टिबल में गोल्डेन लॉयन अवार्ड से सम्मानित की गयी ।

वर्ष 1962 में सत्यजीत रे अपने दादा की पत्रिका संदेश की एक बार फिर से स्थापना की। सत्यजीत रे की पहली रंगीन फिल्म महानगर वर्ष 1963 में प्रदर्शित हुयी । कम लोगों को पता होगा कि जया भादुड़ी ने इसी फिल्म से अपने सिने कैरियर की शुरूआत की थी । वर्ष 1966 में सत्यजीत रे की एक और सुपरहिट फिल्म नायक प्रदर्शित हुयी । फिल्म में उत्तम कुमार ने अरिन्दम मुखर्जी नामक नायक की भूमिका निभाई । बहुत लोगों का मानना था कि फिल्म की कहानी अभिनेता उत्तम कुमार की जीवनी पर आधारित थी। फिल्म ने सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित किये । फिल्म के प्रदर्शन के बाद सत्यजीत रे ने कहा था यदि उत्तम कुमार इस फिल्म में काम करने से मना करते तो वह फिल्म का निर्माण नहीं करते । वर्ष 1969 में अपने दादा की रचित लघु कथा पर सत्यजीत रे ने गूपी गायन बाघा बायन का निर्माण किया । फिल्म को टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई, साथ ही बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुई।

वर्ष 1977 में सत्यजीत रे के सिने करियर की पहली हिंदी फिल्म शतरंज के खिलाड़ी प्रदर्शित हुई।   कुमार सईद जाफरी और अमजद खान की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म हालांकि टिकट खिड़की पर अपेक्षित सफलता नहीं अर्जित कर सकी, लेकिन समीक्षकों के बीच यह काफी सराही गयी । वर्ष 1978 में बर्लिन फिल्म फेस्टिबल की संचालक समिति ने सत्यजीत रे को विश्व के तीन ऑल टाइम डाइरेक्टर में एक के रूप में सम्मानित किया । अस्सी के दशक में स्वास्थ्य खराब रहने के कारण सत्यजीत रे ने फिल्मों का निर्माण करना काफी हद तक कम कर दिया ।

फिल्म घरे बाइरे के निर्माण के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ गया । इसके बाद डाक्टर ने सत्यजीत रे को फिल्म में काम करने से मना कर दिया। लगभग पांच वर्ष तक फिल्म निर्माण से दूर रहने के बाद वर्ष 1987 में सत्यजीत रे अपने पिता सुकुमार रे पर एक वृतचित्र का निर्माण किया । सत्यजीत रे को अपने चार दशक लंबे सिने करियर में मान-सम्मान खूब मिला। उन्हें भारत सरकार की ओर से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में विभिन्न विधाओं के लिए 32 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सत्यजीत रे वह दूसरे फिल्म कलाकार थे, जिन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया । वर्ष 1985 में सत्यजीत रे को हिंदी फिल्म उधोग के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया । इसके अलावे उन्हें भारत रत्न की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। उनके चमकदार कैरियर में एक गौरवपूर्ण नया अध्याय तब जुड़ गया, जब 1992 में उनके उल्लेखनीय कैरियर को देखते हुये उन्हें आस्कर सम्मान से सम्मानित किया गया । सत्यजीत रे ने अपने सिने करियर में 37 फिल्मों का निर्देशन किया। वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म आंगतुक सत्यजीत रे के सिने करियर की अंतिम फिल्म साबित हुयी । अपनी निर्मित फिल्मों से अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले महान फिल्मकार सत्यजीत रे ने 23 अप्रैल 1992 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया ।

 

कड़वा सत्य

Tags: DilaiIdentityIndian CinemaInternationallevelSatyajit Rayअंतराष्ट्रीयदिलाईपहचानभारतीय सिनेमासत्यजीत रेस्तर
Previous Post

एचडीएफसी मैन्युफैक्चरिंग फंड लॉन्च

Next Post

कश्मीर एनिगमा ऑफ पैराडाइज में पुराने कश्मीर से नए कश्मीर के सफरनामें को एकसूत्र में पिरोने की कोशिश : आदि ईरानी

Related Posts

सैफ अली खान मामले में घरेलू सहायिकाओं ने की आरोपी की पहचान
राजनीति

सैफ अली खान मामले में घरेलू सहायिकाओं ने की आरोपी की पहचान

February 6, 2025
हमास ने गाजा में मानवतावादी संकट की चेतावनी दी, अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की अपील की
विदेश

हमास ने गाजा में मानवतावादी संकट की चेतावनी दी, अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की अपील की

February 3, 2025
केजरीवाल के शासनकाल में बुनियादी सुविधाओं का हुआ निचले स्तर तक पतन-जयशंकर
देश

केजरीवाल के शासनकाल में बुनियादी सुविधाओं का हुआ निचले स्तर तक पतन-जयशंकर

February 2, 2025
देश के कुशल कामगारों को वैश्विक स्तर पर मिल रही है पहचान
देश

देश के कुशल कामगारों को वैश्विक स्तर पर मिल रही है पहचान

January 27, 2025
कड़े संघर्ष के बाद फिल्मों में पहचान बनायी अजित ने
बॉलीवुड

कड़े संघर्ष के बाद फिल्मों में पहचान बनायी अजित ने

January 27, 2025
मोदी दिल्ली के बूथ स्तर के भाजपा कार्यकर्ताओँ से करेंगे संवाद
देश

मोदी दिल्ली के बूथ स्तर के भाजपा कार्यकर्ताओँ से करेंगे संवाद

January 21, 2025
Next Post
कश्मीर एनिगमा ऑफ पैराडाइज में पुराने कश्मीर से नए कश्मीर के सफरनामें को एकसूत्र में पिरोने की कोशिश : आदि ईरानी

कश्मीर एनिगमा ऑफ पैराडाइज में पुराने कश्मीर से नए कश्मीर के सफरनामें को एकसूत्र में पिरोने की कोशिश : आदि ईरानी

New Delhi, India
Monday, January 12, 2026
Mist
17 ° c
34%
6.8mh
21 c 11 c
Tue
21 c 10 c
Wed

ताजा खबर

पंजाब सरकार का बड़ा कदम: बठिंडा जिला पुस्तकालय में ‘मिशन प्रगति’ शुरू, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग और फिजिकल ट्रेनिंग

पंजाब सरकार का बड़ा कदम: बठिंडा जिला पुस्तकालय में ‘मिशन प्रगति’ शुरू, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग और फिजिकल ट्रेनिंग

January 11, 2026
भगवंत मान सरकार का रिकॉर्ड: 16 मार्च 2022 से रोज़ औसतन 45 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, 1,746 कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र

भगवंत मान सरकार का रिकॉर्ड: 16 मार्च 2022 से रोज़ औसतन 45 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, 1,746 कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र

January 11, 2026
‘हर घर नल का जल’ के बाद अगला फोकस: O&M नीति से गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी

‘हर घर नल का जल’ के बाद अगला फोकस: O&M नीति से गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी

January 10, 2026
बिहार में 240 प्रखंडों के नए कार्यालय भवन: गुणवत्ता सुनिश्चित करने को अभियंताओं का विशेष प्रशिक्षण

बिहार में 240 प्रखंडों के नए कार्यालय भवन: गुणवत्ता सुनिश्चित करने को अभियंताओं का विशेष प्रशिक्षण

January 10, 2026
मान सरकार के डिजिटल विज़न से ईज़ी रजिस्ट्री ने बनाया रिकॉर्ड, 6 महीनों में 3.70 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियां हुई दर्ज

मान सरकार के डिजिटल विज़न से ईज़ी रजिस्ट्री ने बनाया रिकॉर्ड, 6 महीनों में 3.70 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियां हुई दर्ज

January 10, 2026

Categories

  • अपराध
  • अभी-अभी
  • करियर – शिक्षा
  • खेल
  • गीत संगीत
  • जीवन मंत्र
  • टेक्नोलॉजी
  • देश
  • बॉलीवुड
  • भोजपुरी
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • व्रत त्योहार
  • शिक्षा
  • संपादकीय
  • स्पेशल स्टोरी
  • स्वास्थ्य
  • About us
  • Contact us

@ 2025 All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी

@ 2025 All Rights Reserved