ईटानगर 18 मई (कड़वा सत्य) अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के टी परनायक ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सशस्त्र बल अखंडता और लचीलेपन के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में उभरी है।
जनरल परनायक ने शुक्रवार को नयी दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में लेफ्टिनेंट जनरल पीएस भगत मेमोरियल व्याख्यान में ‘उभरते भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सशस्त्र बलों का योगदान’ विषय पर अपने संबोधन में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि उभरता हुआ भारत एक मजबूत पेशेवर सशस्त्र बल पर बहुत अधिक निर्भर होगा। विकसित भारत के दृष्टिकोण को याद करते हुए उन्होंने जोर दिया कि सशस्त्र बलों का परिवर्तन बल संरचना और अनुकूलन, आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी समावेशन, मानव संसाधन प्रबंधन तथा संयुक्तता एवं एकीकरण पर निर्भर करता है।
राज्यपाल ने कहा कि देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने में सशस्त्र बल सबसे बड़ा उत्प्रेरक होना चाहिए। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से दूर-दराज के क्षेत्रों की जनसंख्या को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने की वकालत करते हुए उन्होंने युद्ध विकास के बदलते चेहरे के अनुसार सशस्त्र बलों के परिवर्तन के बेहतर बिंदु, उद्योग एकीकरण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में अनिवार्य प्रयास, साइबर युद्ध का मुकाबला करने के लिए नवीनतम विघटनकारी और ग्रे जोन प्रौद्योगिकियों का समावेश, दूरदर्शी धारणा प्रबंधन और एकीकरण का सुझाव दिया है।
इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल मनोज पांडे, यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) के महानिदेशक मेजर जनरल बीके शर्मा और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज एंड सिमुलेशन तथा यूएसआई के निदेशक मेजर जनरल आरएस यादव ने भी व्याख्यान में भाग लिया।
इस मौके पर लेफ्टिनेंट जनरल पीएस भगत पर एक फिल्म दिखाई गई और मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एसजी पित्रे द्वारा लिखित ‘द विक्टोरिया क्रॉस आइकन: विजन एंड लिगेसी’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। व्याख्यान में कई पूर्व प्रमुखों, वरिष्ठ सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भाग लिया।
अशोक
कड़वा सत्य