नयी दिल्ली 09 अगस्त (कड़वा सत्य) जैव ईंधन के क्षेत्र में नवीनतम विकास के साथ तालमेल रखने और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रधानमंत्री जी – वन योजना को संशोधित करने और इसकी अवधि को अब पांच वर्ष और बढ़ाने को मंजूरी दी गयी है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुयी बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुये कहा कि संशोधित प्रधान मंत्री जी-वन योजना को मंजूरी दी गयी है। संशोधित योजना योजना के कार्यान्वयन की समयसीमा को पाँच (5) वर्ष यानी 2028-29 तक बढ़ाती है और इसके दायरे में लिग्नोसेल्यूलोसिक फीडस्टॉक यानी कृषि और वानिकी अवशेष, औद्योगिक अपशिष्ट, संश्लेषण (सिन) गैस, शैवाल आदि से उत्पादित उन्नत जैव ईंधन शामिल हैं। “बोल्ट ऑन” प्लांट और “ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट” भी अब अपने अनुभव का लाभ उठाने और अपनी व्यवहार्यता में सुधार करने के लिए पात्र होंगे।
उन्होंने कहा कि कई तकनीकों और कई फीडस्टॉक्स को बढ़ावा देने के लिए, अब इस क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों के साथ परियोजना प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनके कृषि अवशेषों के लिए लाभकारी आय प्रदान करना, पर्यावरण प्रदूषण को दूर करना, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा करना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में योगदान देना है। यह उन्नत जैव ईंधन प्रौद्योगिकियों के विकास का भी समर्थन करता है और मेक इन इंडिया मिशन को बढ़ावा देता है। यह 2070 तक शुद्ध-शून्य जीएचजी उत्सर्जन के लिए भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद करता है।
प्रधानमंत्री जी-वन योजना के माध्यम से उन्नत जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता एक स्थायी और आत्मनिर्भर ऊर्जा क्षेत्र के प्रति उसके समर्पण को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र में भी ईथनोल मिश्रित ईंधन के उपयोग पर विचार किया जा रहा है और विमान ईंधन में ईथनोल को मिलाया जा सकता है।
शेखर सैनी
कड़वा सत्य