नयी दिल्ली 31 दिसंबर (कड़वा सत्य) डिजिटल तरीके से उधार लेने वालों में सिर्फ़ 18 प्रतिशत डेटा गोपनीयता के नियमों के बारे में समझते हैं, उनमें से ज़्यादातर (88 प्रतिशत) इस मामले में सिर्फ़ ऊपरी समझ रखते हैं।
कंज़्यूमर फ़ाइनेंस प्रदाता होम क्रेडिट इंडिया द्वारा जारी वार्षिक “हाउ इंडिया बॉरोज़-सर्वेक्षण 2023” रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। इसमें कहा गया है कि लगभग 60प्रतिशत उधार लेने वाले इस बात से चिंतित हैं कि उधार देने वाले ऐप से उनका व्यक्तिगत डेटा कैसे जमा और इस्तेमाल किया जाता है। इन चिंतित उधार देने वालों में से 58प्रतिशत का यह भी मानना है कि उधार देने वाले ऐप ज़रूरत से ज़्यादा डेटा जमा करते हैं। जेन-ज़ेड (जेनरेशन-ज़ेड) और छोटे शहरों के उधार लेने वाले उधार देने वालों के ऐप की ओर से जमा किए जा रहे डेटा की मात्रा के बारे में ज़्यादा चिंता दिखाते हैं। महानगरों में, चेन्नई के 78प्रतिशत उधार लेने वाले जमा किए गए डेटा के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। पुणे में क्षेत्रवार, 45प्रतिशत कर्ज लेने वाले लोग अपने व्यक्तिगत डेटा के संग्रहण के संबंध में चिंता व्यक्त करते हैं और 49 प्रतिशत यह मानते हैं कि ये ऐप आवश्यकता से अधिक डेटा एकत्र करते हैं।