नयी दिल्ली, 30 अगस्त (कड़वा सत्य) निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन योजना में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग के लिये आंदोलन कर रहे एक फोरम के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को कहा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर्मचारी पेंशन योजना-95 (ईपीएस-95) में सुधार की मांग
पर गंभीरता विचार करने और इसमें जल्द निर्णय का आश्वासन दिया है।
ईपीएस-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने समिति के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राजधानी में श्रीमती सीतारमण से शुक्रवार को मुलाकात की और पेंशनभोगियों की न्यूनतम पेंशन में वृद्धि और इसके सेवानिवृत्ति कर्मियों बेहतर चिकित्सा सुविधा की मांग दोहरायी।
विज्ञप्ति के मुताबिक श्रीमती सीतारमण ने निजी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन संबंधी मांगों को लेकर महाराष्ट्र के बुलढाणा में पिछले 2000 से अधिक दिन से चल रही क्रमिक भूख हड़ताल को समाप्त करने की अपील की।
श्री राउत ने एक बयान में कहा कि वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया है कि सरकार पेंशनभोगियों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्ध है और इस दिशा में शीघ्र ही निर्णय लिया जायेगा।
समिति ने वित्त मंत्री के साथ बैठक में इस बात पर असंतोष जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर पूर्व में दो बार आश्वासन दिये जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
गौरतलब है कि ईपीएस-95 पेंशनभोगी पिछले आठ वर्षों से अपनी पेंशन में 1,450 रुपये प्रति माह के औसत से न्यूनतम 7,500 रुपये प्रति माह तक की वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा की भी मांग
की गयी है।
बैठक के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से पेंशन में वृद्धि, उच्च पेंशन लाभों को बिना किसी भेदभाव के लागू करने और पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिये मुफ्त चिकित्सा सुविधायें प्रदान करने की मांग की। इस पर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि सरकार बुजुर्गों की जरूरतों के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील है और ईपीएस-95 के प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
समिति के प्रतिनिधिमंडल ने इससे कुछ दिन पहले केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त और श्रम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के साथ भी इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। श्री राउत ने कहा कि देश के 77 लाख पेंशनभोगी श्रमिक सरकार से ईपीएस-95 में शीघ्र सम्मानजनक सुधार की आस लगाये बैठे हैं।
श्रवण.
कड़वा सत्य