नयी दिल्ली, 27 जनवरी (कड़वा सत्य) कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी ने कहा है कि देश के कुशल कामगारों को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिल रही है, साथ ही हमारे प्रतिभाशाली कामगारों के समूह की व्यापक रूप से सराहना की जा रही है।
श्री चौधरी ने यहां रविवार शाम कौशल भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देश भर के 100 प्रतिष्ठित उद्यमियों की उपलब्धियों के मनाये गये उत्सव कार्यक्रम के दौरान कहा कि ग्लोबल स्किल कैपिटल के रूप में हमारा उभरना उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच में हुई चर्चा सतत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्यौगिकियाें और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास चर्चा के केन्द्र रहे। उन्होंने वैश्विक व्यापार प्रमुखों के साथ हुई बातचीत से मिली सोच साझा की।
उन्होंने कुशल प्रतिभा के स्रोत के रूप में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये उपस्थित उद्यमियों की सराहना की। श्री चौधरी ने कहा, “इस राष्ट्रीय समारोह में 100 उद्यमियों की भागीदारी हमारी कौशल पहलों के प्रभाव को दिखाती है। इन कार्यक्रमों ने देश भर में लोगों को सशक्त बनाया है, स्थायी आजीविका पैदा की है और अनेक लोगों को उद्यमशीलता की यात्रा करने के लिये प्रेरित किया है। ”
उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्ट-अप इकोसिस्टम दुनिया में सबसे बड़ा है, जिसमें 118 यूनिकॉर्न हैं, जिनकी कीमत 354 अरब डॉलर है। यह सफलता दूरदर्शी नीतियों, प्रभावी क्रियान्वयन और उद्यमियों की अनुकूलनशीलता से प्रेरित है।
कार्यक्रम के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिसमें छह करोड़ 30 लाख उद्यम ऐसे शामिल हैं, जो 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं और सकल घरेलू उत्पाद में 30 प्रतिशत और निर्यात में 45 फीसदी का योगदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, कौशल भारत मिशन के परिवर्तनकारी प्रभाव का भी उल्लेख किया गया, जिसमें युवाओं को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है।
श्री चौधरी ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों के इन उद्यमियों की कड़ी मेहनत की चर्चा की। इस मौके पर झारखंड के गढ़ निवासी रितेंद्र प्रसाद नामक उद्यमी को विशेष सम्मान दिया गया।
इस कार्यक्रम विशेष रूप से पूर्वोत्तर के 16 अग्रणी उद्यमियों को सम्मानित करना विशेष रहा, जिनमें नौ महिला उद्यमी भी शामिल थीं। इनमें असम के धुबरी जिले की श्रीमती नमिता एम. मारक और उदलगुरी जिले की श्रीमती मंदिरा बगलारी शामिल थीं। इन महिलाओं को महत्वपूर्ण चुनौतियों के बावजूद उनकी अनुकूलता और सफलता के लिये सम्मानित किया गया। उनकी कहानियां कौशल विकास और उद्यमिता की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर करती हैं।
श्री चौधरी ने भारतीय संविधान की स्थायी विरासत पर भी बात की, जो समानता, न्याय और अवसर की रक्षा करते हुये
भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार की रीढ़ के रूप में काम करती है।
इस कार्यक्रम में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के कर्मचारी और शीर्ष अधिकारी शामिल हुये।
श्रवण,
कड़वा सत्य