नयी दिल्ली, 20 सितंबर (कड़वा सत्य) छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के नक्सली हमलों और धमाकों में अपंग हुये, लोगों ने यहां केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुलाकात के दौरान सरकार से अधिक मदद तथा समर्थन की मांग की है।
पीड़ितों ने श्री शाह से गुरुवार को यहां मुलाकात के दौरान उन्हें बताया कि उनका गांव विकास की कमी और आधारभूत सुविधाओं की अनुपलब्धता से भी लंबे समय तक जूझा है। श्री शाह ने नक्सल पीड़ितों के संघर्ष और साहस की प्रशंसा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उनकी समस्याओं को हल करने के लिये प्रतिबद्ध है। सरकार नक्सलवाद को समाप्त करने के लिये ठोस कदम उठायेगी।
पीड़ितों ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि बस्तर के विकास के लिये कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। हाल ही में शुरू की गयी ‘नियद नेल्ला नार योजना’ ने इस क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास को एक नयी दिशा दी है। इस योजना के माध्यम से बस्तर के दूरदराज के इलाकों में सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मूलभूत सुविधायें पहुंचाने का काम हो रहा है, जिससे लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
पीड़ितों ने माओवादियों का शिकार हुये, पीड़ितों के अतीत को साझा किया, 17 मई 2010 को माओवादियों ने एक यात्री बस पर हमला किया, जिसमें 15 निर्दोष ग् ीण मारे गये और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। सुकमा जिले के निवासी दुधी महादेव इस हमले में अपने दाहिने पैर से हाथ धो बैठे। अन्य घायलों में ममता गोरला भी शामिल थीं, उनके शरीर पर गहरे घाव आये थे।
नक्सली हिंसा के शिकार में, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के अवलम मारा ने 22 फरवरी 2017 को माओवादी प्रेशर बम के विस्फोट में अपना बायां पैर तब गंवा दिया, जब अवलम जंगल में बांस काटने के लिये गया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने जमीन में छिपे बम पर पैर रखा, तेज धमाका हुआ और उनका पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। इस हादसे ने उन्हें जीवनभर के लिये बैसाखी के सहारे जीने को मजबूर कर दिया। वह अपने परिवार के लिये आजीविका का मुख्य स्रोत था।
ऐसी ही एक अन्य घटना में 18 दिसंबर 2013 को, नारायणपुर जिले की राधा सलाम अपने चचेरे भाई के साथ खेलते हुये एक चमकदार वस्तु उठाने गयी थी, जो दरअसल माओवादियों द्वारा लगाये गये बम का हिस्सा था। बम को उठाते ही धमाका हुआ, जिससे राधा ने अपनी एक आंख खो दी और उसके चेहरे पर गंभीर घाव हो गये। यह हादसा राधा और उसके परिवार के लिये बेहद कठिनाई पूर्ण साबित हुआ, क्योंकि उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका था और अब उसके पिता को उसकी देखभाल करनी पड़ रही है। राधा की स्थिति देखकर स्थानीय प्रशासन ने उसे आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया है।
इसके अलावा, पशुपालन से अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाली दंतेवाड़ा की भीमे मरकाम नौ नवंबर 2016 को माओवादी अत्याधुनिक उपकरण के धमाके की शिकार हो गयीं। इस हादसे में उन्होंने अपना बायां पैर खो दिया और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आयीं। स्थानीय प्रशासन ने उन्हें भी सहायता का भरोसा दिया है।
.श्रवण
कड़वा सत्य