नयी दिल्ली, 15 जनवरी (कड़वा सत्य) भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (इक्रीयर) के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ दीपक मिश्रा ने कहा है कि सरकार का अनुमान है कि देश का हल्दी निर्यात वर्ष 2030 तक एक अरब डॉलर तक पहुंच जायेगा।
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के शुभारंभ के एक दिन बाद इक्रीयर और एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लि ने मंगलवार को यहां ‘मेकिंग इंडिया द ग्लोबल हब फॉर टरमरिक’ शीर्षक से एक संयुक्त रिपोर्ट जारी की, जिसमें हल्दी किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। साथ ही इसमें वैश्विक हल्दी बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने के लिये एक रोडमैप पेश किया गया।
गौरतलब है कि मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश के प्रमुख हल्दी केंद्रों में से एक उत्तरी तेलंगाना के निजामाबाद में बोर्ड के कार्यालय का औपचारिक उद्घाटन किया। नये बोर्ड का लक्ष्य 2030 तक हल्दी के निर्यात को एक अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है। इससे देश के 20 प्रमुख राज्यों के हल्दी उत्पादक किसानों और हल्दी प्रसंस्कण इकाइयों को लाभ होगा।
डॉ मिश्रा ने इस मौके पर कहा कि अब जबकि सरकार ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की भी स्थापना कर दी है, इक्रीयर की रिपोर्ट इस बारे में ऐसी चुनिंदा सिफारिशें की गयी हैं कि कैसे भारत वैश्विक हल्दी उत्पादक और निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है। अध्ययन रिपोर्ट के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका डॉ अर्पिता मुखर्जी ने कहा, “ इस रिपोर्ट का उद्देश्य भारत में हल्दी और हल्दी उत्पादों के विकास और वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करते हुये वर्तमान रुझानों और विकास को प्रस्तुत करना और वैश्विक हल्दी उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है। ”
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 में पांच करोड़ 82 लाख डॉलर मूल्य का वैश्विक हल्दी बाजार 2028 तक वर्ष-दर-वर्ष 16.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, हल्दी से जुड़े भारतीय किसानों को उतार-चढ़ाव की कीमतों, सीमित बाजार पहुंच और कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमी जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। भारत में 2023-24 में 1,041,730 टन उत्पादन के साथ 297,460 हेक्टेयर में हल्दी की खेती करने के बावजूद उत्पादन को मजबूत करने और किसानों को सशक्त बनाने के लिये लक्षित हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है।
रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, थर्ड पार्टी प्रमाणित ऑर्गेनिक किसानों को बेहतर कीमत दिलाने में मदद करता है, लेकिन यह महंगा है और इसमें कोई सब्सिडी नहीं है। इसलिये, रिपोर्ट थर्ड पार्टी ऑर्गेनिक के लिये सब्सिडी, नियामक निकायों को सुव्यवस्थित करने और नियामक सहयोग के लिये आपसी मान्यता समझौतों पर हस्ताक्षर करने की सिफारिश करती है, जो निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत एमआरएल वाली उच्च-कर्क्यूमिन (पांच प्रतिशत से अधिक) हल्दी की वैश्विक मांग का केवल 10 प्रतिशत ही आपूर्ति करने में सक्षम है। इसलिये, उच्च-कर्क्यूमिन किस्म विकसित करने के लिये अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता है और ऐसी किस्मों को वैश्विक प्लेटफार्मों पर मार्केटिंग किया जाना चाहिये। रिपोर्ट में हल्दी के व्यापार में भौगोलिक संकेतों पर चर्चा को प्रोत्साहित करने की भी सिफारिश की गयी है।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है, “ भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में हैं एवं और अधिक जीआई उत्पादों की गुंजाइश है। पांच प्रतिशत से अधिक करक्यूमिन वाले उत्पादों में जीआई को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये। ”
एमवे इंडिया के प्रबंध निदेशक रजनीश चोपड़ा ने इस मौके पर कहा, “ आईसीआरआईईआर की रिपोर्ट हल्दी उद्योग में वर्तमान परिदृश्य और भविष्य के अवसरों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह रिपोर्ट भारत के निर्यात को बढ़ाने और भारत को हल्दी के लिये वैश्विक केंद्र बनाने के सरकार के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।” उन्होंने कहा कि हज्दी के कारोबार में रोजगार सृजन की बड़ी संभावनायें हैं।
श्रवण.
कड़वा सत्य