इंफाल 09 जून (कड़वा सत्य) मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने शनिवार को नयी दिल्ली में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से राज्य पर संकट के मामले पर चर्चा की।
गौरतलब है कि असम की सीमा से लगा जिरीबाम जिला मणिपुर संकट का केंद्र बन गया है1 संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने पिछले दिनों जिले में दो पुलिस स्टेशनों, सरकारी कार्यालयों और एक अलग समुदाय के घरों को जला दिया था।
इंफाल जिरीबाम राजमार्ग पूरे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इंफाल से माओ तक जाने वाले दूसरे राजमार्ग पर कुकी उग्रवादियों का नियंत्रण है और राजमार्ग में भटक कर आए 41 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
पुलिस ने कहा कि मणिपुर पुलिस कर्मियों की एक मजबूत टीम को हवाई मार्ग से जिले में भेजा गया है और पुलिस अधीक्षक को बदल दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि यह जिला मुस्लिम, मैतेई और नागा बहुल है और यहां कुकी समुदाय के घर कम हैं इसलिए पहले कोई परेशानी नहीं हुई। हालाँकि सोइबम सरत सिंह नाम के एक व्यक्ति का पिछले गुरुवार को संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने अपहरण कर लिया था और उसका सिर काट दिया था जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने कुछ घरों पर हमला कर दिया था।
निवासियों ने कहा कि बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने सरकारी कार्यालयों, दो पुलिस स्टेशनों, सरकारी कार्यालयों, वाहनों, 80 घरों को जला दिया और वाहनों, घरों को नष्ट करने के लिए बमों का इस्तेमाल किया। वहां से भागने में सफल रहे करीब 200 लोग जिला मुख्यालय पर शरण ले रहे हैं।
नागरिकों ने हमले को रोकने में विफलता के लिए सरकार को दोषी ठहराया।
कांग्रेस सांसद एके बिमोल ने कहा कि निकाले गए लोगों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करके वापस लौटने में मदद की जानी चाहिए।
संगठनों ने कहा कि एक बार जब लोग गांवों से भाग जाते हैं तो कुकी उग्रवादी स्थायी रूप से क्षेत्र में रहते हैं जैसा कि अन्य जिलों और मोरेह जैसे प्रमुख सीमावर्ती शहर में देखा गया है।
म्यांमार सीमा के पास सीमावर्ती शहर मोरेह में एक संपन्न व्यापार केंद्र जहां मैतेई, नागा, तमिल शांति से रह रहे थे को निशाना बनाया गया और अब केवल कुकी उग्रवादी और उनके समर्थक मोरेह में रहते हैं।
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कड़वा सत्य