नयी दिल्ली 24 जनवरी (कड़वा सत्य) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ‘युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली – ’ (बीएसएस) को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।
रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि ‘ ’ एक स्वचालित प्रणाली है जो सभी जमीनी और हवाई युद्धक्षेत्र में लगे सेंसरों से जानकारी को एकीकृत करती है। यह प्रणाली जानकारियों की सत्यता की पुष्टि करने के लिए उन्हें संसाधित करती है, दोहराव को रोकती है और उन्हें सुरक्षित सेना डेटा नेटवर्क और सैटेलाइट संचार नेटवर्क पर युद्धक्षेत्र की निगरानी परिदृश्य बनाने के लिए संबद्ध करती है। इस प्रणाली से युद्धक्षेत्र के बारे में जानकारी बढेगी और एक केंद्रीकृत वेब एप्लिकेशन के माध्यम से भविष्य के युद्धक्षेत्र के बारे में कमान और सेना मुख्यालय को जानकारी भेजी जायेगी।
यह प्रणाली अत्याधुनिक सेंसर और अत्याधुनिक एनालिटिक्स से लैस है। यह लंबी भूमि सीमाओं की निगरानी , घुसपैठ रोकने , अद्वितीय सटीकता के साथ स्थितियों का आकलन करने और खुफिया, निगरानी और टोही अभियानों में अहम भूमिका निभाएगी। यह कमांडरों को नेटवर्क केंद्रित वातावरण में पारंपरिक ऑपरेशन में काम करने में सक्षम बनाएगी। इसका समावेश भारतीय सेना में डेटा और नेटवर्क केंद्रितता की दिशा में एक बड़ी छलांग होगी।
को भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा स्वदेशी रूप से और संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। यह भारतीय सेना के ‘ प्रौद्योगिकी समावेश वर्ष’ के अनुसरण में ‘आत्मनिर्भरता’ प्राप्त करने की दिशा में एक अनुकूल पारिस्थितिकी प्रणाली बना रहा है। इस वर्ष मार्च से अक्टूबर तक तीन चरणों में इन प्रणालियों को भारतीय सेना के सभी संचालन ब्रिगेड, डिवीजनों और कोर में शामिल किया जाएगा। इस प्रणाली को 2,402 करोड़ रुपये की लागत से खरीदें (भारतीय) श्रेणी के तहत विकसित किया गया है।
इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री सेठ, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) कुमार, बीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज जैन तथा रक्षा मंत्रालय और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कड़वा सत्य