नयी दिल्ली 03 अक्टूबर (कड़वा सत्य) श्री कला केंद्र की अध्यक्ष पद्मश्री शोभा दीपक सिंह ने गुरुवार को यहां कहा कि ायण की कथा पर आधारित ‘श्री ‘ नाट्य केवल ायण की पुनर्कथन नहीं है बल्कि यह एक शैक्षिक उपकरण है। पीढ़ियों के बीच एक सामान्य संबंध और नृत्य कविता में भारतीय प्रतिभा को ंजलि है।
श्री भारतीय कला केंद्र अपनी श्रेष्ठतम कृति “श्री ” का 68 वां वर्ष मना रहा है। इस अवसर पर हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि में यहाँ गुरुवार को इस नाट्य का आयोजन किया गया।