नयी दिल्ली 27 जनवरी (कड़वा सत्य) भारत के सबसे बड़े स्टेनलेस स्टील निर्माता जिंदल स्टेनलेस को उम्मीद है कि आगामी केंद्रीय बजट में स्टेनलेस स्टील क्षेत्र के विकास में बाधा बनने वाली प्रमुख चुनौतियों से निपटने को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी ने कहा कि स्टेनलेस स्टील उद्योग भारत के विनिर्माण क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और अर्थव्यवस्था के विकास में अत्यधिक योगदान देता है। सरकार से उम्मीद है कि वह स्टेनलेस स्टील उद्योग की कुछ प्रमुख आवश्यकताओं को पूरा करेगी, जिनमें अंतर्देशीय जलमार्ग, रेलवे और तटीय परिवहन जैसे गतिशील बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना, आवश्यक कच्चे माल के आयात पर शून्य आयात शुल्क जारी रखना और सस्ते आयात से होने वाले नुकसान को रोकना आदि शामिल हैं।
केंद्रीय बजट 2025-26 से पहले जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा, “स्टेनलेस स्टील की मांग बढ़ाने के लिए, हम सरकार को बुनियादी ढांचे पर खर्च को प्राथमिकता देते रहने और अंतर्देशीय जलमार्ग, रेल बुनियादी ढांचे और तटीय परिवहन जैसे गतिशील बुनियादी ढांचे के विकास पर खास ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक और महत्वपूर्ण जरूरत है। हमारी सलाह है कि भारत में अनुपलब्ध महत्वपूर्ण कच्चे माल जैसे मोलिब्डेनम अयस्क पर आयात शुल्क घटाकर शून्य किया जाए और शुद्ध निकेल, फेरो-निकेल, स्टेनलेस स्टील स्क्रैप, और कार्बन स्टील स्क्रैप पर शून्य शुल्क जारी रखा जाए। वहनीयता को बढ़ावा देने के लिए, हम सरकारी खरीद के दौरान माल के चयन के समय, रख-रखाव पर आने वाले खर्च को एक अनिवार्य मानदंड बनाने का प्रस्ताव रखते हैं। सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से घरेलू उद्योग को बचाने के लिए हम सरकार से ऐसे सभी देशों के स्टेनलेस स्टील उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का आग्रह करते हैं, जिनके साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता नहीं है। इन प्रयासों से घरेलू स्टेनलेस स्टील उद्योग मजबूत होगा और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण को साकार करने में मदद मिलेगी।“
उन्होंने कहा कि जिंदल स्टेनलेस सरकारी पहलों की सराहना करता है और भारत को दुनिया भर में स्टेनलेस स्टील उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए सरकार के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शेखर,
कड़वा सत्य