• About us
  • Contact us
Monday, February 9, 2026
11 °c
New Delhi
20 ° Tue
20 ° Wed
Kadwa Satya
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
Kadwa Satya
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
  • जीवन मंत्र
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • स्पेशल स्टोरी
Home संपादकीय

क्या सेल्फी कूटनीति ने बिगाड़ दी भारत की विदेश नीति? जानिए क्यों अमेरिका, रूस और पड़ोसी देश दूर हो रहे हैं!

News Desk by News Desk
July 31, 2025
in संपादकीय
क्या सेल्फी कूटनीति ने बिगाड़ दी भारत की विदेश नीति? जानिए क्यों अमेरिका, रूस और पड़ोसी देश दूर हो रहे हैं!
Share on FacebookShare on Twitter

पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति में एक अलग प्रवृत्ति देखने को मिली—जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति को केंद्र में रखा गया। अमेरिका के राष्ट्रपतियों—बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप को “मित्र” कहकर संबोधित करना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गले मिलना, मंच साझा करना—इन घटनाओं ने भारत की विदेश नीति को नई दिशा देने का दावा किया।


लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने इन प्रयासों की सीमाएं उजागर कर दी हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाना और अतिरिक्त सर्चार्ज थोपना एक बड़ा झटका साबित हुआ। भारत की ओर से सात दौर की बातचीत के बावजूद समुद्री खाद्य, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को कोई छूट नहीं मिली।
भारतीय संसद में विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “विदेश नीति सेल्फी नहीं, बल्कि ठोस रणनीति होती है।” भाजपा के अंदर से भी कुछ आलोचनात्मक स्वर उठे, जिनका मानना था कि अत्यधिक ‘व्यक्तिकृत’ कूटनीति ने संस्थागत निरंतरता को नुकसान पहुंचाया है।
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने कहा, “भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता से रणनीतिक अस्पष्टता की ओर कदम बढ़ाया है।”

बिगड़ते संबंध और चीन की बढ़ती पकड़
रूस के साथ ऐतिहासिक रिश्ते कमजोर हो चुके हैं। कभी भिलाई स्टील प्लांट (1955), आईआईटी बॉम्बे (1958), और आर्यभट्ट उपग्रह (1975) जैसे सहयोग आज सिर्फ हथियार और तेल व्यापार तक सीमित हो गए हैं। अब रूस से अधिक महंगे दामों पर पश्चिमी हथियार खरीदे जा रहे हैं, जिनमें तकनीकी स्थानांतरण (Technology Transfer) बेहद कम होता है।


उधर Reliance की जामनगर रिफाइनरी ने ही 2023 में ₹66,000 करोड़ से अधिक का सस्ता रूसी कच्चा तेल प्रोसेस किया, जिससे लाभ तो निजी कंपनियों को हुआ, लेकिन भारत की स्थिति रूस-यूक्रेन युद्ध पर अस्पष्ट बनी रही।


इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी भारत की स्थिति अस्थिर दिखती है। क्वाड (QUAD) की सक्रियता के बावजूद भारत ने अमेरिका के साथ सैन्य साझेदारी को सीमित रखा है। ‘बहु-संरेखण’ (multi-alignment) की नीति अब गैर-संरेखण की परछाईं मात्र बनकर रह गई है, जिसके पीछे कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं है।


क्षेत्रीय स्तर पर भी भारत की भागीदारी कमजोर हुई है। बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौता 2011 से लटका हुआ है, जिस पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 में खुली नाराजगी जताई। श्रीलंका ने अपने आर्थिक संकट के दौरान भारत की निष्क्रियता के चलते चीन और IMF से मदद ली, और नेपाल तथा भूटान ने भी भारत की संचारहीनता पर असंतोष जताया।


BRICS और SAARC जैसे मंचों पर भी भारत का प्रभाव घटा है। जहां पहले भारत नेतृत्व की भूमिका निभाता था, अब चीन की आर्थिक ताकत ने इन मंचों पर उसे हावी बना दिया है।


भारत की विदेश नीति में कॉरपोरेट हितों का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखता है। ऊर्जा के क्षेत्र में रूस से सस्ता तेल खरीदने से आम जनता को सीधे लाभ कम मिला, जबकि निजी रिफाइनरियों और कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया। अगर अमेरिका कभी ऊर्जा व्यापार पर प्रतिबंध लगाता है, तो Ambani जैसी बड़ी कंपनियां संकट में आ सकती हैं, लेकिन नीति की दिशा का भार आम नागरिक उठाएंगे।


दूसरी ओर, भारतीय बैंकों ने पिछले एक दशक में ₹16.35 लाख करोड़ के कॉरपोरेट लोन राइट-ऑफ किए हैं, जिनका सीधा लाभ बड़े उधारकर्ताओं को मिला, जबकि किसान और छोटे उद्योगों को राहत बेहद सीमित रही।


‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी योजनाएं भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाईं। उदाहरण के लिए, HAL का ‘तेजस’ लड़ाकू विमान आज तक कोई बड़ा विदेशी खरीदार नहीं जुटा पाया। इसके उलट भारत अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा आयातक बना हुआ है।


चीन के साथ भी सीमा विवादों के बावजूद व्यापार लगातार बढ़ता गया। 2024 में चीन से भारत के 70% इलेक्ट्रॉनिक्स आयात हुए। इससे साफ है कि रणनीति और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।


निष्कर्ष: अब जरूरी है नीति में स्पष्टता और संस्थागत ताकत
भारत की विदेश नीति ने दिखावटी प्रदर्शन तो खूब किया, लेकिन परिणाम सीमित रहे। रणनीतिक साझेदार अनिश्चित हो गए, पड़ोसियों का भरोसा डगमगा गया, और वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज कमजोर पड़ी।
आने वाले समय में भारत को तीन बड़े कदम उठाने होंगे:

  1. पुराने सहयोगियों (जैसे रूस, मध्य एशिया) के साथ रिश्तों की पुनर्बहाली।
  2. पड़ोसियों के साथ विश्वास आधारित नीति—SAARC और ASEAN के माध्यम से।
  3. विदेश नीति को केवल व्यक्तित्व नहीं, संस्थाओं और स्पष्ट सिद्धांतों से संचालित करना।
    ‘मैत्री’ सिर्फ तस्वीरों से नहीं बनती—बल्कि समान हितों की स्थायी अभिव्यक्ति से बनती है। अगर भारत को वैश्विक मंच पर नेतृत्व करना है, तो उसे अब सिर्फ जोर से नहीं, सोच-समझ कर और स्पष्ट रणनीति के साथ बोलना होगा।
Tags: Ambani Russian Oil DealChina India Trade DeficitForeign Policy of India ExplainedIndia Strategic AutonomyIndia USA Trade TariffModi Foreign Policy FailureQuad Indo Pacific StrategyRussia India RelationshipSAARC ASEAN Indiaभारत विदेश नीति 2025
Previous Post

बिहार की गरीबी उन्मूलन योजना से श्रीलंका भी हुआ प्रभावित! 28 सदस्यीय विदेशी दल ने देखा ‘जीविका मॉडल’ का जमीनी असर

Next Post

Asia Rugby 2025: बिहार ने रच दिया इतिहास! एशिया रग्बी 2025 की मेज़बानी, ‘अशोक’ बना सबका हीरो!

Related Posts

No Content Available
Next Post
Asia Rugby 2025: बिहार ने रच दिया इतिहास! एशिया रग्बी 2025 की मेज़बानी, ‘अशोक’ बना सबका हीरो!

Asia Rugby 2025: बिहार ने रच दिया इतिहास! एशिया रग्बी 2025 की मेज़बानी, 'अशोक' बना सबका हीरो!

New Delhi, India
Monday, February 9, 2026
Mist
11 ° c
87%
5.8mh
27 c 14 c
Tue
27 c 15 c
Wed

ताजा खबर

नशे के ठिकाने बताकर नशा तस्करों को प्रोमोट कर हैं सांसद चरणजीत चन्नी: बलतेज पन्नू

नशे के ठिकाने बताकर नशा तस्करों को प्रोमोट कर हैं सांसद चरणजीत चन्नी: बलतेज पन्नू

February 7, 2026
पंजाब शिक्षा क्रांति: भगवंत सिंह मान सरकार ने रचा इतिहास, एक दिन में 17.5 लाख माता-पिता राज्यव्यापी वर्कशॉप से जुड़े

पंजाब शिक्षा क्रांति: भगवंत सिंह मान सरकार ने रचा इतिहास, एक दिन में 17.5 लाख माता-पिता राज्यव्यापी वर्कशॉप से जुड़े

February 7, 2026
65 लाख परिवारों को ₹10 लाख सुरक्षा कवच—मान सरकार की हेल्थ स्कीम का असर जमीन पर दिखा

65 लाख परिवारों को ₹10 लाख सुरक्षा कवच—मान सरकार की हेल्थ स्कीम का असर जमीन पर दिखा

February 7, 2026
स्क्वॉश चैंपियन – मुदित पंत ने फ़हराया विदेश में भी भारत का ध्वज!

स्क्वॉश चैंपियन – मुदित पंत ने फ़हराया विदेश में भी भारत का ध्वज!

February 7, 2026
संत समाज ने की भगवंत सिंह मान सरकार की सराहना — गुरु रविदास जी के 649वें प्रकाश पर्व पर शानदार इंतज़ाम

संत समाज ने की भगवंत सिंह मान सरकार की सराहना — गुरु रविदास जी के 649वें प्रकाश पर्व पर शानदार इंतज़ाम

February 6, 2026

Categories

  • अपराध
  • अभी-अभी
  • करियर – शिक्षा
  • खेल
  • गीत संगीत
  • जीवन मंत्र
  • टेक्नोलॉजी
  • देश
  • बॉलीवुड
  • भोजपुरी
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • व्रत त्योहार
  • शिक्षा
  • संपादकीय
  • स्पेशल स्टोरी
  • स्वास्थ्य
  • About us
  • Contact us

@ 2025 All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी

@ 2025 All Rights Reserved