PM Modi Japan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जापान की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह दो दिन का दौरा भारत-जापान संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वे कल टोक्यो में जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात करेंगे और 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान रक्षा, व्यापार, निवेश और अवसंरचना जैसे मुद्दों पर गहन बातचीत होने की संभावना है।
इस यात्रा का सबसे बड़ा पहलू क्वाड को लेकर है। भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग का आधार बन चुका है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के मुताबिक जब दोनों नेता आमने-सामने बैठेंगे तो क्वाड ज़रूर उनकी चर्चा का केंद्रीय विषय होगा। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्वाड की अहमियत और बढ़ जाती है।
रक्षा सहयोग भी इस यात्रा का एक अहम हिस्सा है। हाल ही में भारत और जापान ने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए उन्नत रेडियो एंटीना के विकास पर समझौता किया था। दोनों देश अब रक्षा उपकरणों और तकनीकी साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। नौसेनाओं के बीच जहाजों की देखरेख और रखरखाव को लेकर भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जापान भारत का रक्षा क्षेत्र में एक और मजबूत साझेदार बन सकता है।
यात्रा का एक आकर्षक पहलू मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भी है। प्रधानमंत्री मोदी टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री और सेंदाइ स्थित तोहोकू शिंकानसेन प्लांट का दौरा करेंगे, जहां बुलेट ट्रेन के डिब्बे बनाए जाते हैं। संभावना जताई जा रही है कि मोदी और इशिबा इस परियोजना को लेकर विस्तार से चर्चा करेंगे। भारत को जापान से जो नई E10 ट्रेनें मिलने वाली हैं, उनकी रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी और इन्हें ड्राइवरलैस तकनीक से लैस करने पर भी काम चल रहा है। भारत में यह ट्रेन 2027 तक पटरियों पर दौड़ने की उम्मीद है।
भारत और जापान के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से भी बेहद गहरे हैं। छठी शताब्दी से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव रहा है। आधुनिक दौर में यह रिश्ता 2000 से वैश्विक साझेदारी और 2014 से विशेष रणनीतिक साझेदारी में तब्दील हुआ। आर्थिक मोर्चे पर भी जापान भारत का एक मजबूत सहयोगी है। 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 22.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत जापान को रसायन, वाहन और समुद्री भोजन निर्यात करता है, जबकि जापान से मशीनरी और इस्पात का आयात करता है।
मोदी का यह दौरा केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास और रणनीतिक साझेदारी के नए रास्ते खुलने की उम्मीद भी है। चाहे वह बुलेट ट्रेन का सपना हो या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की रणनीति, जापान यात्रा भारत के भविष्य के लिए कई मायनों में अहम साबित हो सकती है।