Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आएंगे। क्रेमलिन ने शुक्रवार (29 अगस्त) को इस बात की आधिकारिक पुष्टि की। पुतिन इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 50% टैरिफ लगा दिए हैं। ऐसे में पुतिन का भारत आना कूटनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ट्रंप का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर रूस की आर्थिक मदद कर रहा है और अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में भूमिका निभा रहा है।
ट्रंप ने यहां तक कह दिया था कि “भारत ही रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए जिम्मेदार है।” इस बयान के बाद भारत, अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक हलचल और तेज हो गई।
पुतिन-मोदी की फोन पर बातचीत
अगस्त 2025 की शुरुआत में पुतिन और मोदी के बीच फोन पर बातचीत भी हुई थी। इस दौरान पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से अलास्का में हुई मुलाकात और यूक्रेन युद्ध पर अपने विचार साझा किए। पीएम मोदी ने अपनी ओर से दोहराया कि भारत हमेशा विवादों का समाधान संवाद और शांतिपूर्ण तरीके से चाहता है।
2022 के बाद पहली भारत यात्रा
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अप्रैल 2025 में ही इस यात्रा का संकेत दे दिया था। लेकिन अब आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। खास बात यह है कि पुतिन फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार भारत आ रहे हैं। उनकी पिछली भारत यात्रा दिसंबर 2021 में हुई थी।
भारत और रूस दशकों से करीबी रणनीतिक साझेदार रहे हैं। ऊर्जा, रक्षा सौदे और तकनीकी सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की मुख्य कड़ी हैं। यही वजह है कि मौजूदा हालात में पुतिन की यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है।
अजित डोभाल ने भी दिया था संकेत
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कुछ समय पहले पुतिन की भारत यात्रा का ऐलान किया था। हालांकि, तब उन्होंने सटीक तारीख नहीं बताई थी। अब क्रेमलिन की घोषणा के बाद साफ हो गया है कि पुतिन इस साल दिसंबर में भारत आएंगे।
क्यों अहम है यह दौरा?
- पुतिन का भारत दौरा कई मायनों में खास है।
- अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बीच यह भारत की विदेश नीति की परीक्षा होगी।
- ऊर्जा साझेदारी पर दोनों देशों की बातचीत अहम होगी, क्योंकि भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा आयातक बन चुका है।
- रक्षा और तकनीकी सहयोग पर भी नई योजनाएं सामने आ सकती हैं।
- भारत की कोशिश होगी कि वह अमेरिका और रूस, दोनों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित बनाए रखे।
दिसंबर 2025 में होने वाली यह यात्रा सिर्फ भारत-रूस संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका रिश्तों और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।