• About us
  • Contact us
Wednesday, May 20, 2026
43 °c
New Delhi
40 ° Thu
39 ° Fri
Kadwa Satya
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
Kadwa Satya
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
  • जीवन मंत्र
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • स्पेशल स्टोरी
Home संपादकीय

लद्दाख की पुकार और सत्ता की चुप्पी : राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की लड़ाई

News Desk by News Desk
September 24, 2025
in संपादकीय
लद्दाख की पुकार और सत्ता की चुप्पी : राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की लड़ाई
Share on FacebookShare on Twitter

संपादक अमित पांडे

लद्दाख आजादी के बाद से ही केंद्र और राज्य के बीच खिंची रस्साकशी का हिस्सा रहा है। 2019 में जब जम्मू-कश्मीर को bifurcate करके अलग-अलग दो केंद्रशासित प्रदेश बनाए गए, तो लद्दाख ने इसे अपनी जीत माना था। वर्षों से मांग रही थी कि लद्दाख को सीधे दिल्ली से शासित किया जाए ताकि कश्मीर की राजनीति की परछाई से मुक्ति मिल सके। परंतु पाँच वर्ष बीतते ही वही लद्दाख आज सड़कों पर है, चार लोगों की मौत हो चुकी है, और प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक तक को अपना अनशन तोड़ना पड़ा। सवाल यह है कि जिस बदलाव को उत्सव के रूप में मनाया गया था, वह आक्रोश और हिंसा में कैसे बदल गया?


इसका उत्तर गहराई से लद्दाख की सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं में छिपा है। लद्दाख भौगोलिक दृष्टि से एक ठंडा रेगिस्तान है, जिसकी कुल जनसंख्या 3 लाख से कुछ अधिक है। इनमें से 80% से अधिक लोग अनुसूचित जनजाति वर्ग में आते हैं। यह आँकड़ा अपने आप में बताता है कि यहाँ छठी अनुसूची के प्रावधान कितने प्रासंगिक हो सकते हैं। छठी अनुसूची, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत, आदिवासी क्षेत्रों को विशेष स्वायत्तता देती है—भूमि, संस्कृति और स्थानीय प्रशासन पर नियंत्रण। यही वह आश्वासन था जो 2019 में दिया गया, परंतु पाँच साल बाद भी धरातल पर इसका कोई ठोस स्वरूप नहीं दिखा।


वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के आंदोलन का सार यही है कि बिना संवैधानिक गारंटी के लद्दाख की विशिष्ट पहचान और संसाधनों की सुरक्षा संभव नहीं। जब जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा पुनः दिला दिया गया और वहाँ विधानसभा चुनाव भी संपन्न हो गए, तो लद्दाख के लोग खुद को और अधिक उपेक्षित महसूस करने लगे। वहाँ की जनता ने देखा कि जहाँ जम्मू-कश्मीर को जनप्रतिनिधित्व और नीति-निर्माण का अवसर मिला, वहीं लद्दाख को केवल एक उपराज्यपाल और केंद्र के अफसरों की निगरानी पर छोड़ दिया गया।


लद्दाख के लोग सबसे अधिक चिंतित भूमि अधिकारों को लेकर हैं। पहले अनुच्छेद 370 और उससे जुड़े प्रावधानों के कारण गैर-स्थानीय लोगों को यहाँ भूमि खरीदने की अनुमति नहीं थी। यह सुरक्षा कवच अब हट चुका है। एक ठंडे रेगिस्तान में जहाँ खेती योग्य भूमि पहले से ही बहुत कम है, वहाँ बाहरी पूंजी और उद्योग के आगमन से स्थानीय लोगों के विस्थापन का खतरा वास्तविक हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि लद्दाख की कुल भूमि का मात्र 0.2% ही खेती योग्य है। ऐसी स्थिति में भूमि की सुरक्षा केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है।


सोनम वांगचुक का यह कहना बिल्कुल तर्कसंगत है कि अगर केंद्र सरकार ने छठी अनुसूची का वादा पूरा किया होता तो आज की हिंसा और अविश्वास की स्थिति नहीं बनती। हिंसा के दृश्य निश्चित ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं, परंतु यह भी सच है कि यह निराशा और अधीरता का परिणाम है। लगातार शांतिपूर्ण धरनों और अनशनों के बावजूद जब केंद्र केवल बैठकें टालता रहा और ठोस निर्णय नहीं लिया, तब युवाओं के सब्र का बाँध टूटा।


आंकड़ों से स्पष्ट है कि लद्दाख के लिए विकास का मॉडल केवल दिल्ली से आदेश भेजने से सफल नहीं हो सकता। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की साक्षरता दर 77% है, परंतु बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ रही है। पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्था कोविड के बाद से पहले ही हिल चुकी है। अब भूमि और संसाधनों पर असुरक्षा की भावना युवाओं में और बेचैनी फैला रही है। यही वजह है कि आंदोलन केवल कुछ बुज़ुर्ग नेताओं का मुद्दा न रहकर पूरे समाज का आंदोलन बन चुका है।


लद्दाख का संघर्ष हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या केंद्र केवल प्रशासनिक इकाई समझकर वहाँ के लोगों की सांस्कृतिक और सामाजिक आकांक्षाओं को नजरअंदाज कर सकता है? अगर असम, मिज़ोरम, त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों में छठी अनुसूची की व्यवस्था लागू हो सकती है तो लद्दाख के लिए क्यों नहीं? वहाँ भी अधिकांश जनसंख्या जनजातीय है, वहाँ भी सांस्कृतिक पहचान अलग है, और वहाँ भी संसाधनों पर बाहरी दबाव का डर वास्तविक है।


हिंसा कभी समाधान नहीं होती। सोनम वांगचुक जैसे लोग इसी बात पर जोर देते रहे हैं कि आंदोलन को शांतिपूर्ण रखा जाए ताकि यह राष्ट्रीय हित में भी स्वीकार्य हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि पर धब्बा न लगे। परंतु सत्ता की जिद और संवाद की देरी ने हालात को इस मोड़ पर ला दिया कि मौतें हो गईं और बीजेपी का कार्यालय तक जलाया गया। यह स्थिति न तो सरकार के लिए सम्मानजनक है, न ही लद्दाख के समाज के लिए।


अब भी देर नहीं हुई है। केंद्र सरकार को यह समझना होगा कि राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची केवल राजनीतिक नारे नहीं, बल्कि वहाँ के लोगों की आत्मा से जुड़े प्रश्न हैं। जब तक इस प्रश्न का सम्मानजनक समाधान नहीं होता, तब तक लद्दाख की शांति केवल दिखावा होगी। लोकतंत्र केवल आदेशों से नहीं चलता, वह विश्वास से चलता है। और आज लद्दाख उस विश्वास की तलाश में है।

Tags: Breaking News LadakhCentre Ladakh TalksLadakh BJP Office AttackLadakh GENZ ViolenceLadakh Protest 2025Ladakh Statehood DemandLeh Hill Council ClashLeh Ladakh ProtestSonam Wangchuk Hunger Strike
Previous Post

Punjab Flood Relief: CM मान सरकार ने सिर्फ 7 दिन में बचाए 1.75 लाख से ज़्यादा पशु, ‘गल-घोटू’ से किसानों की रोज़ी-रोटी सुरक्षित

Next Post

पटना के बापू टावर में सजी रामायण की वैश्विक प्रदर्शनी, 15 देशों से आई दुर्लभ कलाकृतियां

Related Posts

No Content Available
Next Post
पटना के बापू टावर में सजी रामायण की वैश्विक प्रदर्शनी, 15 देशों से आई दुर्लभ कलाकृतियां

पटना के बापू टावर में सजी रामायण की वैश्विक प्रदर्शनी, 15 देशों से आई दुर्लभ कलाकृतियां

New Delhi, India
Wednesday, May 20, 2026
Clear
43 ° c
11%
15.8mh
45 c 35 c
Thu
44 c 34 c
Fri

ताजा खबर

बिहार में खेल विकास को नई गति: खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विभागीय प्राथमिकताओं एवं प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की

बिहार में खेल विकास को नई गति: खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विभागीय प्राथमिकताओं एवं प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की

May 20, 2026
पटना न्यूज़: बिहार सरकार ने लॉन्च की ‘ब्रांड बिहार’ पहल, साक्ष्य-आधारित संचार से मजबूत होगी राज्य की पहचान

पटना न्यूज़: बिहार सरकार ने लॉन्च की ‘ब्रांड बिहार’ पहल, साक्ष्य-आधारित संचार से मजबूत होगी राज्य की पहचान

May 20, 2026
पंजाब के मध्यम वर्ग और आम परिवारों के लिए बड़ी राहत: ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ में मिलेगा ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज, जानिए आवेदन का पूरा तरीका

पंजाब के मध्यम वर्ग और आम परिवारों के लिए बड़ी राहत: ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ में मिलेगा ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज, जानिए आवेदन का पूरा तरीका

May 20, 2026
भगवंत मान सरकार की ओर से गांव सतौज से बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने के प्रोजेक्ट की शुरुआत, गांवों को खंभों से मुक्त करने से पंजाब के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी

भगवंत मान सरकार की ओर से गांव सतौज से बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने के प्रोजेक्ट की शुरुआत, गांवों को खंभों से मुक्त करने से पंजाब के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी

May 19, 2026
मोदी सरकार ने प्रतिबंधों और महंगाई के जरिए देश में अघोषित लॉकडाउन लागू किया: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

मोदी सरकार खाड़ी युद्ध की आड़ में लोगों से अपनी विदेश एवं आर्थिक नीति की नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रही : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

May 19, 2026

Categories

  • अपराध
  • अभी-अभी
  • करियर – शिक्षा
  • खेल
  • गीत संगीत
  • जीवन मंत्र
  • टेक्नोलॉजी
  • देश
  • बॉलीवुड
  • भोजपुरी
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • व्रत त्योहार
  • शिक्षा
  • संपादकीय
  • स्पेशल स्टोरी
  • स्वास्थ्य
  • About us
  • Contact us

@ 2025 All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी

@ 2025 All Rights Reserved