• About us
  • Contact us
Saturday, February 14, 2026
22 °c
New Delhi
22 ° Sun
23 ° Mon
Kadwa Satya
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
Kadwa Satya
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
  • जीवन मंत्र
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • स्पेशल स्टोरी
Home संपादकीय

सुधारों की छाया में अर्थव्यवस्था: जीएसटी पुनर्संरचना, व्यापारिक जोखिम और भारत की रणनीतिक दृष्टि

News Desk by News Desk
September 28, 2025
in संपादकीय
सुधारों की छाया में अर्थव्यवस्था: जीएसटी पुनर्संरचना, व्यापारिक जोखिम और भारत की रणनीतिक दृष्टि
Share on FacebookShare on Twitter

अमित पांडे: संपादक

भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ एक ओर संरचनात्मक सुधारों के चलते घरेलू स्तर पर आशावाद दिख रहा है, तो दूसरी ओर वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में अनिश्चितताओं ने चिंताएँ गहरा दी हैं। सितंबर 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदम भारत को वैश्विक अस्थिरताओं से बचाव की ढाल प्रदान कर रहे हैं। लेकिन मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि बाहरी जोखिमों की उपेक्षा करना घातक हो सकता है।


सबसे बड़ा खतरा भारत के सेवा क्षेत्र पर मंडरा रहा है, जिसे अब तक अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा। अमेरिका द्वारा H1B वीज़ा शुल्क में वृद्धि इसी खतरे का ताजा उदाहरण है। उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारतीय आईटी और सेवा क्षेत्र पर सीधा बोझ पड़ेगा। 2024-25 में भारत का सेवा निर्यात 340 अरब डॉलर तक पहुँचा था, जिसमें से लगभग 60% हिस्सा अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से आता है। यदि इन सेवाओं की लागत बढ़ती है, तो यह प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा और घरेलू रोजगार तथा आय पर नकारात्मक असर डालेगा।


वित्त मंत्रालय ने सही चेतावनी दी है कि बाहरी झटके केवल निर्यात तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे रोजगार, उपभोग और निवेश की श्रृंखला पर भी चोट करते हैं। 2022-23 के बाद से भारत की बेरोजगारी दर लगातार 7-8% के बीच बनी हुई है (CMIE डेटा), ऐसे में यदि निर्यात-आधारित क्षेत्रों में गिरावट आती है तो यह दर और अधिक बढ़ सकती है।


ऐसे जोखिमों के बीच जीएसटी दरों का पुनर्संरचनात्मक संशोधन सरकार की रणनीतिक पहल है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि हालिया जीएसटी कटौती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और मांग को प्रोत्साहित करने में सहायक होगी। उपभोक्ता वस्तुओं जैसे दूध, रोटी, पनीर, दवाइयाँ और स्वास्थ्य बीमा को 5% या शून्य कर श्रेणी में लाना आम जनता को तत्काल राहत देने वाला कदम है।
साथ ही, सीमेंट, दोपहिया वाहन और छोटे कारों पर कर में कटौती से निर्माण और ऑटोमोबाइल सेक्टर में मांग बढ़ेगी। ध्यान देने योग्य है कि भारत में 40% से अधिक रोजगार निर्माण और छोटे उद्योगों से जुड़ा है। इसलिए यदि इन क्षेत्रों में मांग बढ़ती है तो इसका प्रत्यक्ष असर रोजगार सृजन और ग्रामीण आय पर होगा।


भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुमानों के अनुसार, यदि जीएसटी कटौती से घरेलू खपत में 1% की भी बढ़ोतरी होती है तो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.3 से 0.5% तक की अतिरिक्त वृद्धि संभव है। इससे यह स्पष्ट है कि यह कदम केवल कर राहत नहीं, बल्कि आर्थिक गति को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आयकर में प्रस्तावित संशोधन से करदाताओं को राहत मिलेगी और निवेश वातावरण सुधरेगा। उदाहरणस्वरूप, व्यक्तिगत करदाताओं को अधिक डिस्पोज़ेबल आय उपलब्ध होगी, जिससे खपत बढ़ेगी। दूसरी ओर, कॉर्पोरेट कर में राहत से कंपनियों की लाभप्रदता और निवेश प्रवृत्ति मजबूत होगी।


यह नीति विशेष रूप से भारत की युवा आबादी, स्टार्टअप्स और MSMEs को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। भारत में लगभग 63 मिलियन MSMEs हैं जो GDP में 30% और निर्यात में 45% का योगदान देते हैं। यदि इन पर कर बोझ कम होता है, तो यह न केवल नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ाएगा।
विशेष उल्लेखनीय है कि चमड़ा, हस्तशिल्प, खिलौने, फिटनेस सेंटर और शिक्षा सामग्री जैसे क्षेत्रों में कर में कटौती युवाओं और नई उद्यमशीलता के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। यह बदलाव जीवनयापन की लागत को भी कम करेगा और घरेलू मांग को मजबूत करेगा।


फिर भी वित्त मंत्रालय ने चेताया है कि सुधारों के बावजूद भारत के लिए आत्मसंतोष का समय नहीं है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों की अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ और भू-राजनीतिक तनाव अभी भी गंभीर जोखिम बने हुए हैं। IMF ने हाल ही में अनुमान लगाया कि यदि वैश्विक व्यापार में 1% की गिरावट आती है तो भारत जैसे उभरते देशों की वृद्धि दर पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
इसीलिए रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया है कि भारत को अपनी आर्थिक कूटनीति को लचीला और अनुकूल बनाए रखना होगा। इसका अर्थ है कि व्यापार समझौतों, निर्यात विविधीकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग में भारत को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साथ ही, घरेलू नीतियों को इस तरह तैयार करना होगा कि वे वैश्विक अस्थिरताओं से बचाव की ढाल बन सकें।

सितंबर 2025 की समीक्षा इस तथ्य को पुष्ट करती है कि भारत की अर्थव्यवस्था सुधारों के सहारे मजबूती की ओर बढ़ रही है, लेकिन वैश्विक व्यापारिक जोखिम इसकी राह में बाधक बने हुए हैं। जीएसटी पुनर्संरचना और कर सुधार निश्चित रूप से उपभोग और निवेश को बल देंगे, परंतु उनकी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि भारत कितनी कुशलता से वैश्विक चुनौतियों का सामना करता है।
सरकार की सुधार-प्रधान नीति केवल कर ढांचे को आसान बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक रणनीति है जो समावेशी विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकती है। किंतु यह तभी संभव है जब भारत आंतरिक सुधारों के साथ-साथ बाहरी जोखिमों पर भी सतत निगरानी रखे और अपनी कूटनीतिक क्षमता को आर्थिक सुरक्षा कवच में बदल सके।

Tags: Finance Ministry ReportGlobal EconomyGST ReformsIndian Economy 2025MSME SectorRBI Growth EstimatesTax Relief IndiaTrade Risks India
Previous Post

जमुई के शैलेश कुमार ने रचा इतिहास: वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स 2025 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड

Next Post

क्या पर्यावरण की आवाज़ देशद्रोह है? सोनम वांगचुक पर लगे आरोपों की सियासी परछाई

Related Posts

No Content Available
Next Post
क्या पर्यावरण की आवाज़ देशद्रोह है? सोनम वांगचुक पर लगे आरोपों की सियासी परछाई

क्या पर्यावरण की आवाज़ देशद्रोह है? सोनम वांगचुक पर लगे आरोपों की सियासी परछाई

New Delhi, India
Saturday, February 14, 2026
Mist
22 ° c
50%
7.6mh
29 c 16 c
Sun
29 c 17 c
Mon

ताजा खबर

राजनीति में अच्छे लोगों को आना चाहिए : पंकज त्रिपाठी

राजनीति में अच्छे लोगों को आना चाहिए : पंकज त्रिपाठी

February 14, 2026
विश्व रेडियो दिवस: रेडियो की लोकप्रियता और प्रासंगिकता को समपर्पित अंतर्राष्ट्रीय दिवस!

विश्व रेडियो दिवस: रेडियो की लोकप्रियता और प्रासंगिकता को समपर्पित अंतर्राष्ट्रीय दिवस!

February 13, 2026
‘दलित विरोधी कांग्रेस’ के खिलाफ ‘आप’ ने पंजाब भर में किए विरोध प्रदर्शन, प्रताप बाजवा ने मंत्री ईटीओ पर की थी जातिवादी टिप्पणी

‘दलित विरोधी कांग्रेस’ के खिलाफ ‘आप’ ने पंजाब भर में किए विरोध प्रदर्शन, प्रताप बाजवा ने मंत्री ईटीओ पर की थी जातिवादी टिप्पणी

February 13, 2026
भाजपा पंजाब एससी विंग के वित्त सचिव अमरजीत सिंह कोकरी कलां ‘आप’ में शामिल

भाजपा पंजाब एससी विंग के वित्त सचिव अमरजीत सिंह कोकरी कलां ‘आप’ में शामिल

February 13, 2026
लाहौर के एचिसन गुरुद्वारा साहिब में 80 वर्षों बाद सिख अरदास और शबद कीर्तन आयोजित

लाहौर के एचिसन गुरुद्वारा साहिब में 80 वर्षों बाद सिख अरदास और शबद कीर्तन आयोजित

February 13, 2026

Categories

  • अपराध
  • अभी-अभी
  • करियर – शिक्षा
  • खेल
  • गीत संगीत
  • जीवन मंत्र
  • टेक्नोलॉजी
  • देश
  • बॉलीवुड
  • भोजपुरी
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • व्रत त्योहार
  • शिक्षा
  • संपादकीय
  • स्पेशल स्टोरी
  • स्वास्थ्य
  • About us
  • Contact us

@ 2025 All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी

@ 2025 All Rights Reserved