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“वापकॉस की परछाइयों में: कैसे एक सिंडिकेट ने ठेके फिक्स किए, धन विदेश भेजा और बेनामी साम्राज्य खड़ा किया”

News Desk by News Desk
November 29, 2025
in देश
“वापकॉस की परछाइयों में: कैसे एक सिंडिकेट ने ठेके फिक्स किए, धन विदेश भेजा और बेनामी साम्राज्य खड़ा किया”
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नई मंत्रालय-स्तरीय रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों, ठेकेदारों और हवाला नेटवर्क के नाम; CBI, ED और CAG जाँच की मांग तेज

एक विस्तृत जांच रिपोर्ट — जिसे जल शक्ति मंत्रालय को सौंपा गया है और वापकॉस प्रबंधन को प्रेषित किया गया है— में यह आरोप लगाया गया है कि पूर्व CMD रजनीकांत अग्रवाल के कार्यकाल में वापकॉस के भीतर एक व्यवस्थित, संगठित और केंद्रीकृत भ्रष्टाचार नेटवर्क संचालित हुआ।
दस्तावेज़ में संस्थागत कब्ज़ा, ठेकों की मिलिभगत से फिक्सिंग, हवाला के जरिये धन प्रेषण, बेनामी संपत्तियों का निर्माण और कुछ चुनिंदा अंदरूनी तथा बाहरी लोगों द्वारा भारी संपत्ति इकट्ठा करने का विस्तृत विवरण सामने आया है।

रिपोर्ट — जिसे मंत्रालय द्वारा अत्यधिक गंभीरता से देखा जा रहा है — केवल आरोप नहीं लगाती, बल्कि पूरे तंत्र का विवरण देती है
• किस तरह भ्रष्टाचार हुआ,
• किन लोगों को लाभ पहुँचा,
• कौन-सी कंपनियाँ और चैनल इस्तेमाल हुए,
• और कौन-से दस्तावेज़ वापकॉस के रिकॉर्ड में तत्काल सत्यापित किए जा सकते हैं

दस्तावेज़ में स्पष्ट चेतावनी दी गई है:

“यह कोई सामान्य सतर्कता नोट नहीं है। यह एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र का नक्शा है, जिसकी फोरेंसिक और लीक-प्रूफ जांच अनिवार्य है।”

⸻

समानांतर सत्ता संरचना

रिपोर्ट के अनुसार, PESB द्वारा “निदेशक-स्तर के लिए भी अयोग्य” बताने के बावजूद राजनिकांत अग्रवाल ने अपना चयन सुनिश्चित किया और वापकॉस में एक समानांतर कमांड प्रणाली खड़ी कर दी।
दस्तावेज़ के अनुसार यह व्यवस्था:
• खरीद नियमों को दरकिनार करती थी,
• HR निर्णयों में हेरफेर करती थी,
• शिकायतों को दबाती थी,
• और विदेशी परियोजना नियंत्रण को एक खास समूह के हाथों सौंपती थी।

रिपोर्ट इस सिंडिकेट के मुख्य नामों को उजागर करती है।
• सुमीर चावला — आंतरिक हेरफेर और गोपनीय फाइल लीक का मुख्य सूत्रधार
• संजय बोहिदार — सतर्कता प्रभाग में “शैडो इन्फ्लुएंस एजेंट”

साथ ही रजत जैन, सीमा शर्मा, अमिताभ त्रिपाठी, मनोरंजन पही सहित कई अन्य लोगों को आंतरिक व बाहरी “सुविधादाता” बताया गया है।

⸻

तंत्र कैसे चलता था — रिपोर्ट का विवरण

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भ्रष्टाचार तंत्र को चार हिस्सों में बाँटा गया था:

  1. प्रशासनिक नियंत्रण और दमन
    • HR में मनचाहे पोस्टिंग
    • शिकायतें दबाना
    • कर्मचारियों पर दबाव
    • RTI उत्तरों में छेड़छाड़
  2. ठेका/परियोजना हेरफेर
    • पहले से तय विजेताओं को ठेके
    • फर्जी GST बिल
    • बढ़े हुए अनुमान
    • ओडिशा, केरल, झारखंड, बिहार में संगठित टेंडर-फिक्सिंग
    • विदेशी परियोजनाओं का दुरुपयोग
  3. मैनपावर आउटसोर्सिंग और जबरन कमीशन
    • सलाहकारों से अनिवार्य कटौती
    • प्रोजेक्ट मैनेजरों पर “मंथली टैक्स”
    • PUREWAYS और अन्य शेल कंपनियों द्वारा धन siphoning
  4. गोपनीय जानकारी का रिसाव

रिपोर्ट के अनुसार यह “पूरे तंत्र की रीढ़” थी।
बोली लगाने वालों को पहले से जानकारी मिल जाती थी कि बोली कैसे तैयार करनी है।

⸻

हवाला चैनल, नकदी प्रवाह और बेनामी संपत्तियाँ

रिपोर्ट में हवाला के लिए अग्नि प्लाईवुड (यमुनानगर) को प्रमुख माध्यम बताया गया है।
विदेशी परियोजनाओं — तंज़ानिया, म्यांमार, कम्बोडिया, मंगोलिया, रवांडा — से कमीशन इसी मार्ग से भेजे जाने का आरोप है।

लगभग ₹200 करोड़ के संदिग्ध SPV लोन, लंबित CAG टिप्पणियाँ, और कई GST अनियमितताओं को MCA जाँच के लिए चिह्नित किया गया है।

⸻

दो बड़ी DA (Disproportionate Assets) फाइलें

  1. सुमीर चावला
    • DLF फेज-1 में लग्जरी फ्लोर (लगभग ₹15 करोड़ नकद हिस्सेदारी का आरोप)
    • माजरी फार्महाउस — लगभग ₹50 करोड़ (अधिकांश भुगतान नकद)
    • लग्जरी वाहन
    रिपोर्ट कहती है कि इनका कोई वैध आय स्रोत नहीं दिखता।
  2. पूर्व CMD रजनीकांत अग्रवाल
    • परी चौक, ग्रेटर नोएडा — प्रॉक्सी के जरिये
    • छत्तरपुर फार्महाउस साझेदारी
    • रोहिणी कमर्शियल मॉल संपत्ति — से जुड़े लेनदेन
    इनमें बेनामी लेयरिंग, सर्कुलर पेमेंट और गैर-घोषित निवेश की बात कही गई है।

⸻

राज्यवार हॉटस्पॉट्स और कंपनियाँ
• ओडिशा — मोहंती और कौशिक दास से जुड़े टेंडर
• केरल — दीपंक अग्रवाल द्वारा फिक्सिंग
• बिहार/झारखंड — संजय शर्मा
• कंपनियाँ — CHOICE, PUREWAYS, HALCONS, Bernard, Deepak Builders, Growever आदि

⸻

सबसे बड़ा सतर्कता विफलता — झुंझुनूं शिकायतें और FIR की अनदेखी

रिपोर्ट का सबसे गंभीर आरोप यह है कि:
झुंझुनूं (राजस्थान) से आई शिकायतें — जिनमें FIR शामिल है — शिकायतकर्ताओं द्वारा पुष्टि के बावजूद जाँच के बिना बंद कर दी गईं।
इस में मनीषा धनकर जो की सुमिर चावला एंड रजनीकांत की सहयोगी थी का नाम भी FIR में है.। वह अलग अलग होटल्स में ऑफिसर्स को एंटरटेन करती थी और इंक्वायरी बंद हो जाती थी

विजिलेंस मैनुअल के अनुसार:

पुष्टि की गई शिकायत को पूरी जाँच के बिना बंद नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट कहती है कि “फर्जी withdrawal letters” का उपयोग कर मामलों को जानबूझकर दबाया गया।

⸻

सबसे बड़ा अवरोध — लीक और प्रभाव

रिपोर्ट का दावा है कि जब तक सुमीर चावला और संजय बोहिदार संवेदनशील पदों पर हैं,
कोई भी जाँच लीक-प्रूफ नहीं हो सकती।

इसलिए तत्काल अलग करने और रिकॉर्ड-एक्सेस पर सख्त प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की गई है।

⸻

तत्काल कार्रवाई की सिफारिशें
• दोषी/संदिग्ध अधिकारियों को तत्काल हटाना
• CAG फोरेंसिक ऑडिट (FY 2021–25)
• CBI जाँच — टेंडर-फिक्सिंग एवं उगाही तंत्र
• ED जांच — DA और हवाला
• MCA जांच — GST फर्जीवाड़ा
• ऑडिटर्स को ब्लैकलिस्ट करना
• व्हिसलब्लोअर सुरक्षा

⸻

अब आगे क्या?

रिपोर्ट के अनुसार:
• मंत्रालय,
• जल शक्ति मंत्री,
• और PMO,

सभी इस मामले की सत्यापन योग्य सूचनाओं की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

यदि वापकॉस और मंत्रालय रिपोर्ट की सिफारिशों को स्वीकार करते हैं,
तो CBI, ED, CAG व आयकर विभाग की समानांतर जाँचें शुरू हो सकती हैं।

यदि नहीं—
यह मामला भारत के PSU इतिहास में एक संस्थागत विफलता के प्रतीक के रूप में दर्ज हो सकता है।

Tags: CBI ED CAG Probe DemandHawala Network WAPCOSMinistry Inquiry WAPCOSRajnikant Agrawal ScamSumir Chawla DA CaseTender Fixing PSU IndiaWAPCOS Corruption ReportWAPCOS Syndicate Leak
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