मंजरी की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 30 नवंबर। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय से मान्यता प्राप्त ऑल इंडिया एम एस एम ई टेक्निकल आफिसर्स एसोसिएशन लोकतांत्रिक पटरी से उतर चुका है। आम सभा के निर्णय के खिलाफ नवंबर, 2025 से दो अध्यक्ष पदस्थापित हैं। नियमित अध्यक्ष हैं दिल्ली स्थित एम एस एम ई मंत्रालय के पूर्व संयुक्त निदेशक हरेन्द्र प्रताप सिंह और एडहॉक अध्यक्ष हैं कोलकाता स्थित एम एस एम ई डी एफ ओ के सहायक निदेशक एस के मंडल।
वहीं एसोसिएशन में इस समय चार उपाध्यक्ष हैं। दरअसल भारत सरकार की सेवा से हरेन्द्र प्रताप सिंह के रिटायर होते ही इस एम एस एम ई एसोसिएशन में अध्यक्ष पद के उत्तराधिकारी को लेकर शर्मनाक स्तर की राजनीति छिड़ गई। नतीजा है कि यह एसोसियेशन अपने सदस्यों की पदोन्नति के लिए नहीं बल्कि अपने अस्तित्व के संघर्ष में उलझ गया है।
एसोसिएशन की आपसी कलह का लाभ एम एस एम ई मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त कार्यालय का प्रशासन उठा रहा है। उसने संयुक्त निदेशक के ग्रुप बी की पदोन्नति के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और उनकी समस्या को सुलझाने की जगह उसे और जटिल बना दिया है। इसके विरोध में एसोसिएशन से कुछेक सदस्यों ने इस्तीफा भी दे दिया है।सूत्रों के अनुसार, हरेन्द्र प्रताप सिंह को पिछले साल दिसंबर में संपन्न आम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से दो वर्ष ( 2024-2025 एवं 2025-2026 ) के लिए एसोसिएशन का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया था।
तब जबकि संविधान में यह लिखा है कि रिटायर होते ही एसोसिएशन की सदस्यता खत्म हो जाती है। लेकिन इसी संविधान के अंतर्गत आम सभा ने श्री प्रताप को दो वर्षों के लिए अध्यक्ष बनाया था। जाहिर है कि आम सभा के निर्णय का सम्मान करने के लिए संविधान में संशोधन किया जा सकता है जो अभी तक नहीं किया गया है और एक व्हाट्सएप कार्यसमिति ने एडहाक अध्यक्ष मनोनीत कर लिया है जिससे आधिकारिक तौर पर दो अध्यक्ष पदस्थापित हो गये हैं-एक नियमित अध्यक्ष और एक कामचलाऊ अध्यक्ष।
श्री प्रताप को अध्यक्ष पद पर अगले साल तक रखने के लिए संविधान में संशोधन करना है या उन्हें हटाना है, यह अधिकार सिर्फ उस सभा को है जिसने उन्हें निर्वाचित किया है यानि आम सभा को है। आम सभा के निर्णय को कार्यकारिणी बदल नहीं सकती है।
दिलचस्प यह है कि कोलकाता की पिछली आम सभा बैठक में संविधान के खिलाफ जाकर दो की जगह चार उपाध्यक्ष पद को सृजित कर दिया गया और चार सरकारी अधिकारियों को उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। इस संबंध में आज तक संविधान में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संविधान के वर्तमान प्रावधानों में अनेक विरोधाभास और अलोकतांत्रिक व्यवस्था को शामिल किया गया है जिससे सम्पूर्ण एसोसिएशन की मान्यता खतरे में पड़ सकती है।
एम एस एम ई मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इस समय एम एस एम ई एसोसिएशन में पद पाने की होड़ इसलिए मची है कि मनमाफिक पोस्टिंग से लेकर विदेश यात्रा तक की रेस में एसोसिएशन का पद व्यक्तिगत लाभ दिला रहा है। यही कारण है कि सामूहिक हित और आवश्यक पदोन्नति के लिए कार्यसमिति की बैठक बार – बार टाल दी जाती है और व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध करने के लिए आनन – फानन में बैठक बुला ली जाती है जिसमें बाहरी लोग भी अपनी रोटी सेंकते नजर आते हैं। जानकार बताते हैं कि प्रशासन के इशारे पर एसोसिएशन को कमजोर किया जा रहा है जिसमें एसोसिएशन के कुछेक पदाधिकारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एसोसिएशन की ताज़ा हास्यास्पद स्थिति उसी का परिणाम है।







