कड़वा सत्य डेस्क
यांगून ( म्यांमार ),15 दिसंबर। भारतीय अध्यात्म को वैश्विक स्तर पर नया विस्तार मिल रहा है। भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सनातन संस्कृति और सांस्कृतिक एकता को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता “चारधाम दर्शन – यांगून 2025” का भव्य आयोजन 13–14 दिसंबर 2025 को स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र , भारत का राजदूतावास, यांगून के परिसर में संपन्न हुआ। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र एवं इंडिया समाज, म्यांमार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इस विशेष आयोजन के माध्यम से म्यांमार में बसे हिंदू समाज, प्रवासी भारतीयों तथा स्थानीय मित्रों को भारत के पावन चारधाम—बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी एवं रामेश्वरम्—का एक ही परिसर में दिव्य दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। आयोजन में बोधगया के आध्यात्मिक महत्व को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय राजदूत अभय ठाकुर एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुरभि ठाकुर ने किया। इस अवसर पर उप राजदूत आशीष शर्मा, वरिष्ठ सामुदायिक नेता, गणमान्य अतिथि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उद्घाटन संबोधन में माननीय राजदूत ने कहा, “‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ भारत की उस जीवन-दृष्टि का प्रतीक है जिसमें संपूर्ण मानवता का कल्याण निहित है। ऐसे आयोजन भारत–म्यांमार के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।”
स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र की भूमिका इस आयोजन में विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसने भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सॉफ्ट डिप्लोमेसी को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। इंडिया समाज, म्यांमार के अध्यक्ष डॉ. शीतल पालबाबू की परिकल्पना एवं नेतृत्व में यह आयोजन भारतीय समुदाय की व्यापक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. आशीष कंधवे, निदेशक, स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र,यांगून ने कहा, “चारधाम भारतीय चेतना की पूर्ण यात्रा का प्रतीक हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की आध्यात्मिक पूर्णता को म्यांमार की धरती पर साकार करना है।”
कार्यक्रम के दौरान, प्रथम दिन लगभग 600 श्रद्धालुओं ने चारधाम दर्शन का लाभ उठाया। लगभग दो दिनों तक चले इस दिव्य आयोजन में कुल मिलाकर लगभग दो से ढाई हजार श्रद्धालुओं एवं दर्शनार्थियों ने चारधाम दर्शन किया। आयोजन के अंतर्गत योग दर्शन, आरती, प्रसाद वितरण तथा एक संक्षिप्त सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
समग्र रूप से, “चारधाम दर्शन – यांगून 2025” म्यांमार में बसे भारतीय समाज की आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा तथा भारत–म्यांमार के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाई प्रदान की।






