• About us
  • Contact us
Tuesday, January 6, 2026
13 °c
New Delhi
16 ° Wed
15 ° Thu
Kadwa Satya
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
Kadwa Satya
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
  • जीवन मंत्र
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • स्पेशल स्टोरी
Home देश

प्रदूषण और गरीबी का दुष्चक्र: असमानता, विकास और टूटती मानवीय गरिमा

News Desk by News Desk
January 3, 2026
in देश
प्रदूषण और गरीबी का दुष्चक्र: असमानता, विकास और टूटती मानवीय गरिमा
Share on FacebookShare on Twitter

अमित पांडे: संपादक

पर्यावरणीय प्रदूषण और गरीबी को अक्सर दो अलग-अलग संकटों के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों एक-दूसरे में गहराई से गुंथे हुए हैं और मिलकर एक ऐसा दुष्चक्र रचते हैं जो करोड़ों लोगों को, विशेषकर भारत जैसे विकासशील देशों में, लगातार हाशिये पर धकेलता रहता है। प्रदूषण केवल नदियों, जंगलों या हवा को नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि यह आजीविका, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा को भी धीरे-धीरे नष्ट करता है। दूसरी ओर गरीबी लोगों को ऐसे संसाधन-आधारित और पर्यावरण के लिए घातक उपाय अपनाने के लिए मजबूर करती है, जिनके बिना उनका तत्काल जीवित रहना संभव नहीं होता। इस दुष्चक्र को समझे बिना सतत विकास केवल एक नारा बनकर रह जाता है।

इस संबंध की जड़ में असमानता है। गरीब समुदाय असमान रूप से उन स्थानों पर रहने को मजबूर होते हैं जो पर्यावरणीय रूप से सबसे अधिक खतरनाक होते हैं—प्रदूषित नदियों के किनारे, कूड़ाघरों के पास, औद्योगिक क्षेत्रों, राजमार्गों या खनन क्षेत्रों में। ये स्थान उनकी स्वतंत्र पसंद नहीं होते, बल्कि महँगे आवास, असुरक्षित भूमि अधिकार और सामाजिक हाशिये पर धकेले जाने का परिणाम होते हैं। शहरी भारत में झुग्गी-झोपड़ियाँ अक्सर नालों, बाढ़-मैदानों और कचरा स्थलों के आसपास उभरती हैं, जहाँ दूषित पानी, जहरीली हवा और बार-बार आने वाली आपदाएँ सामान्य जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि क्षरण, अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग और वनों की कटाई छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों को सबसे अधिक प्रभावित करती है, जिससे उनकी उत्पादक संपत्तियाँ समाप्त होती जाती हैं।

प्रदूषण सीधे तौर पर स्वास्थ्य के माध्यम से गरीबी को गहरा करता है। वायु प्रदूषण, दूषित पेयजल और रासायनिक संपर्क से श्वसन रोग, कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकार और दीर्घकालिक बीमारियाँ बढ़ती हैं। जिन गरीब परिवारों के पास न तो स्वास्थ्य बीमा होता है और न ही सुलभ चिकित्सा सुविधाएँ, उनके लिए बीमारी का अर्थ होता है काम के दिन खोना, कर्ज में डूबना और गरीबी का पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण। प्रदूषित वातावरण में पलने वाले बच्चे कुपोषण, बौद्धिक विकास में कमी और कमजोर शैक्षिक प्रदर्शन का शिकार होते हैं, जिससे उनका भविष्य का आर्थिक सामर्थ्य भी सीमित हो जाता है। इस तरह प्रदूषण गरीबों पर एक अदृश्य कर की तरह काम करता है, जो उनके शरीर और श्रम से मूल्य निकाल लेता है, लेकिन आर्थिक गणनाओं में दर्ज नहीं होता।

आजीविका पर इसका प्रभाव भी उतना ही गहरा है। नदियों और समुद्री तटों के प्रदूषित होने से मछुआरों की आय घटती है। रासायनिक-आधारित खेती और जल संकट से किसानों की मिट्टी की उर्वरता कम होती है। कचरा बीनने वाले, निर्माण मजदूर और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिक जहरीले हालात में बिना किसी सुरक्षा के काम करने को मजबूर होते हैं। विडंबना यह है कि कई गरीब लोग अवैध खनन, रेत उत्खनन, वन कटाई या कचरा जलाने जैसे पर्यावरण-विनाशकारी कार्यों में इसलिए लगे रहते हैं क्योंकि उनके पास सुरक्षित विकल्प नहीं होते। गरीबी उन्हें प्रकृति को नुकसान पहुँचाने के लिए मजबूर करती है, और वही नुकसान भविष्य में उनकी संभावनाओं को और सीमित कर देता है।

कमजोर शासन और पर्यावरणीय अन्याय इस चक्र को और मजबूत करते हैं। नियम-कानून कागजों पर तो मौजूद होते हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन अक्सर चयनात्मक होता है। जिन क्षेत्रों में राजनीतिक आवाज कमजोर होती है, वहाँ प्रदूषण को “विकास की कीमत” मान लिया जाता है। अमीर इलाकों में प्रदूषण के खिलाफ आंदोलन, मुकदमे और मीडिया कवरेज होती है, जबकि गरीब इलाकों में वही प्रदूषण सामान्य मान लिया जाता है। यह असमानता समाज में शक्ति-संतुलन की गहरी खाई को उजागर करती है।

जलवायु परिवर्तन इस संकट का गुणक बनकर उभरता है। बाढ़, सूखा और हीटवेव जैसी चरम घटनाएँ सबसे अधिक उन लोगों को प्रभावित करती हैं जिनके पास न तो मजबूत बुनियादी ढाँचा होता है और न ही अनुकूलन की क्षमता। बाढ़ के दौरान प्रदूषित नदियाँ झुग्गियों में घुसकर बीमारियाँ फैलाती हैं, गर्मी श्रमिकों की उत्पादकता घटाती है और फसल विफलता किसानों को पलायन के लिए मजबूर करती है। इससे उत्पन्न गरीबी फिर सस्ते और प्रदूषणकारी ईंधनों पर निर्भरता बढ़ाती है।

इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए विकास की अवधारणा पर पुनर्विचार आवश्यक है। केवल जीडीपी वृद्धि पर केंद्रित मॉडल पर्यावरण और समाज की लागत को नजरअंदाज करते हैं। स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और स्वस्थ पारिस्थितिकी को मूल मानव अधिकार के रूप में स्वीकार करना होगा। स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ परिवहन, जैविक खेती और सामुदायिक भागीदारी जैसे उपाय प्रदूषण कम करने के साथ-साथ रोजगार भी पैदा कर सकते हैं। अंततः यह एक नैतिक प्रश्न भी है। पर्यावरणीय संकट असल में असमानता का संकट है, और जब तक सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ आगे नहीं बढ़ते, तब तक न तो गरीबी मिटेगी और न ही प्रकृति बचेगी।

Tags: climate change poorenvironmental inequality Indiapollution and povertypollution impact poorSustainable Development India
Previous Post

डिजिटल लोकतंत्र की आवाज़- वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया का सात साल का निर्णायक सफ़र

Next Post

पंजाब में रोजगार का रिकॉर्ड: 4 साल में 61 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी – भगवंत सिंह मान

Related Posts

WRI India’s ASCENT Tool: राज्यों को मिलेगा जलवायु नीति और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों का नया हथियार
देश

WRI India’s ASCENT Tool: राज्यों को मिलेगा जलवायु नीति और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों का नया हथियार

September 2, 2025
Next Post
2025 में पंजाब प्रशासन में बड़ा डिजिटल बदलाव: 1.85 लाख लोगों को घर बैठे मिलीं 437 सेवाएं, मान सरकार ने खत्म किया दफ्तरों का चक्कर

पंजाब में रोजगार का रिकॉर्ड: 4 साल में 61 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी – भगवंत सिंह मान

Please login to join discussion
New Delhi, India
Tuesday, January 6, 2026
Mist
13 ° c
77%
9.7mh
21 c 12 c
Wed
21 c 11 c
Thu

ताजा खबर

JD Vance attack: ओहायो में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के घर पर घटना, एक व्यक्ति हिरासत में

JD Vance attack: ओहायो में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के घर पर घटना, एक व्यक्ति हिरासत में

January 6, 2026
न्यूयॉर्क कोर्ट में पहली पेशी, मादुरो बोले—मैं वैध राष्ट्रपति हूं, खुद को युद्ध का कैदी मानता हूं

न्यूयॉर्क कोर्ट में पहली पेशी, मादुरो बोले—मैं वैध राष्ट्रपति हूं, खुद को युद्ध का कैदी मानता हूं

January 6, 2026
Chandigarh Mayor election: 29 जनवरी को मेयर चुनाव, हाथ उठाकर मतदान

Chandigarh Mayor election: 29 जनवरी को मेयर चुनाव, हाथ उठाकर मतदान

January 6, 2026
Punjab maternity health news: आम आदमी क्लीनिकों से हर महीने 20,000 गर्भवती महिलाओं को सेवा

Punjab maternity health news: आम आदमी क्लीनिकों से हर महीने 20,000 गर्भवती महिलाओं को सेवा

January 6, 2026
Bhagwant Mann Akal Takht statement: मुख्यमंत्री ने कहा, विनम्र सिख के रूप में श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष उपस्थित होऊँगा

Bhagwant Mann Akal Takht statement: मुख्यमंत्री ने कहा, विनम्र सिख के रूप में श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष उपस्थित होऊँगा

January 5, 2026

Categories

  • अपराध
  • अभी-अभी
  • करियर – शिक्षा
  • खेल
  • गीत संगीत
  • जीवन मंत्र
  • टेक्नोलॉजी
  • देश
  • बॉलीवुड
  • भोजपुरी
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • व्रत त्योहार
  • शिक्षा
  • संपादकीय
  • स्वास्थ्य
  • About us
  • Contact us

@ 2025 All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी

@ 2025 All Rights Reserved