ऐसा मानना है आँध्र प्रदेश की डॉ. वाई.एस.आर. हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी में पूर्व कुलपति और भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् (आई.सी.ए.आर.) में पूर्व सहायक महानिदेशक (बागवानी विज्ञान) के पद पर कार्यरत रहे डॉ. तोलेटी जानकीराम का! डॉ. जानकीराम हमेशा से अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत और लगन में विश्वास रखते हैं।
पेश हैं डॉ. जानकीराम से वरिष्ठ पत्रकार, श्रीनाथ दीक्षित के साथ हुई एक ख़ास मुलाक़ात के कुछ प्रमुख अंश:
· बागवानी विज्ञान के क्षेत्र में अपने कैरियर के शुरूआती पलों के बारे में बताएँ…..
मेरा जन्म नारियल, सब्ज़ियों, इत्यादि, की खेती के लिए मशहूर और आँध्र प्रदेश की राइस बॉउल कहलाने वाले वेलागालेरू, डिस्ट्रिक्ट पश्चिमी गोदावरी में हुआ। यहाँ की प्राकृतिक सौंदर्यता मुझे हमेशा से ही अपनी ओर आकर्षित करती थी।
· आपको बागवानी क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा अपने पिताजी से मिली……
अपने पिताजी – श्री तोलेटी श्रीरामाराव को आँध्र प्रदेश एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (आँध्र प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय) में बतौर प्रॉफ़ेसर के पद पर कार्यरत रहते हुए उनके द्वारा विभिन्न फलों, सब्ज़ियों और मसालों की बागवानी में महत्त्वपूर्ण योगदान को देखकर मैं इस क्षेत्र में अपना भी एक सुनहरा भविष्य बनाने के लिए बहुत प्रोत्साहित हुआ।

· आपको स्कूल टाइम में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप्स भी प्रदान की गईं थीं……
शुरू से ही अपने क्लास में अव्वल नंबर लाकर टॉप करने के कारण पढ़ाई में परफ़ॉर्मेन्स को देखते हुए मुझे अपने स्कूल – सर्वेल और ताड़ीकोण्डा में 10वीं कक्षा तक और आँध्र प्रदेश रेज़िडेंशियल जूनियर कॉलेज, नागार्जुनसागर द्वारा 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई करने के लिए स्कॉलरशिप्स प्रदान की गईं। इसके लिए मैं अपने शिक्षक – श्री आंजनेयुलू, श्री अब्राहम, श्री राजगोपाल, श्री बेग़, श्री कृष्णमूर्ति और श्री रवि सर के साथ आँध्र प्रदेश सरकार का आभारी हूँ, जिन्होंने मेरी प्रतिभा को देखते हुए स्कॉलरशिप प्रदान कर मुझे अपने सुनहरे कैरियर की ओर अग्रसर होने में मदद की!
तत्पष्चात् सन् – 1979 से सन् – 1983 तक आँध्र प्रदेश एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से बी.एस.सी. (एग्रीकल्चर) में ग्रेजुएट होने के बाद दिल्ली के जाने-माने भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान (आई.ए.आर.आई.) से मैंने जूनियर फ़ैलोशिप द्वारा एम.एस.सी. (हॉर्टिकल्चरल साइंस) में पोस्ट-ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की! यहाँ मुझे अपने मेंटर – डॉ. पी.एस. सिरोही के नेतृत्व में अपनी पढ़ाई पूरी करने का मौक़ा मिला। यहाँ लौकी के जेनेटिक्स में काम करने से हॉर्टिकल्चर साइंस में मेरी नॉलेज में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ। इसके चलते सन् – 1986 में एम.एस.सी. (हॉर्टिकल्चरल साइंस) की डिग्री भारत के प्रथम युवा प्रधानमंत्री – श्री राजीव गाँधी के हाथों से प्राप्त होने का गौरव मुझे मिला! इसके बाद मैंने आई.ए.आर.आई. से ही पी.एच.डी. (वैजीटेबल्स) में डिग्री प्राप्त की।
· राजधानी दिल्ली के राजेंद्र प्लेस के गोल चक्कर पर स्थित “पूसा हरित क्रान्ति पार्क” के बारे में बताएँ…..
दिल्ली के राजेंद्र प्लेस के गोल चक्कर पर स्थित “पूसा हरित क्रांति पार्क” बनवाकर पूसा संस्थान द्वारा बागवानी विषय पर किए गए विभिन्न कार्यों को दर्शाने का काम भी आई.ए.आर.आई. के पूर्व निदेशक, डॉ. एच.एस. गुप्ता के नतृत्व में मेरे द्वारा किया गया। इस पार्क में आई.सी.ए.आर. के बागवानी विभाग द्वारा विभिन्न फूलों, सब्ज़ियों और ड्राई फ़्लॉवर्स की तकनीकियों को दर्शाया है!
· आपके नेतृत्व में किए गए विभिन्न शोध से किसानों को काफ़ी फ़ायदा हुआ…..
हमारे द्वारा फ़्लावर क्रॉप्स में तक़रीबन 43 क़िस्मों को विकसित किया गया है। इनमें ग्लेडियोलस, गुलदाउदी, चाइना एस्टर और रजनीगन्धा क़िस्में प्रमुख हैं। इनमें से आई.सी.ए.आर. के भारतीय बागवानी अनुसन्धान संस्थान (आई.आई.एच.आर.), बेंगलुरु द्वारा विकसित रजनीगन्धा किस्म – सुभासिनी श्रृंगार प्रज्ज्वल से तमिल नाडू और उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के किसानों को बहुत फ़ायदा हुआ है।

दूसरी क़िस्म – चाइना एस्टर कर्नाटक और आँध्र प्रदेश के किसानों के लिए फ़ायदेमंद साबित हुई है। कर्नाटक में चाइना एस्टर की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान, श्री आंजनेय स्वामी नियमित रूप से कामिनी और पूर्णिमा किस्मों की खेती कर अपना जीवनयापन करते हैं।
· अपनी सफ़लता का श्रेय आप किसको देना चाहेंगे?
यह श्रेय मेरे पिता – श्री तोलेटी श्रीरामाराव एवं माता – श्रीमति सीतामहालक्ष्मी और मेरी अर्धांगिनी और बेटे के साथ-साथ मेरे ससुर – श्री शेशगिरी और सास – श्रीमति षोणा देवी और परिवार के अन्य सदस्यों को जाता है, जिन्होंने मेरे जीवन के हर पल में एक मज़बूत दीवार बनकर मेरा साथ दिया!
· आज के युवाओं के लिए कोई संदेश……
आज तकनीकीकरण के दौर में हर काम मशीनीकरण होने के कारण बहुत आसान और आरामदायक हो गए हैं! ऐसे में युवाओं को अपनी कलात्मकता दिखाने के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं। तो, आप अपने अंदर के हुनर और क्षमता को पहचानकर बिना किसी दबाव के अपना कैरियर सेलेक्ट करें! ऐसा करने से आप अपने कैरियर में ऊँचाइयों को बहुत सरलता से छू सकते हैं!







