श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
मसालेदार और स्वादिष्ट व्यंजन किसे पसंद नहीं आते! वो अपने पसंदीदा मसालेदार व्यंजन देखकर; तो, मानो जैसे मुँह में अपने आप ही पानी आने लगता है! और, अपनी उन्हीं फ़ेवरिट डिशेज़ को बनाने और खाने के हम कोई-ना-कोई बहाने ढूँढ ही लेते हैं!
लेकिन, क्या आपको पता है कि घर के बने यह पारंपरिक मसाले कई तरह से आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होते हैं! यह मसाले खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ आपको अंदर से स्ट्रॉन्ग रखते हैं; ताक़ि, आप किसी भी बीमारी या इंफ़ैक्शन से लड़ने में हों एकदम तैयार!
देश के जाने-माने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के केरला में स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पासेज़ रिसर्च और राजस्थान के अजमेर में स्थित नेशनल रिसर्च सैंटर ऑन सीड स्पासेज़ में भी इन पारंपरिक मसालों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाली गुणवत्ता पर काफ़ी बड़े पैमाने पर शोध किए जा रहे हैं!

तो, कौन-से हैं यह मसाले और क्या हैं इनके प्राकृतिक गुण; आइए जानते हैं इस लेख के द्वारा:
ड्राई जिंजर कॉफ़ी (चुक्कू कॉफ़ी)!
दक्षिण भारत में प्रचलित ड्राई जिंजर कॉफ़ी (चुक्कू कॉफ़ी) खाँसी, गले में ख़राश, ठण्ड, बंद नाक की समस्या, सर दर्द, इत्यादि, जैसे विभिन्न इन्फ़ैक्शन्स से लड़ने में और उन्हें ठीक करने में काफ़ी कारगर है! यह पाचन शक्ति को बढ़ाने और डायरिया जैसी बीमारियों को भी दूर भगाने में कारगर साबित है! इस कॉफ़ी का सेवन आपके शरीर से टॉक्सिन्स को निकालकर मिनरल्स को अब्सॉर्ब करने में मदद करता है! शरीर की पाचन शक्ति को बढ़ाने की ख़ूबी के कारण अदरक आपके शरीर को अंदर से स्वस्थ रखता है, जिसके चलते आपका मूड भी अच्छा रहता है और आप स्वस्थ महसूस करते हैं!
टर्मेरिक इनफ़्यूस्ड हनी (हल्दी और शहद का मिश्रण)!
गोल्डन हनी (जिसमें आम तौर पर शहद में हल्दी का मिश्रण होता है) का सेवन ठण्ड के सीज़न में फ़्लू जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए आपके शरीर की क्षमता को बढ़ा देता है! साथ ही यह ठण्ड में होने वाले जोड़ों और नसों के दर्द में भी राहत देता है!
आम सर्दी से लेकर गले की ख़राश तक – शहद और हल्दी दोनों ही गुणकारी और औषधीय गुणों के कारण बहुत ही गुणकारी और महत्वपूर्ण विकल्प हैं। हल्दी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण यौगिक होता है, जिसे करक्यूमिनॉइड्स कहा जाता है। पॉलीफ़ेनॉल्स की तरह करक्यूमिनॉइड्स में कई उपचार गुण होते हैं, जो हल्दी को इतना मज़बूत बनाते हैं कि यह एक बार में लगभग सभी स्वास्थ्य मुद्दों से लड़ सकता है! यह एक बहुत मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट भी है, जिसके कारण यह त्वचा के लिए अच्छा होता है। इसमें एंटीसैप्टिक, जीवाणुरोधी, एंटी-फ़ंगल और एंटी-इंफ़्लेमेटरी गुण होते हैं, जो घावों और एलर्जी के इलाज में बहुत आसानी से मदद करते हैं! शहद में आधुनिक एंटीबायोटिक जैसे प्रतिरोधी बैक्टीरिया पैदा किए बिना संक्रमणों से लड़ने की शक्ति है। यह इतना गुणकारी है कि संक्रमण से लड़ते समय इसका इस्तेमाल पहली विधि होनी चाहिए।

कई वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि पारंपरिक एंटीबायोटिक दवाओं की तुलना में शहद अधिक शक्तिशाली है। शहद को सीधे उन पर लगाने से संक्रमण, कटौती और घाव के उपचार के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए शहद को मौखिक रूप से भी लिया जा सकता है।
जिंजर माउथ फ़्रैशनर!
यह उच्च वसा, उच्च शुगर माउथ फ़्रैशनर्स का एक उत्कृष्ट विकल्प है। यह उत्पाद आपको बिना कड़वाहट के अदरक की गुणवत्ता प्रदान करता है और भोजन को पचाने में मदद करता है। अदरक में मौजूद तीक्ष्ण यौगिक 6-जिंजरॉल लार में निहित एक एंज़ाइम को उत्तेजित करता है, जो फ़ॉल-सूँघने वाले पदार्थों को तोड़ता है। इस प्रकार यह ताज़ा साँस सुनिश्चित करता है। साइट्रिक एसिड लार के सोडियम आयन सामग्री को बढ़ाता है, जिससे नमकीन खाद्य पदार्थों का स्वाद कम नमकीन होता है।
गले की माँसपेशियों के लिए फ़ायदेमंद हैं मसाले!
आपके गले की माँसपेशियों के लिए पारंपरिक मसालों के मिश्रण से मालिश करना बेहद लाभदायक तरीक़ा है। मिर्च में गर्म कैप्सैसिन और विंटरग्रीन के तेल में ठंडे मेन्थॉल / मिथाइल सैलिसिलेट आपको गले में होने वाली ख़राश से मुक्ति दिलाता है।
सर्दी और खाँसी से राहत दिलाए मसालों के लेप की मालिश!
सर्दी लगने और खाँसी होने से बचने के लिए पारंपरिक मसालों का एक लेप बनाकर अपने गले और नाक के आसपास हल्की मालिश करें! ऐसा करने से आपको गले में होने वाले इन्फ़ैक्शन और बंद नाक से जल्द छुटकारा मिलेगा! इस लेप में काली मिर्च, काले बीज और चाय के पेड़ के तेलों की सुगंध विशेष रूप से ठंड और फ़्लू से राहत के लिए डाली जाती है।
दालचीनी है बैक्टीरिया पर लगाम लगाने का अच्छा ऑप्शन!
दालचीनी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण ख़ून को जमने से रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही आज के समय में दिन-नु-दिन बढ़ रहे विभिन्न वायरस जैसे हानिकारक बैक्टीरिया को रोकने और लगाम लगाने में यह बहुत लाभदायक है। साथ ही यह ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करने में मददगार है।
लाभकारी है अंजीर!
अंजीर पोटैशियम, मैंगनीज़ और एंटी-ऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर होने के कारण शरीर के पीएच के स्तर को नियंत्रित करती है। अंजीर में मौजूद फ़ाइबर ख़ून में शुगर के स्तर को बढ़ाने में कारगर साबित होते हैं।
काली मिर्च के सेवन से नुक़सानदायक कीटाणुओं का नाश!
शरीर में फैलने वाले हानिकारक कीटाणुओं को मारने और नए कीटाणुओं को शरीर में घुसने से रोकने में काली मिर्च काफ़ी लाभदायक है! साथ ही प्रोबायोटिक होने के कारण यह हमारी आँतों की अच्छी सेहत को बनाए रखने के लिए मददगार अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में कारगर साबित होती है! काली मिर्च में एंटी-इंफ़्लेमेट्री, एंटी-फ़ंगल और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी हमारे शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मददगार साबित होते हैं!
गर्म चाय में करें लौंग का सेवन!
दाँतों के दर्द में लाभकारी लौंग हमारी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाने में एक अहम् भूमिका निभाती है! इसके साथ ही चाय में इसके सेवन से आपको गले की ख़राश, गले में दर्द, खाँसी, इत्यादि, से भी निजात मिल जाती है!
(डॉ. तोलेटी जानकीराम, पूर्व कुलपति, डॉ. वाई.एस.आर. हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी, आँध्र प्रदेश एवं पूर्व सहायक महानिदेशक, बाग़वानी विज्ञान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् से बातचीत पर आधारित।)








