श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
भई! आज हम एक शताब्दी एक्सप्रैस लाइफ़ जी रहे हैं। बोलें; तो, आज हमारी लाइफ़ शताब्दी एक्सप्रैस ट्रेन की रफ़्तार से भी तेज़ दौड़ रही है। इस शताब्दी एक्सप्रैस की रफ़्तार से भागती-दौड़ती ज़िन्दगी में आज हम एक स्ट्रैसफ़ुल लाइफ़ जीने को मजबूर हो गए हैं!
आज के भाग-दौड़ और स्ट्रैस से भरे इस ट्रैंड को प्रॉफ़ैशनल लाइफ़ के नाम से बुलाते हैं! वैसे देखा जाए; तो, आज के ऑफ़िसेस में चाय से ज़्यादा कॉफ़ी का चलन चल गया है क्योंकि, हमारा मानना है कि भई! कॉफ़ी पीते ही हमें काम करने की ताक़त और ताज़गी मिल जाती है और-तो-और, इससे हमारा कंसंट्रेशन भी बढ़ जाता है!
अब तो, हालात ऐसे हैं कि हर 10 मिनट के बाद हमें कॉफ़ी का एक कप चाहिए होता है! आज कई जाने-माने मॉडर्न कॉफ़ी ब्राण्ड्स ने कॉफ़ी पीने की इस आदत को और भी ज़्यादा बढ़ावा दिया है। आज हमें कोई भी मीटिंग करनी होती है; तो, हम बिना देर किए हुए एकदम बोलते हैं कि हाँ! भई! हम लोग बरिस्ता कॉफ़ी या कैफ़े कॉफ़ी डे में मिल लेते हैं! क्यों? होता है ना कुछ ऐसा ही!
आज हमारी कॉफ़ी पीने की आदत इस क़दर हो गई है कि अब हम सुबह बैड-टी की जगह बैड-कॉफ़ी ज़्यादा प्रैफ़र करते हैं। लेकिन, कभी आपने सोचा है कि हम किसी भी आदत को एक ट्रैंड मानकर बस यूँ ही अपना लेते हैं!

बिल्कुल! भई! माना कि आपको कॉफ़ी अच्छी लगती है; लेकिन, अगली बार अपनी इस कॉफ़ी का एक कप लेने से पहले थोड़ा-सा उसे जान ज़रूर लें:
क्यों है कॉफ़ी बैस्ट?
कॉफ़ी पैरासिटामोल के एक्शन को बढ़ा देती है!
डॉक्टर्स का मानना है कि कॉफ़ी आपकी दवाई में पाए जाने वाले पैरासिटामोल के एक्शन को और भी बढ़ाने में मदद करती है, जिसके कारण बुख़ार में ली जाने वाली दवाई की गोली जल्दी असर करती है। तो, अगर अगली बार आपको भी बुख़ार जैसा फ़ील हो; तो, ज़रूर आप अपनी दवाई एक कप कॉफ़ी के साथ लें! फिर देखें कि कितनी जल्दी आपकी तबियत में सुधार आता है!
अस्थमा में है लाभदायक!
माना जाता है कि अस्थमा के मरीज़ के लिए कॉफ़ी लाभदायक है क्योंकि, कॉफ़ी में पाई जाने वालीं कैफ़ीन और थियोफ़ॉयलीन नाम की दवाइयाँ अस्थमा से ग्रस्त मरीज़ों को साँस ठीक से आने में बहुत मदद करती हैं। इसे देखते हुए; तो, भई! सच में कॉफ़ी अस्थमा पेशेंट्स के लिए एक बहुत ही बड़ा वरदान है!
आपके मूड को करती है रिफ़्रैश!
आज अपने काम और टारगेट्स को लेकर हम कुछ ज़्यादा ही परेशान रहते हैं, जिसके कारण हमारा मूड भी ख़राब रहता है और हमें कुछ भी अच्छा नहीं लगता! कहते हैं कि कॉफ़ी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो आपके मूड को ठीक यानि, अच्छा करने में मदद करते हैं। ऐसे में अगर आपका भी मूड है ख़राब; तो, आप भी कॉफ़ी का एक कप ज़रूर लें! ऐसा करने से आपका मूड भी सही हो जाएगा और आप दोबारा से काम करने के लिए तैयार हो जाएँगे!

आँतों के कैंसर के लिए है वरदान!
यूँ तो, कैंसर एक बहुत ही ख़तरनाक और जानलेवा बीमारी है। लेकिन, जो लोग आँतों के कैंसर से ग्रस्त हैं, उनके लिए यह किसी भी बड़ी ख़ुशख़बरी से कम नहीं है कि कॉफ़ी पीने से उनका यह कैंसर ठीक हो सकता है। क्योंकि, डॉक्टर्स की मानें; तो, कॉफ़ी में पाए जाने वाले तत्व कैंसर को ख़त्म कर देते हैं। ऐसे में अगर आप भी हैं आँतों के कैंसर से ग्रस्त; तो, कॉफ़ी ज़रूर पीएँ!
माना कि कॉफ़ी कुछ मामलों में आपके लिए वरदान है; लेकिन, भई! अगर किसी भी चीज़ के कुछ अच्छे गुण होते हैं; तो, उसकी ओवर–डोज़ लेने से कुछ–ना–कुछ अवगुण या साइड–इफ़ैक्ट्स भी ज़रूर होते हैं! और, वैसे भी हर चीज़ की अति नुकसानदेय तो, होती ही है!
क्या हैं ज़्यादा कॉफ़ी पीने के साइड–इफ़ैक्ट्स?
डायूरेटिक है!
डॉक्टर्स का मानना है कि ज़्यादा कॉफ़ी पीने वालों को डायूरेटिक यानि, ज़्यादा पेशाब आने की शिकायत रहती है। जो एक समय में आकर किसी बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकती है! तो, जितना हो सके; उतना नियंत्रित मात्रा में कॉफ़ी पीएँ!
एंटी–नार्कोटिक है!
ज़्यादा कॉफ़ी पीने वालों को अक्सर कम नींद आने की शिकायत रहती है। इसका मुख्य कारण यह है कि कॉफ़ी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो एंटी-नार्कोटिक यानि, नींद भगाने वाले होते हैं!
विटामिन–बी को कर देती है कम!
माना जाता है कि विटामिन-बी हमारी बॉडी के लिए बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि, इसकी कमी से डिप्रैशन की बीमारी हमारी बॉडी में अपना घर बना लेती है। तो, ऐसे में अगर आप ज़रूरत से ज़्यादा कॉफ़ी पीते हैं; तो, यह ज़रूर ही आपकी बॉडी में विटामिन-बी की कमी कर देगी! तो, कॉफ़ी ज़रूर पीएँ; लेकिन, बस! थोड़ी नियंत्रित मात्रा में!
क्या कहना है डॉक्टर्स का?
डॉ. वी.के. मोंगा,
चेयरमैन,
दिल्ली नर्सिंग होम्स फ़ोरम,
दिल्ली।
हालाँकि, कॉफ़ी पीने से हमें कई फ़ायदे तो, होते ही हैं; लेकिन, किसी भी चीज़ की अति ख़राब और नुकसानदेय होती है! देखा जाए; तो, आपकी एक कप कॉफ़ी में 60 से 120 मिलीग्राम कैफ़ीन होता है, जो आपकी बॉडी के लिए बहुत हानिकारक होता है। ज़्यादा कॉफ़ी पीने से आपके दिल की धड़कनें बढ़ जातीं हैं, जिसके कारण आपको घबराहट होने लगती है। तो, कॉफ़ी को सिर्फ़ टेस्ट के लिए पीएँ, उसे एक आदत ना बनाएँ!

ज़्यादा कॉफ़ी पीने के पीछे कोई साइकोलॉजिकल रीज़न तो नहीं?
डॉ. मनीष जैन,
सीनियर कंसल्टैंट, साइकेट्रिस्ट,
बी.एल. कपूर मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल,
करोल बाग़, दिल्ली।
आज हम अपने टारगेट्स को मीट करने के लिए इतने ज़्यादा स्ट्रैसफ़ुल रहते हैं कि हम कई चीज़ें अपने आप ही अज़्यूम कर लेते हैं और उसी के हिसाब से अपनी काम करने की आदतें भी ढाल लेते हैं। इसी तरह से देखा जाए; तो, कॉफ़ी पीने वालों के साथ भी यही मैंटेलिटी रहती है। आज के भाग-दौड़ से भरे जीवन में लोग मानते हैं कि कॉफ़ी पीने से उनकी सारी टेंशन्स दूर हो जाएँगी और कॉफ़ी से उनको काम करने के लिए फिर से चुस्ती और स्फ़ूर्ती मिलेगी।
कई मामलों में तो, यह भी देखा गया है कि कुछ लोग तो, बिना कॉफ़ी लिए एक काम तक भी नहीं कर सकते! तो, ऐसे में ज़रूरत है कि हम अपनी सोच बदलें और कॉफ़ी को एक ड्रिंक के रूप में ही पीएँ! उसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ना बनाएँ!







