हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 4 फरवरी। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने अपने पद के साथ माननीय लिखना बंद कर दिया है। इलस्ट्रेटेड डेली न्यूज़ और कड़वा सत्य में खुलासा होने के बाद यह सुधार किया गया है। इस बीच राजस्थान के माननीय राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे को आगरा में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान परिसर में आयोजित आई एल ए के सम्मेलन के उद्घाटन के लिए इस उद्देश्य से बुलाया गया है जिससे संस्थान की बदनाम छवि को सुधारा जा सके। लेकिन स्थिति बेकाबू हो चुकी है। श्री कुलकर्णी को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है।
इस बीच दिल्ली स्थित शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, श्री कुलकर्णी के खिलाफ शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उनके ऊपर लगे फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप का मामला तूल पकड़ता नज़र आ रहा है।
शिक्षा मंत्रालय ने आगरा स्थित मुख्यालय में निदेशक पद को भरने के लिए विज्ञापन आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, श्री कुलकर्णी फिर से निदेशक पद लेने के लिए सारे दांव चल रहे हैं। उधर श्री कुलकर्णी पर लगे आरोपों से शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भी परेशान हैं। उन्होंने श्री कुलकर्णी की पिछली नियुक्ति के समय संबंधित फाइल की नोटशीट पर हस्ताक्षर नहीं किये थे। अध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं करने से श्री कुलकर्णी की निदेशक पद पर हुई पिछली नियुक्ति पर भी सवाल खड़े करता है।







