श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
आज हम सभी एक स्ट्रैस से भरी लाइफ़ जी रहे हैं! आज हमारे पास अपने लिए भी सोचने तक का टाइम नहीं है। वो ऑफ़िस में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ और दूसरे से ज़्यादा ख़ुद को बेहतर साबित करने की चाहत! ना जाने कितने ही प्रैशर और टेंशन्स झेलनी पड़ जाती हैं हमारे इस छोटे-से दिमाग को!
भई! क़ामयाबी पाना कोई बुरी बात तो नहीं है; लेकिन, अगर यह हमारे स्वास्थ्य को सैक्रिफ़ाइस करके मिले; तो, शायद यह एक बहुत ही बड़ा नुकसान होगा और हमारी सबसे बड़ी बेवकूफ़ी भी!
यूँ तो, हमें किसी भी काम का स्ट्रैस या टेंशन ना लेने की सलाह देने वाले हज़ारों क्या, लाखों मिल जाते हैं; लेकिन, ज़रा उनसे यह तो पूछिए कि जब यही सिचुएशन उनके सामने आती है, तब वो क्या करते हैं? तो, भई! आप बिल्कुल भी घबराएँ मत! क्योंकि, यहाँ हम आपको बता रहे हैं कुछ बेहद ही सिंपल और आसान से टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप भी पूछेंगे कि यह स्ट्रैस और टेंशन किन चिढ़ियों के नाम हैं:
- कोई अच्छा-सा म्यूज़िक सुन लें!
कहते हैं कि म्यूज़िक हमारे दिमाग को शाँत करके हमारे मूड को रिफ़्रैश करने में एक बहुत ही अहम भूमिका निभाता है! डॉक्टर्स के एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जब आप म्यूज़िक सुनते हैं; तो, उन पलों में आप अपनी सारी टेंशन्स और चिंताएँ भूलकर म्यूज़िक की बीट्स का आनंद लेने में खो जाते हैं। तो, अपने काम की सभी टेंशन्स को दें थोड़ा-सा ब्रेक और कोई भी सूथिंग-सा म्यूज़िक सुनकर करें अपने मूड को रिफ़्रैश!
- अपने किसी क़रीबी से अपनी टेंशन्स को डिस्कस करें!
बड़े-बुज़ुर्गों का मानना है कि किसी भी परेशानी को हम अकेले ही हल नहीं कर सकते! और-तो-और, ऐसी कोई भी बात, जो आपको परेशान कर रही है; उसे अपने अंदर ही रखने से आप और भी ज़्यादा टैंस्ड और परेशान हो जाते हैं और बड़ी ही आसानी से डिप्रैशन जैसी ख़तरनाक बीमारी के शिकार हो जाते हैं। जो सीधा आपकी हैल्थ पर असर डालता है। अगर घर के बड़े-बुज़ुर्गों की मानें; तो, अपने मन की बात हम अपने किसी भी क़रीबी व्यक्ति के साथ शेयर करके अपनी बड़ी-से-बड़ी टेंशन्स का हल बड़ी ही आसानी से पा सकते हैं!
ऐसे में अगर आप भी किसी परेशानी से जूझ रहे हैं; तो, बिल्कुल भी मत सोचिए! आज ही अपनी टेंशन्स और परेशानियाँ अपने किसी क़रीबी से शेयर करके देखें! आपका मन हल्का हो जाएगा और आपको बहुत रिलैक्स्ड फ़ील होगा!
- कुछ पल के लिए बच्चों जैसी शैतानियाँ करें!
माना जाता है कि हम चाहें कितने ही बड़े क्यों ना हो जाएँ; लेकिन, हमारे अंदर हमारा वो बचपन हमेशा सुरक्षित रहता है। आज जब हमारे सर पर काम की इतनी हज़ारों-लाखों टेंशन्स हैं; तो, हम अपने बचपन के वो शरारत भरे पल क्यों नहीं याद करते! ज़रा सोचिए! हमारा वो न्यारा-सा बचपन, जिसमें हमने ना जाने कितनी ही और कैसी-कैसी शरारतें की होंगी! तो, आज स्ट्रैस से भरे इस पल में उन्हीं पलों को याद करने से हम अपनी कितनी बड़ी-से-बड़ी टेंशन्स को दूर भगा सकते हैं!
ऐसे में अगर आपको भी अपने किसी भी काम की कोई टेंशन सता रही है; तो, आप भी एक बार अपने बचपन की उन शरारतों को याद करके फिर से वो ही सारी शैतानी और मस्ती करके देखिए! निश्चित ही आपको बहुत मज़ा आएगा और अपके दिमाग से सारी टेंशन्स ऐसे भागेंगी कि आप एकदम रिलैक्स्ड फ़ील करेंगे!
- मॉर्निंग वॉक को करें अपने शिड्यूल में इंक्लूड!
डॉक्टर्स के हिसाब से हमारी अच्छी हेल्थ के लिए विटामिन-डी बहुत ज़रूरी है! इसकी कमी से हमारा मूड ख़राब होता है और हम डिप्रैस्ड फ़ील करते हैं। वैसे तो, विटामिन-डी हमारे खाने में पाया ही जाता है; लेकिन, कहते हैं कि सुबह की धूप में यह अधिक मात्रा में पाया जाता है! तो, आज से ही अपने बिज़ी शिड्यूल में से काम-से-काम 10 से 15 मिनट मॉर्निंग वॉक के लिए ज़रूर रखें और देखें कि कैसे पूरा दिन आपका मूड अच्छा रहता है!
- अपने आसपास से नेगेटिव थॉट्स वाले लोगों को दूर रखें!
यह देखा गया है कि जब हम किसी भी काम या चीज़ को लेकर टेंशन में होते हैं; तो, हमारे दिमाग में ना जाने कितना ज़्यादा प्रैशर बन जाता है। इसके कारण हमारा दिमाग किसी भी चीज़ में नहीं लगता है और-तो-और, हमारा ब्लड-प्रैशर भी लो होने लगता है, जिसकी वजह से हम अपने आपको बीमार-सा महसूस करने लगते हैं। क्यों? होता है ना कुछ ऐसा ही!
कुछ लोगों का तो, यह भी मानना है कि जब हम टेंशन में होते हैं; तो, हमारे दिमाग में हमेशा नेगेटिव थॉट्स ज़रूर आते हैं। इसके कारण कई बार हम अपनी ज़िन्दगी में इतने ग़लत क़दम तक उठा लेते हैं, जिनका ख़ामियाज़ा हमें और हमारे परिवार को ता-उम्र भुगतना पड़ता है।
तो, अगर आप भी कभी टेंशन में हों; तो, कोशिश करें कि किसी भी नेगेटिव थॉट को या किसी भी व्यक्ति को, जो आपको ग़लत फ़ैसला और क़दम उठाने की सलाह दे रहे हों; उनको अपने आसपास भी भटकने ना दें!
- कोई अच्छी-सी फ़नी मूवी देखने चले जाएँ!
हँसना हमारी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। आज जीवन में अपने किसी-ना-किसी काम को लेकर हमारे सामने टेंशन्स का पहाड़ खड़ा ही रहता है। जिसकी वजह से हम तो जैसे हँसना भूल-से ही गए हैं। यही कारण है कि आज किसी भी छोटी-से-छोटी टेंशन की वजह से हम डिप्रैशन में आ जाते हैं। एक रिसर्च में भी पाया गया है कि हँसना हमारी एक्स्ट्रा कैलोरीज़ को ख़त्म करने में और हमारे दिल को स्वस्थ रखने में मददगार साबित होता है।
तो, भई! हमें सभी टेंशन्स को भुलाकर दिल खोलकर हँसने का मौक़ा देने में कॉमेडी फ़िल्मों के योगदान को भला हम कैसे नकार सकते हैं! अगर आप भी कभी टेंशन जैसी सिचुएशन अपनी ज़िंदगी में महसूस कर रहे हों और चाह रहे हों उससे छुटकारा पाना; तो, अपने परिवार के साथ एक बढ़िया-सी कॉमेडी फ़िल्म देखने चले जाएँ! ऐसा करने से आपको कुछ पल अपने परिवार के साथ गुज़ारने के मौक़े के साथ-साथ अपनी टेंशन्स से भी कुछ पल के लिए राहत भी मिलेगी!
- अच्छा और पौष्टिक खाना खाएँ!
स्वस्थ शरीर में ईश्वर का वास होता है! लेकिन, आज हम कुछ ज़्यादा ही फ़ास्ट लाइफ़ जी रहे हैं। आज जैसे-जैसे हम क़ामयाबी की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ही हम कुछ ज़्यादा ही बिज़ी होते जा रहे हैं। इसी के कारण आज हम अपनी हेल्थ से भी समझौता करने में ज़रा-सा भी नहीं सकुचाते!
देखा जाए; तो, आज के टाइम में हम घर के बने शुद्ध खाने की जगह फ़ास्ट फ़ूड्स को ज़्यादा प्रिफ़्रैंस देने लगे हैं। इसी के कारण कई बार बाहर का खाना खाने से हमारी तबियत तक ख़राब हो जाती है! जिसकी वजह से हम छोटी-छोटी बातों पर ज़्यादा जल्दी झुँझला जाते हैं और इससे हमारे रिश्तों में भी कड़वाहट पैदा हो जाती है।
तो, इस सिचुएशन से बचने के लिए कोशिश करें कि आप एक हेल्थी डाइट अपनाएँ और रखें अपने आपको बीमारियों से मुक्त और रहें एकदम हैल्थी एंड फ़िट और साथ ही बनाएँ अपनी ज़िन्दगी को ख़ुशहाल!
- मैडिटेशन करें!
एक स्वस्थ और तनाव-मुक्त जीवन जीने के लिए मैडिटेशन बहुत ज़रूरी है। लेकिन, आज की मॉडर्न और एडवांस्ड लाइफ़ में कुछ लोग मैडिटेशन करने वालों को एक अलग ही नज़रिए से देखते हैं, जो कि बिल्कुल ही ग़लत है!
मैडिटेशन करने से आपको अपनी टेंशन्स से रिलैक्स तो, मिलता ही है; साथ-ही-साथ आपकी कंसंट्रेशन पॉवर भी बढ़ती है! तो, अगर आप भी चाहते हैं अपने माइंड को करना रिलैक्स्ड और अपने काम में देना अपना बेस्ट; तो, आज ही मैडिटेशन करना शुरू करें और पाएँ अपने अंदर एक नया चेंज!
- अपनी कम्यूनिकेशन स्किल्स को करें राइट!
एक स्वस्थ जीवन बिताने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आपकी कम्यूनिकेशन स्किल्स अच्छी हों; यानि, आप अपनी बात दूसरों के सामने अच्छे-से रख सकें। क्योंकि, कई बार किसी व्यक्ति से आपका सही कम्यूनिकेशन ना हो पाने की वजह से ग़लतफ़हमियाँ पैदा हो जाती हैं, जिससे आपके संबंधों में दरार आ जाती है। ऐसे में आपका मूड भी ख़राब रहता है और एक-दूसरे को देखते ही आपका ख़ून खौल उठता है। इससे आपकी सेहत पर भी बहुत गहरा असर पड़ता है। इसलिए, ज़रूरी है कि आपकी कम्यूनिकेशन स्किल्स को सही और अच्छा रखें। इससे आपके संबंधों में मिठास बनी रहेगी।

- माइंड को रखें बिज़ी!
कहते हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है! जब आप खाली होते हैं; तो, सिर्फ़ बेकार की बातें ही आपके दिमाग में आती हैं। ऐसे में ना जाने कितने ही डैस्ट्रक्टिव थॉट्स आपके दिमाग में घर कर चुके होते हैं!
तो, इस सिचुएशन से अपने आपको बचाएँ और अपने खाली टाइम को किसी पॉज़िटिव और कंस्ट्रक्टिव सोच और काम में लगाएँ। ऐसा करके आपको बहुत अच्छा लगेगा और आपका मन भी ख़ुश रहेगा!
क्या कहना है साॅयकोलॉजिस्ट्स का?
डॉ. शिल्पी शर्मा,
क्लीनिकल साॅयकोलाॅजिस्ट
आज लोगों में स्ट्रैस और डिप्रैशन के मामलों में काफ़ी तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। इसका मुख्य कारण है कि आज लोग अपनी क्षमता से ज़्यादा पाने की उम्मीद रखते हैं और जब उनकी वो उम्मीद पूरी नहीं होती; तो, वो एकदम स्ट्रैस्ड हो जाते हैं और डिप्रैस्ड फ़ील करने लगते हैं। इस कारण ऐसे लोग कई तरह की बीमारियों को भी अपनी तरफ़ आकर्षित कर लेते हैं!
मेरे हिसाब से हम लोगों को सबसे पहले अपनी क्षमता को पहचानना होगा और बेकार की चीज़ों के पीछे दौड़कर अपने दिमाग में स्ट्रैस को जगह नहीं देनी होगी! ऐसा करने से ना केवल हम एक स्ट्रैसफ़ुल लाइफ़ जीने से बचेंगे; बल्कि, अपने जीवन को और भी सुंदरता से जीने में क़ामयाब होंगे!









