श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
सदियों से हम सभी की ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा रहा है रेडियो! या अगर यूँ कहें कि हम सभी की ज़िंदगी के हर पल का एक अनूठा और सच्चा साथी रहा है यह रेडियो! तो, शायद यह पूरी तरह से ग़लत नहीं होगा!
आज भी हमें और आपको याद हैं अपने बचपन के वह सुनहरे पल जब दादाजी या दादीजी के उस छोटे-से ट्रांज़िस्टर सैट पर अपनी पसंद की फ़्रिक़्वैन्सी को सैट कर रेडियो पर ब्रॉडकास्ट होने वाले अपने मन-पसंद प्रोग्राम का हमारा वह बेसब्री से इंतज़ार करना। वह रसोई के स्लैब पर या फिर अंगीठी के पास अपना एक छोटा-सा रेडियो सैट रखकर मम्मी या बुआ के द्वारा अपने पसंदीदा रेडियो प्रोग्राम्स को सुनते हुए घर के सभी सदस्यों के लिए स्वादिष्ट खाना बनाना! सच! कितने अनमोल पल होते थे ना वह!
आज भी इतने एडवान्स्ड होने के बाद भी हमारे घरों में सुबह की पहली चाय के कप के साथ वो दादाजी का बड़ी बेसब्री से रेडियो ट्यून करके समाचार और अपना कोई पसंदीदा शो सुनना; ऑफ़िस जाते समय गाड़ी वो पापा, चाचा और ताऊजी का अपने-अपने पसंदीदा रेडियो स्टेशंस को ट्यून करने को लेकर एक-दूसरे से बहस करना और मौक़ा पाते ही अपना पसंदीदा रेडियो स्टेशन ट्यून कर लेना और-तो-और, कॉलेज में भी क्लास में लैक्चर्स के समय हमारा वो अपनी डैस्क के नीचे छुपकर अपने मोबाइल्स पर पसंदीदा रेडियो स्टेशन ट्यून करना! सच! रेडियो आज हम सभी की ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा बन चुका है। और-तो-और, कंप्यूटर के इस युग में भी रेडियो ने आज की युवा पीढ़ी के बीच में अपनी काफ़ी लोकप्रियता बना रखी है।

इसके अलावा देश-दुनिया में घटित हो रहीं हम सभी के जीवन के लिए महत्वपूर्ण घटनाओं की ज़रूरी जानकारियाँ भी हमें इस छोटे-से रेडियो सैट पर ही सुनने को मिलतीं थीं। इस रेडियो नामक हमारे हर पल के साथी की शुरुआत टी.वी. से भी पहले की मानी जाती है।
इस रेडियो ने तो, जैसे हमारे जीवन में अपनी एक अलग ही और महत्त्वपूर्ण जगह-सी बना ली है। यह रेडियो अपने आप में अंतरंग होते हुए भी सूचना के प्रसारण के क्षेत्र में एक व्यापक और शक्तिशाली माध्यम है।
आज भी देश के दूर-दराज़ के गाँवों और जगहों में जहाँ कनैक्टिविटी की समस्याएँ हैं, वहाँ पर भी कोई भी महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ और सूचनाएँ पहुँचाने में यह रेडियो ही एक सफ़ल माध्यम नज़र आता है।
आज के युग को मॉडर्नाइज़ेशन का युग कहा जाता है। आज हर आदमी नाम और पैसा पाने की होड़ में व्यस्त है, जिसके कारण आज उसे अपने ही मनोरंजन के लिए समय नहीं मिल पाता है। ऐसे में रेडियो ने एक सबसे अच्छे मनोरंजन साधन की भूमिका बख़ूबी निभा रहा है और अगर यह कहें कि आज रेडियो ने हर व्यक्ति के जीवन में अपनी पकड़ अच्छी बना ली है; तो, यह पूरी तरह ग़लत भी नहीं होगा!
रेडियो की लोकप्रियता को समर्पित विश्व रेडियो दिवस की शुरुआत!
आम मानस-जन के जीवन में अपनी एक अलग पहचान बना चुके इस रेडियो की लोकप्रियता को देखते और वर्ष – 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की स्मृति में हर वर्ष 13 फ़रवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
आकाशवाणी से हुई भारत में रेडियो प्रसारण की सबसे पहली शुरुआत!
यूँ तो, आम जन के बीच रेडियो की अपनी एक अलग ही जगह और पहचान है। लेकिन, देश में रेडियो प्रसारण की सबसे पहली और आधिकारिक तौर पर शुरुआत आकाशवाणी से ही हुई थी। ऑल इंडिया रेडियो के नाम से मशहूर आकाशवाणी अपनी स्थापना से ही “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय!” की भावना से भरे हुए आदर्श वाक्य के साथ राष्ट्र की सेवा में कार्यरत है।
वर्ष – 1936 में स्थापित और स्वतंत्रता के बाद सार्वजनिक स्वामित्व में आने के बाद अपने श्रोताओं की विविधता के चलते अपने द्वारा विविध भाषाओं में कार्यक्रमों का प्रसारण करने के लिए विश्व के सबसे बड़े लोक सेवा प्रसारण संगठनों में से एक होने का गौरव हमारे देश के जाने-माने और हर-दिल अज़ीज़ आकाशवाणी के नाम है।
इस वर्ष क्या है विश्व रेडियो दिवस – 2026 की थीम?
रेडियो की लोकप्रियता और प्रासंगिकता को बरक़रार रखते हुए और आज टैक्नोलॉजी में आए एड्वांसमैंट्स को देखते हुए इस साल के “विश्व रेडियो दिवस – 2026” की थीम – “रेडियो और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एक उपकरण है, आवाज़ नहीं!” रखी गई है।
रेडियो के प्रति दीवानगी ने बनवाया गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर!
भई! अमूमन देखा जाता है कि रेडियो के प्रति हम सभी का एक अलग ही लगाव और उससे कुछ ख़ास जुगाड़ भी है।
लेकिन, क्या ऐसा भी सकता है कि कोई व्यक्ति रेडियो से इतना प्यार करे कि उसका नाम विश्व की जानी-मानी गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज़ हो जाए! जी! हाँ! ऐसा ही कुछ हुआ है उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले के रहने वाले श्री राम सिंह बौद्ध के साथ!
श्री राम सिंह बौद्ध को “भारत का रेडियो मैन” के ख़िताब से नवाज़ा जा चुका है। इन्हें वर्ष – 2025 में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा 1,257 रेडियो के विश्व के सबसे बड़े संग्रह के लिए मान्यता प्रदान की गई है।
श्री राम सिंह बौद्ध के द्वारा संग्रहित रेडियो सैट्स में बीसवीं सदी के शुरुआती दौर के भारी-भरकम लकड़ी के रिसीवर से लेकर आज के मॉडर्न और कॉम्पैक्ट ट्रांज़िस्टर सैट्स तक शामिल हैं, जिन्होंने लाखों भारतीय घरों में समाचार और मनोरंजन पहुँचाने में एक अहम् भूमिका निभाई है।
आज रेडियो के प्रति इनके इस जुनून को देखते और उसे सहेजते हुए रेडियो सैट्स के उनके इस संग्रह को सिद्धार्थ इंटर कॉलेज में स्थित एक संग्रहालय में रखा गया है, जिसका प्रबंधन उनका परिवार करता है। यह स्थान एक जीवंत संग्रह के रूप में कार्य करता है, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आगंतुकों को जनमत और राष्ट्रीय चेतना को आकार देने में रेडियो की भूमिका को समझने में मदद मिलती है।
आज तीव्र गति से हो रहे डिजिटलीकरण के बावजूद, रेडियो विविध और वंचित आबादी तक पहुँचने, साक्षरता, भाषा तथा कनैक्टिविटी की बाधाओं को दूर करने और सार्वजनिक सूचना, शिक्षा व आपदा संचार में सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।






