हरेन्द्र प्रताप की खोजी रिपोर्ट
वाराणसी, 16 फरवरी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति बिहारी लाल शर्मा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिर गए हैं और सम्पूर्ण विश्वविद्यालय आपसी खींचतान का अखाड़ा बन गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव ( सतर्कता ) को अभी हाल में ही कुलपति के खिलाफ गंभीर शिकायती पत्र भेजा गया है जिनमें उनके ऊपर वित्तीय अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई है।
वहीं दूसरी ओर कुलपति पर विश्वविद्यालय में गलत तरीके से नियुक्ति करने और पीएच.डी. स्कॉलर को अनुचित लाभ देने तथा महिला स्कॉलर से विश्वविद्यालय के उन प्रोफेसरों पर झूठे आरोप लगवाने के भी संगीन आरोप लगे हैं जिन्होंने गलत कार्य में कुलपति और महिला स्कॉलर का साथ नहीं दिया है।

इस संबंध में विभागीय जांच से संबंधित प्रोफेसर को प्रताड़ित कर डराने का प्रयास किया जा रहा है। इसी बीच सीनियर से जबरन आवासीय गैराज छीन कर जूनियर प्रोफेसर को दिलवाने का प्रकरण भी तूल पकड़ रहा है। एक प्रोफेसर द्वारा एक महिला स्कॉलर को उपस्थिति का नकली प्रमाण पत्र नहीं देने और कुलपति द्वारा अपने अधिकार का दुरूपयोग कर बैक डेट से उपस्थिति प्रमाण पत्र जारी कराने के मामले ने भी सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय इस समय तीन – चार गुटों की खींचतान के कारण आंतरिक लड़ाई का अखाड़ा बन गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के सतर्कता विभाग ने यदि शीघ्र जांच आरंभ कर दी तो दोषियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आंतरिक प्रशासनिक कलह का दुष्प्रभाव शैक्षणिक स्तर पर भी पड़ता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, अनुपस्थित रह कर बैक डेट से उपस्थिति का प्रमाण पत्र लेने का चलन यहां जोरों पर है और जो शिक्षक ग़लत कार्यों में सहयोग नहीं कर रहे हैं उन्हें झूठे मामले में फंसा कर प्रताड़ित किया जा रहा है। फिलहाल पूरा विश्वविद्यालय सघन जांच की प्रतीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जांच में कुलपति के साथ अन्य अधिकारियों के भी फंसने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।












