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रेडियो जॉकीः अब बिखरेगा आवाज़ का जादू!

News Desk by News Desk
February 18, 2026
in देश
रेडियो जॉकीः अब बिखरेगा आवाज़ का जादू!
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श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली

रेडियो! यह वो शब्द है, जो हम सभी की ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है! या अगर यूँ कहा जाए कि रेडियो हमारे जीवन के हर पल का एक सच्चा और ख़ास दोस्त बन गया है; तो, शायद यह बिल्कुल भी ग़लत नहीं होगा! ऐसे में चाहे हम कॉलेज में हों या फिर सफ़र में; या घर में हों या फिर किचन में ही क्यों ना हों! रेडियो पर विभिन्न प्रकार के मनमोहक गीतों को सुनकर जैसे हमारी सारी टेंशन्स अपने-आप ही छूमंतर हो जातीं हैं!

लेकिन, एक बात और है! और, वो यह कि रेडियो पर अपनी पसंद के गीतों के अलावा कई बार हम सिर्फ़ अपने पसंदीदा रेडियो जॉकी को सुनने के लिए ही कोई एक रेडियो स्टेशन लगा लेते हैं। सही कहा ना हमने!

तो, ऐसे में आपका भी मन करता होगा कि क़ाश! मैं भी एक दिन रेडियो जॉकी बनकर अपनी आवाज़ का जादू पूरी दुनिया में फ़ैला दूँ! अगर सच पूछें; तो, रेडियो पर लाईव ऑन-एयर जाने का मज़ा ही कुछ और है। भई! क्योंकि, रेडियो एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा आप एक ही समय में लाखों लोगों से रूबरू हो रहे होते हैं। और, ऐसे में अगर आपकी तारीफ़ों के पुल बाँधते हुए किसी भी लिसनर का वो एक एस.एम.एस. या कॉल आपकी आवाज़ के जादू को साकार और क़ारगर साबित कर देते हैं।

तो, अगर आपकी आवाज़ में भी है वो जादू, वो कशिश या वो स्टाईल; जो दूसरों को आपका दीवाना बना दे! तो, आप में भी हैं एक अच्छे आर.जे. बनने के पूरे गुण! लेकिन, ज़रा ग़ौर फ़र्माइएगा! एक अच्छा आर.जे. बनने के लिए सिर्फ़ अंदाज़ और आवाज़ ही काफ़ी नहीं हैं; बल्कि, उसके लिए और भी कई बातों का घ्यान रखना बेहद ज़रूरी होता है जिनके बारे में आपको बता रहे हैं वरिष्ठ संवाददाता, श्रीनाथ दीक्षितः

  • मशीनों से हों रूबरू!

रेडियो पर लॉइव जाने से पहले किसी भी रेडियो जॉकी के लिए सबसे पहले यह बेहद ज़रूरी होता है कि वो अपने स्टूडियो में रखीं मशीनों से अच्छी तरह से रूबरू हो ले! यानि, जिन मशीनों के माध्यम से वो अपनी सुरीली आवाज़ के जादू को बिखेरकर अपने लिसनर्स को अपना दीवाना बना चाहता / चाहती हैं; उनके बारे में ज़रा अच्छे-से जान लें और समझ लें। ऐसा करने से वो ऑन-एयर जाते समय किसी भी प्रकार भी तक़नीक़ी ख़राबी के कारण होने वाली समस्या को आसानी से हैंडल कर सकते हैं।

  • टार्गेट–ऑडियंस का रखें ध्यान!

क्योंकि, आज रेडियो समाज के हर तबक़े के लोगों के मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। तो, ऐसे में एक अच्छे रेडियो जॉकी को सबसे पहले यह ध्यान ज़रूर रखना चाहिए कि वो अपना प्रोग्राम अपनी  टार्गेट-ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए ही करे। उदाहरणार्थ – लिसनर्स कौन हैं और किस एज ग्रुप के हैं; जैसे बच्चे, बूढ़े या जवान! अगर आप बच्चों के लिए शो कर रहे / रही हैं; तो, उनकी मानसिकता, सोचने के दायरे या क्षमता और सबसे महत्वपूर्ण यह कि उनके इंट्रस्ट की बातें करें और उन्हीं के अनुसार गीत बजाएँ!

  • लिसनर्स का ज़्यादा-से-ज़्यादा पार्टीसिपेशन रखें!

पहले के समय में साधारण तक़नीक़ होने के कारण एक अनॉउंसर या रेडियो-जॉकी का रोल सिर्फ़ एक-तरफ़ा ही होता था। जिसके कारण अपने लिसनर्स को अपने शो से जोड़ने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं होते थे। ऐसे में पहले लोग अपनी राय लिखकर चिट्ठी के द्वारा भेजा करते थे, जिससे उनका हमारे शो में पार्टीसिपेशन बहुत ही सीमित रह जाता था! लेकिन, आज टेक्नॉलोजी में एडवांसमेंट आने के कारण अब अपने लिसनर्स को अपने शो के साथ जोड़ना बेहद आसान हो गया है। इसके लिए आप आज टेक्नॉलोजी में आए एडवांसमेंट का फ़ायदा उठाते हुए अपने लिसनर्स को फ़ोन-इन प्रोग्राम्स और एस.एम.एस. के माध्यम से अपने प्रोग्राम के साथ जोड़ सकते हैं। ऐसा करने से ना केवल आप लिसनर्स का पार्टीसिपेशन ही बढ़ाते हैं; बल्कि, अपने शो की लोकप्रियता और लिसनरशिप को भी माप सकते हैं!

  • स्क्रिप्टिंग करते समय इंफ़ोटेंमेंट की थ्योरी का रखें ध्यान!

एक सफ़ल रेडियो जॉकी की पहचान और पूरे शो की जान उसकी स्क्रिप्ट पर ही टिकी होती है। आपकी एक स्क्रिप्ट ही आपके पूरे शो को हिट या फ़्लॉप कर सकती है। ऐसे में एक अच्छे और सफ़ल रेडियो-जॉकी के लिए सबसे अहम होता है कि उसकी स्क्रिप्ट इतनी दमदार हो कि वो लिसनर्स को पूरा शो सुनने पर मजबूर कर दे। क्योंकि, रेडियो आज सभी के मनोरंजन का साधन बन चुका है; इसलिए, एक अच्छे आर.जे. को चाहिए कि वो अपने शो को ज़्यादा-से-ज़्यादा इंफ़ॉर्मेटिव और एंटरटेनिंग बनाए, जिससे उसका शो किसी को भी बोरिंग ना लगे और वो हर एक लिसनर की ज़रूरत को पूरा कर सके!

  • कल्चर्ड-वॉइस है ज़रूरी!

एक अच्छे और सफ़ल आर.जे. के लिए कल्चर्ड-वॉइस सबसे महत्वपूर्ण होती है! यहाँ कल्चर्ड-वॉइस से मतलब यह है कि एक रेडियो-जॉकी की आवाज़ और उसके बोलने के ढंग में शालीनता हो! इसमें सबसे ज़रूरी यह होता है कि शब्दों का उच्चारण सही हो और जो शब्द आप बोल रहे हैं, उसको सिर्फ़ एक शब्द की तरह ही ना पढ़ें! बल्कि, पूरे अर्थ और भाव सहित पढ़ें; ताक़ि, आपके लिसनर्स को आपकी बात सही तरह से समझ में आ जाए।

  • ए.आई.आर. कोड है अनिवार्य!

देश के सभी रेडियो स्टेशंस और रेडियो चैनल्स के लिए प्रसार भारती द्वारा कुछ मानक कोड्स तैयार किए गए हैं। इन कोड्स को फ़ॉलो करना हर रेडियो चैनल के लिए आवश्यक है। इन कोड्स के द्वारा यह गाइडलाइंस दी गईं हैं कि प्रसारण के समय आपको क्या बोलना है और क्या नहीं! जैसे आप ऑन-एअर जाते समय किसी भी प्रकार की गाली का प्रयोग अथवा किसी भी व्यक्ति विषेष के बारे में कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं कर सकते!

  • क्रिएटिव प्रेज़ेंटशन है सफ़लता की कुँजी!

रेडियो पर सिर्फ़ आपकी आवाज़ ही सब कुछ नहीं होती! इसके साथ ही आपकी प्रेज़ेंटेशन भी उतनी ही मायने रखती है! तो, ऐसे में ध्यान रखें कि जितना आप अपने बोलने और कार्यक्रम को प्रस्तुत करने के ढंग में क्रिएटिविटी लाएँगे, उतना ही लिसनर्स आपके शो के साथ जुड़े रहेंगे।

  • कंटेंट अपना हो!

रेडियो फ़ील्ड में अपना एक अलग नाम और ख़ास पहचान बनाने का सबसे बड़ा मूल मंत्र है कि ऑन-एयर होने वाला सारा कंटेंट आपका अपना हो। इससे किसी के कंटेंट के कॉपी-राइट की समस्या नहीं आती है। साथ ही जब आपके पास अपना कंटेंट होगा; तो, ऑन-एयर जाते समय आपको किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं आएगी! क्योंकि, आपको पता होगा कि कहाँ पर आपने क्या लिखा है और उसे कैसे और किस टोन में बोलना है।

  • वॉइस-मॉड्यूलेशन है महत्वपूर्ण कला!

रेडियो की फ़ील्ड में एक अच्छे रेडियो जॉकी के लिए वॉइस-मॉड्यूलेशन एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदू है! यहाँ पर वॉइस-मॉड्यूलेशन से मतलब यह है कि आपको यह पता होना चाहिए कि अपनी स्क्रिप्ट में किस शब्द या वाक्य पर आपको कितना ज़ोर देना है और किस पर नहीं! वाक्य के मूड के अनुसार ही अपनी आवाज़ में जितनी ख़ूबसूरती से उतार-चढ़ाव लाएँगे, उतनी ही आपकी आवाज़ और कहने के ढंग में ख़ूबसूरती आएगी।

  • आपकी आवाज़ है जादू!

चूँकि रेडियो सिर्फ़ सुनने का ही माध्यम है, देखने का नहीं! तो, ऐसे में सिर्फ़ आपकी आवाज़ ही एक ऐसा माध्यम होती है, जिससे आप अपने लिसनर्स को अपने शो से बाँधकर रख सकते हैं। रेडियो पर एक आर.जे. के पास उसकी आवाज़ ही एक ऐसा सुनहरा माध्यम होती है, जिसका भरपूर प्रयोग करके वह अपने लिसनर्स को अपने शो के साथ बाँधकर रख सकता / सकती है। तो, ऐसे में एक आर.जे. के लिए सबसे ज़रूरी होता है कि उसकी आवाज़ में ऐसा जादू और ऐसी कशिश हो कि उसे सुनते ही लिसनर्स मंत्र-मुग्ध हो जाएँ और पूरा शो सुनने के लिए मजबूर हो जाएँ और उसके शो का बड़ी बे-सबरी से इंतेज़ार करें।

  • डिक्शन पर कमान्ड है ज़रूरी!

जब आप रेडियो पर ऑन-एअर जाते हैं; तो, उस समय आपको लाखों लोग सुन रहे होते हैं। तो, ऐसे में एक अच्छे आर.जे. को शब्दों का ज्ञान और उनके सही उच्चारण का ज्ञान होना अनिवार्य है! क्योंकि, एक छोटे-से नुक़्ते और हलंत से किसी भी शब्द का पूरा मतलब ही बदल जाता है। उदाहरणार्थः फ़ल का मतलब होता है जब आप कोई भी काम करते हैं; तो, उसके बदले में आपको मिलने वाला परिणाम, वहीं फल का मतलब होता है खाने वाला फल।

  • ऑन-एयर जाते समय फ़म्बल करने से बचें!

एक अच्छा आर.जे. बनने का सबसे पहला और महत्वपूर्ण उसूल यही होता है कि वो ऑन-एअर बोलते समय कहीं भी फ़म्बल यानि, अटके नहीं! क्योंकि, अगर बोलते समय आप कहीं भी अटकते हैं; तो, यह आपकी निगेटिविटी के रूप में कॉऊंट करता है, जो सीधा आपकी लिसनरशिप पर असर डालता है।

  • इसके लिए स्क्रिप्ट रखें साथ में!

एक अच्छा आर.जे. बनने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप जब भी ऑन-एअर जा रहे हों; तो, अपनी स्क्रिप्ट साथ ज़रूर लेकर जाएँ। जिससे अगर आप कोई भी शब्द भूल भी रहे हों; तो, फ़टाफ़ट अपनी स्क्रिप्ट में से देखकर बोल सकें! इससे आप ऑन-एअर जाते समय अटकेंगे नहीं!

  • लेंगुएज पर कमान्ड है ज़रूरी!

एक अच्छा आर.जे. बनने के लिए ज़रूरी है कि आप जिस भी भाषा में अपना प्रोग्राम दे रहे हैं, चाहे वो हिंदी, इंग्लिश, उर्दू या अन्य कोई भाषा हो। उस भाषा में आपकी मास्टरी हो; यानि, उस भाषा पर आपकी पकड़ अच्छी हो।

  • टेंशन मुक्त होकर करें अपना शो!

एक आर.जे. का जॉब बहुत ही मस्ती-भरा होता है! चूँकि, आपको अपने लिसनर्स का मन ख़ुश रखना होता है; तो, ऐसे में यह आपके लिए भी ज़रूरी है कि आप भी अपना शो करते समय उसे पूरा एंज्वॉय करें! क्योंकि, अगर आप टेंशन में रहकर अपना शो करेंगे; तो, आप अपने लिसनर्स को हँसा या उन्हें ख़ुश नहीं रख पाएँगे! एक अच्छे आर.जे. की यही पहचान होती है कि वह जॉली नेचर का होता है।

क्या कहना है रेडियो एक्सपर्ट का?

डॉ. शैलेन्द्र कुमार

पूर्व अपर महानिदेशक (एडमिनिस्ट्रेशन),

आकाशवाणी,

नई दिल्ली।

  • रेडियो की फ़ील्ड में युवाओं के लिए हैं सुनहरे अवसर!

आज रेडियो इंडस्ट्री में आए हुए बूम को देखते हुए अपनी आवाज़ को बुलंद करने की चाह रखने वालों के लिए कई सुनहरे विकल्प मौजूद हैं। इसके चलते आज के युवा वर्ग के लिए रेडियो इंडस्ट्री में भारी मात्रा में वैकेंसीज़ निकली जा रही हैं! लेकिन, रेडियो की फ़ील्ड में अपना कैरियर आगे बढ़ाने से पहले आपको उपर्युक्त सभी बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है।

साथ ही आकाशवाणी एक ऐसा माध्यम है, जहाँ से आप भी अपने रेडियो जॉकी बनने के सपनों को एक अच्छी उड़ान दे सकते हैं! आकाशवाणी के विभिन्न स्टेशनों द्वारा समय-समय पर उद्घोषकों और शो प्रेज़ेंटेर्स के लिए आवेदन प्राप्त किए जाते हैं। तो, आप भी सजग रहें और समय-समय पर आकाशवाणी के विभिन्न स्टेशनों के संपर्क में रहें और फ़ॉर्म भरकर अपने कैरियर को एक अच्छी और ऊँची उड़ान दे सकते हैं।

  • आर.जे. बनने के लिए क्या हो योग्यता?

अमूमन, आर.जे. बनाने के लिए किसी ख़ास कोर्स की ज़रुरत नहीं होती है! लेकिन, आपको कम-से-कम ग्रेजुएट होना तो, अनिवार्य है। इससे आपको रेडियो की फ़ील्ड में नौकरी करने में आसानी भी होगी और कोई भी शैक्षणिक अयोग्यता के कारण आपके जॉब पर किसी भी प्रकार की कोई समस्या भी नहीं आएगी।

  • आर.जे. का कोर्स करने में बरतें सावधानी!

मीडिया इंडस्ट्री में बूम आने पर रेडियो के प्रति बढ़ाते लोगों के रुझान को देखते हुए आज देश-भर में रेडियो जॉकी के कोर्स करवाने के लिए बड़े पैमाने पर इंस्टीट्यूट्स चल रहे हैं! और, ऐसे में रेडियो की फ़ील्ड में अपने कैरियर को बनाने की उत्सुकता को देखते हुए कई इंस्टीट्यूट्स छात्रों के साथ धोखाधड़ी भी कर रहे हैं।

तो, ऐसे में अगर आप भी ढूँढ रहे हैं वो एक इंस्टीट्यूट, जहाँ से कोर्स करके आप भी अपने नाम के आगे एक सफ़ल रेडियो जॉकी का टाइटल लगाना चाहते हैं; तो, ज़रूर ही आपके लिए भी सबसे पहले यह जाँच करना ज़रूरी है कि वह इंस्टीट्यूट रेडियो जॉकी के कोर्स करवाने के लिए सरकार से मान्यता प्राप्त है भी या नहीं! ऐसा करने से आप किसी भी प्रकार की होने वाली धोखाधड़ी से बच सकेंगे!

Tags: Radio Industry Career IndiaRadio Jockey CareerRJ कैसे बनेंVoice Modulation RJरेडियो जॉकी टिप्स
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