हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
आगरा, 23 फरवरी। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक संगठन है – केन्द्रीय हिन्दी संस्थान। इसमें अभी तक निदेशक हैं प्रो. सुनील बाबुराव कुलकर्णी। उन्हें अपने वर्तमान पद निदेशक को माननीय बनाने का शौक है। बीच-बीच में यह शौक गायब हो जाता है लेकिन फिर अचानक यह शौक बुखार बन चढ़ जाता है। इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर आगरा के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान में आज देखने को मिला।
मालवीय मिशन योजना के अंतर्गत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका आरंभ आज किया गया जो सात मार्च तक जारी रहेगा। इसमें बहु अनुशासनिक पुनश्चर्या पाठ्यक्रम और उच्च शिक्षा में आई सी टी अनुप्रयोग के बारे में ऑनलाइन जानकारी दी जाएगी।
उद्घाटन के अवसर पर आज एक बैनर जारी किया गया है जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे का नाम लिखा गया है। वे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् ( एआईसीटीई ) के अध्यक्ष हैं। उनके नाम या पदनाम के साथ माननीय नहीं लिखा गया है। इसी बैनर में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक को अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए दिखाया गया है। निदेशक हैं शिक्षा जगत के विवादास्पद निदेशक और शिक्षक प्रो. सुनील बाबुराव कुलकर्णी ! उनके पदनाम को माननीय निदेशक के रूप में बैनर में दर्शाया गया है। बैनर में अन्य नाम और पदनाम भी उल्लिखित हैं। लेकिन एकमात्र निदेशक ही इसमें माननीय हैं ! सवाल है कि मुख्य अतिथि और अन्य सभी क्या हैं ?
गौरतलब है कि श्री कुलकर्णी इन बातों के कारण और अपनी अन्य विशेषताओं के चलते लंबे समय से विवादास्पद अधिकारी बने हुए हैं। कभी उन्हें हटाने को लेकर और कभी किसी अन्य व्यक्ति को निदेशक पद पर नियुक्त करने को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। ताज़ा यूजीसी प्रकरण और उससे भी ताजा गलगोटिया विश्वविद्यालय प्रकरण के कारण केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का प्रकरण देश में दब गया था लेकिन ‘माननीय’ ने उसे फिर से आज चर्चा में ला दिया है।
यहां यह जानना भी जरूरी है कि भारत सरकार में सचिव से लेकर कैबिनेट सचिव तक भी खुद के लिए न माननीय लिखते हैं और न ही किसी अन्य से लिखवाते हैं। इधर केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक का पद भारत सरकार में संयुक्त सचिव से भी कनिष्ठ पद है। लेकिन इसके बावजूद शिक्षा जगत में सुनील बाबुराव कुलकर्णी खुद को या उनके इशारे पर संबंधित अधिकारी उन्हें जबरन माननीय बनाने पर तुले हुए हैं। यह विषय पीएच.डी. करने लायक है !







