हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
मुंगेर, 27 फरवरी। बिहार के पूर्वी क्षेत्र में स्थित मुंगेर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अराजकता चरम पर है। शिक्षकों का शोषण रोज नये विवाद को जन्म दे रहा है। अनुबंध पर काम करने वाले शिक्षकों की स्थिति दयनीय है। उनसे रिश्वत तो ली ही जा रही है, उनका शारीरिक और मानसिक शोषण भी किया जा रहा है। कुलपति और कुलसचिव की मिलीभगत से अजीबोगरीब आदेश जारी किये जा रहे हैं। ताजा मामला इतिहास की शिक्षिका डॉ. प्रीति कुमारी का है जो बेहद दिलचस्प है।

डॉ. प्रीति कुमारी ने जमुई स्थित के. के. एम. कॉलेज में अपने योगदान के दौरान शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में बिहार के राज्यपाल से भी शिकायत की गई है। जांच की सारी प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई और शिकायतकर्ता को ही जांच टीम ने दोषी बता कर उन्हें नौकरी से हटाने की कथित तौर पर सिफारिश कर दी।
इसी प्रकरण में एक दिलचस्प मोड़ यह आया है कि प्रशासन ने कथित रूप से संवेदना दिखाते हुए डॉ. प्रीति कुमारी को नौकरी से नहीं हटा कर के.एस.एस. कॉलेज, लखीसराय में स्थानांतरित कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर जब इस आदेश का सम्मान करते हुए डॉ. प्रीति कुमारी ने लखीसराय में ज्वाइन करने का प्रयास किया और शिक्षण कार्य आरंभ करना चाहा तो वहां के प्राचार्य ने मना कर दिया।
इस स्थिति में शिक्षिका की स्थिति त्रिशंकु जैसी हो गई है। वह न जमुई में काम कर पा रही हैं और न लखीसराय में। इस कारण होली से ठीक पहले उनकी सैलरी भी रोक दी गई है।

दूरभाष से संपर्क करने पर उक्त शिक्षिका ने इन सारे प्रकरण के लिए मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव और जांच अधिकारी को दोषी बताया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कुलपति और कुलसचिव तथा जांच अधिकारी मिल कर शोषण के आरोपियों को बचा रहे हैं और शिकायत करने का बदला लेते हुए शिकायतकर्ता को ही स्थानांतरित कर दंडित कर दिया गया है।
वहीं कागज पर जहां सहानुभूति दिखाई गई है, वहीं वास्तविक रूप में पीड़िता को ज्वाइन नहीं करा कर और उनकी सैलरी रोक कर उन्हें नये सिरे से आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है।
इस संबंध में जब संबंधित कुलपति और कुलसचिव कार्यालय से उनका पक्ष पूछा गया तो संबंधित लोगों ने मौन धारण कर लिया। वहीं पीड़िता ने कहा कि मुंगेर विश्वविद्यालय का प्रशासन उन्हें परेशान करने के लिए हर तरीके अपना रहा है और इसके लिए वहां के कुलपति और कुलसचिव मुख्य रूप से दोषी हैं। पीड़ित शिक्षिका ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उन्हें काम करने नहीं दिया गया और सैलरी रोक दी गई तो उनके लिए परिवार और स्वयं की जिम्मेदारी को उठाना मुश्किल हो जाएगा।













