अमित पांडे: संपादक
महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में एक ऐसा बदलाव हुआ है जिसने सत्ता समीकरणों को हिला दिया है। अजीत पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया और साथ ही उन्होंने एनसीपी (अजीत पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्षता भी संभाली। यह कदम न केवल महायुति को स्थिरता देता है बल्कि शरद पवार गुट को भी सीधी चुनौती देता है। सुनेत्रा पवार के उदय से एक राज्यसभा सीट खाली हुई है, और यही सीट अब महायुति और इंडिया गठबंधन के बीच राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गई है।
राज्यसभा की यह सीट महज एक संख्या नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन का प्रतीक है। अजीत पवार के समय यह सीट महायुति के पक्ष में गई थी, लेकिन अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में समीकरण थोड़े बदले हैं। महायुति के पास संख्याबल की बढ़त है, पर विपक्षी गठबंधन यदि रणनीतिक रूप से एकजुट रहा तो मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। महायुति (BJP, शिंदे गुट शिवसेना और अजीत पवार गुट NCP) के पास लगभग 170 से अधिक विधायक हैं, जबकि इंडिया गठबंधन (कांग्रेस, शिवसेना UBT और शरद पवार गुट NCP) के पास करीब 110 विधायक हैं। संख्याबल के लिहाज से महायुति को बढ़त है, लेकिन राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग की संभावना हमेशा रहती है। अतीत में कई बार ऐसा हुआ है कि विधायक पार्टी लाइन से हटकर वोट करते हैं और परिणाम अप्रत्याशित हो जाते हैं।
इस बार महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं। महायुति को भरोसा है कि वह इनमें से छह सीटें जीत लेगी, जबकि विपक्षी महा विकास आघाड़ी को केवल एक सीट मिलने की संभावना है। यही एक सीट अब कांग्रेस और शरद पवार गुट के बीच खींचतान का कारण बन गई है। विपक्षी खेमे की यह असहमति महायुति के लिए राहत का संकेत है।
महायुति की स्थिति मजबूत दिखती है। बीजेपी का संगठन बेहद सशक्त है और उसके पास संख्याबल की बढ़त है। शिंदे गुट शिवसेना और अजीत पवार गुट NCP महायुति को समर्थन दे रहे हैं। सुनेत्रा पवार का नया नेतृत्व महायुति को स्थिरता देता है और यह संदेश भी कि अजीत पवार की राजनीतिक विरासत सुरक्षित हाथों में है। लेकिन चुनौती यह है कि सहयोगी दलों में असंतोष न बढ़े और सभी एकजुट रहें।
दूसरी ओर इंडिया गठबंधन की स्थिति भी कम दिलचस्प नहीं है। कांग्रेस, शिवसेना UBT और शरद पवार गुट मिलकर विपक्षी एकजुटता का दावा कर रहे हैं। शरद पवार की सहानुभूति और कांग्रेस का अनुभव विपक्ष को ताकत देता है। लेकिन सीटों के बंटवारे और नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान है। यदि विपक्षी दल एकजुट रहे तो मुकाबला कड़ा हो सकता है और यह सीट उनके लिए मनोबल बढ़ाने का मंच बन सकती है।
विशेषज्ञों की राय भी इसी दिशा में इशारा करती है। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सुनेत्रा पवार का उदय शरद पवार गुट को कमजोर करता है और महायुति को मजबूती देता है। वहीं पीटीसी न्यूज़ ने इसे “सुनेत्रा का पावर सेंटर बनना” बताया है, जो महायुति के लिए लाभकारी है लेकिन गठबंधन प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों में संख्याबल निर्णायक होता है, लेकिन क्रॉस वोटिंग और गठबंधन की एकजुटता परिणाम बदल सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी NDA का संख्याबल लगातार बढ़ रहा है। 2026 के चुनावों के बाद NDA का आंकड़ा 130 से ऊपर पहुँचने का अनुमान है, जबकि INDIA गठबंधन का संख्याबल घटने की संभावना है। महाराष्ट्र की सात सीटों में से छह पर NDA की जीत इस प्रवृत्ति को और मजबूत करेगी।
पोस्ट-इलेक्शन मैनेजमेंट भी इस चुनावी जंग का अहम हिस्सा होगा। महायुति का लक्ष्य है कि इस सीट को बरकरार रखा जाए ताकि NDA की राज्यसभा में ताकत बनी रहे। इंडिया गठबंधन का लक्ष्य है कि इस सीट को जीतकर संदेश दिया जाए कि विपक्ष अब भी मजबूत है। यदि महायुति जीतती है तो यह सुनेत्रा पवार के नेतृत्व की पहली बड़ी सफलता होगी और उनके राजनीतिक भविष्य को मजबूती मिलेगी। यदि इंडिया गठबंधन जीतता है तो यह विपक्षी एकजुटता का प्रतीक होगा और महायुति के लिए चेतावनी।
इस चुनावी जंग का नतीजा केवल एक सीट का नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति कितनी मजबूत है और इंडिया गठबंधन कितना संगठित। सुनेत्रा पवार का उदय इस पूरी कहानी का केंद्र है। उनकी मौजूदगी महायुति को स्थिरता देती है, लेकिन गठबंधन प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ाती है। राज्यसभा की खाली सीट पर महायुति का संख्याबल उन्हें बढ़त देता है, पर इंडिया गठबंधन यदि रणनीतिक रूप से एकजुट रहा तो यह सीट उनके लिए भी संभावित जीत का मंच बन सकती है।
महाराष्ट्र की राजनीति में यह जंग केवल संख्याओं की नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व, रणनीति और गठबंधन प्रबंधन की परीक्षा भी है। सुनेत्रा पवार का उदय इस परीक्षा का सबसे अहम हिस्सा है और आने वाले समय में यह तय करेगा कि महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।








