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टीमवर्क का संदेश और सत्ता की जवाबदेही: विपक्ष की लड़ाई का नया स्वरूप

News Desk by News Desk
February 28, 2026
in संपादकीय
टीमवर्क का संदेश और सत्ता की जवाबदेही: विपक्ष की लड़ाई का नया स्वरूप
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अमित पांडे: संपादक

लोकतंत्र की असली ताक़त जनता की आवाज़ होती है, और जब यह आवाज़ दबाई जाती है तो उसका प्रतिरोध ही इतिहास रचता है। पंजाब की रैली में राहुल गांधी का स्वर केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि यह उस बेचैनी का प्रतिबिंब था जो किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के दिलों में पल रही है। उनका संदेश था कि या तो हम सब मिलकर खड़े हों, या फिर घर बैठ जाएँ। यह चेतावनी गुटबाज़ी से जूझ रही कांग्रेस के लिए थी, लेकिन असल में यह पूरे देश के लिए थी—एक पुकार कि सत्ता से सवाल पूछना ही लोकतंत्र की असली जिम्मेदारी है।

रैली में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मनरेगा को खत्म करने की कोशिशों को गरीबों के खिलाफ बताया और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को किसानों और छोटे उद्योगों के लिए विनाशकारी करार दिया। उनका कहना था कि भारत ने हर साल नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी सामान खरीदने का वादा किया है, और जब सोयाबीन, कपास, दालें और फल अमेरिकी बाजार से भारत में आएंगे तो छोटे किसानों और एमएसएमई पर तूफ़ान टूट पड़ेगा। यह चेतावनी केवल आर्थिक नहीं थी, बल्कि यह किसानों और मजदूरों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता का इज़हार था।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। हाल ही में जब एआई समिट के विरोध में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया, तब उन्होंने साफ कहा कि हम किसी से डरेंगे नहीं और न ही पीछे हटेंगे। यह बयान कांग्रेस के भीतर भी सबको पसंद नहीं आया, लेकिन राहुल ने परवाह नहीं की। आलोचकों का कहना था कि इस तरह के आंदोलन सरकार को अपनी विफलताओं पर बात करने से बचा लेते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार कभी अपनी विफलताओं पर बात करती है?

यह वही सरकार है जिसने काले धन की वापसी को ‘जुमला’ कहा। यह वही सरकार है जिसने नोटबंदी पर कभी कोई ठोस जवाब नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने खुद कहा था कि कुछ समय दीजिए, अगर लाभ नहीं मिला तो मैं परिणाम भुगतने को तैयार हूँ। लेकिन आज तक किसी ने यह नहीं सुना कि नोटबंदी से क्या लाभ हुआ। यही वजह है कि विपक्ष का रुख साफ है—सरकार से जवाब मांगना और जनता के सवालों को सामने रखना।

राहुल गांधी का यह रुख विपक्ष की रणनीति को स्पष्ट करता है। वह जानते हैं कि लड़ाई केवल संसद में भाषण देने से नहीं जीती जाएगी। यह लड़ाई किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और युवाओं के साथ खड़े होकर लड़ी जाएगी। विपक्ष का मकसद यह है कि जो लोग सत्ता में हैं, उनसे पूछा जाए कि उन्होंने जनता से किए वादों का क्या किया।
सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो यह साफ है कि उन्होंने कभी अपनी नीतियों की असफलताओं पर खुलकर बात नहीं की। चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी का झटका हो, कृषि कानूनों का विरोध हो या बेरोजगारी का संकट—हर बार सरकार ने सवालों से बचने की कोशिश की। यही कारण है कि विपक्ष अब यह तय कर चुका है कि वह सरकार को सवालों से भागने नहीं देगा।

ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो विपक्ष की भूमिका हमेशा से यही रही है कि वह सत्ता को जवाबदेह बनाए। 1970 के दशक में जब इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लगाया था, तब विपक्ष ने जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। 1980 और 1990 के दशक में भी विपक्ष ने भ्रष्टाचार और घोटालों पर सरकार को घेरा। बोफोर्स घोटाले से लेकर 2G स्पेक्ट्रम तक, विपक्ष ने बार-बार यह साबित किया कि लोकतंत्र में सत्ता को सवालों का सामना करना ही पड़ता है।

आज राहुल गांधी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि विपक्ष का काम केवल सत्ता पर हमला करना नहीं है, बल्कि जनता की आवाज़ को बुलंद करना है। यही वजह है कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं को भी चेतावनी दी कि टीमवर्क के बिना यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती।

इस पूरे परिदृश्य में विपक्ष की लड़ाई केवल सत्ता पाने की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की है। जब सरकार सवालों से भागती है, जब जनता की आवाज़ दबाई जाती है, तब विपक्ष का कर्तव्य है कि वह खड़ा हो। राहुल गांधी ने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है और साफ कर दिया है कि डरना या पीछे हटना विकल्प नहीं है।

यह लड़ाई लंबी है और कठिन भी। लेकिन विपक्ष का रुख अब स्पष्ट है—जो साथ चलना चाहते हैं, उनका स्वागत है, और जो नहीं चल सकते, उन्हें किनारे कर दिया जाएगा। यह राजनीति का नया स्वरूप है, जहाँ सत्ता की जवाबदेही तय करना ही असली मकसद है।

लोकतंत्र की इस लड़ाई में विपक्ष का स्वर जनता की उम्मीदों का स्वर है। यह वही स्वर है जो कहता है कि सत्ता से सवाल पूछना ही नागरिक का धर्म है। राहुल गांधी का संदेश केवल कांग्रेस के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है—कि डरना नहीं है, पीछे हटना नहीं है, और सवाल पूछना ही लोकतंत्र की असली ताक़त है। यही वह रास्ता है जो जनता को सशक्त करेगा और सत्ता को जवाबदेह बनाएगा।

Tags: India US Trade Deal ImpactMGNREGA DebateNarendra Modi CriticismOpposition Strategy 2026Political Analysis HindiRahul Gandhi Speech Punjab
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