देशभर में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकले ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की 28 राज्यों में यात्रा का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समापन हुआ। पिछले एक महीने में इस रथ ने 6,79,077 किलोमीटर की यात्रा कर 28 राज्यों, 439 जिलों और 66,344 गांवों से होते हुए कुल 5,22,68,033 लोगों तक बाल विवाह मुक्त भारत का संदेश पहुंचाया। बाल विवाह के खिलाफ भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने देशभर में 500 से अधिक बाल विवाह मुक्ति रथ सड़कों पर उतारे। इन रथों ने देश के कोने-कोने में जाकर बाल विवाह से जुड़े कानूनों और खास तौर से लड़कियों पर इसके दुष्प्रभावों के बारे में जनसमुदाय को जागरूक किया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 439 जिलों में जमीन पर काम कर रहे हैं।
पहियों पर चले इस अनूठे अभियान को देशभर में अभूतपूर्व समर्थन मिला। जाति, धर्म और विचारधारा के बंधन को तोड़ते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, महिला भुक्तभोगियों, नागरिक समाज संगठनों, पुलिस और धर्मगुरुओं ने एकजुट होकर बाल विवाह के खात्मे के सामूहिक संकल्प को दोहराया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019–21 के दौरान देश में बाल विवाह की दर 23.3 प्रतिशत रही। इसका मतलब कि लगभग हर चौथी लड़की 18 वर्ष की होने से पहले ही ब्याह दी जाती है। एक महीने की इस यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ ने 66,344 गांवों में पहुंचकर कुल 2,75,622 जागरूकता कार्यक्रम किए और 43,984 धर्मगुरुओं को इस अभियान से जोड़ा।
देश के विभिन्न राज्यों में इन रथों को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सांसद, जिलाधिकारी और कई राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने-अपने राज्यों में बाल विवाह मुक्ति रथ को रवाना किया। राज्यों के 49 मंत्रियों, 82 सांसदों और 154 विधायकों के अलावा 99 जिलाधिकारियों ने विभिन्न जिलों में इस रथ को रवाना किया।
अभियान की सफलता और भारत के बाल विवाह के खिलाफ दृढ़ संकल्प के बाबत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सीनियर एडवाइजर (पॉलिसी) ज्योति माथुर ने कहा, “यह रथ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय का वाहक है। यह जनसमुदाय तक कानून, संरक्षण और जवाबदेही का संदेश लेकर जाता है, ताकि सरकार की मंशा जमीन पर वास्तविक सुरक्षा में तब्दील हो सके। इस अभियान में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर शिक्षाविदों और महिला भुक्तभोगियों तक सभी ने उत्साह से भागीदारी की। खास तौर पर जमीनी स्तर के महिला नेतृत्व का अग्रिम मोर्चे से इस संदेश को आगे ले जाते देखना बेहद प्रेरक रहा। ऐसी व्यापक भागीदारी और तात्कालिकता के साथ हमें विश्वास है कि भारत 2030 की वैश्विक समयसीमा से पहले ही बाल विवाह जैसे अपराध से मुक्त हो जाएगा।”
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, “हमारा हौसला बढ़ाने वाली बात यह है कि दुनिया अब उसे स्वीकार कर रही है जो हम एक दशक से कह रहे हैं कि बाल विवाह दरअसल हमारे बच्चों से बलात्कार है और इसे उसी रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।”
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अपने सहयोगी संगठनों, स्थानीय प्रशासन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं व बाल विवाह में सेवाएं प्रदान करने वाले बैंड बाजा, घोड़ी, सजावट, डीजे व व खाना बनाने वाले कैटर्रस के समन्वित प्रयासों से पिछले एक वर्ष में ही देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रुकवाए हैं। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन अभियान को सफल बनाने के लिए जेआरसी ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ यात्रा की शुरुआत की थी।
पोस्टरों, प्रभावशाली नारों, लाउडस्पीकर और बाल विवाह के खिलाफ शपथ के लिए बोर्ड से सुसज्जित यह रथ उन दूरदराज और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक पहुंचने के लिए तैयार किया गया था। जहां बेहतर सड़कों वाले इलाकों में चार पहिया वाहनों के माध्यम से यह अभियान पहुंचा, वहीं दूरदराज के गांवों तक मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया गया। इस यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ ने पंचायतों, जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों और प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर जनता को जागरूक किया और बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई। अभियान के तहत स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक व ऐतिहासिक से होते हुए 2,75,622 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें रैलियां, नुक्कड़ नाटक, शपथ समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल विवाह पीड़ितों की कहानियां शामिल थीं। पूरे अभियान के दौरान 27,767 धार्मिक स्थलों और 39,221 स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य संस्थानों तक बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश पहुंचाया गया।









