दिनांक: 18–19 मार्च 2026: पटना में आज सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, पर्यावरणीय लेखांकन एवं जेंडर सांख्यिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की क्षमता निर्माण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार द्वारा तथा योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) का तकनीकी सहयोग प्राप्त है।
यह कार्यशाला बिहार में पहली बार आयोजित की जा रही है, जो राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के लगभग 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिससे राज्यों के बीच ज्ञान साझेदारी, अनुभवों के आदान-प्रदान तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य SDG मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना, इंडिकेटर-आधारित प्रगति की प्रभावी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना तथा राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता को सशक्त बनाना है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से डेटा गैप्स की पहचान, डेटा गुणवत्ता में सुधार, तथा प्रशासनिक एवं सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों के एकीकरण पर बल दिया जा रहा है, ताकि नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय एवं अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके।
साथ ही, कार्यशाला में SDG लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, जिसके तहत सतत विकास लक्ष्यों को राज्य, जिला एवं स्थानीय स्तर की योजनाओं के साथ समन्वित किया जा रहा है, ताकि विकास अधिक लक्षित, समावेशी एवं क्षेत्र-विशिष्ट हो सके।
कार्यक्रम में पर्यावरणीय लेखांकन (Green/Natural Resource Accounting) को भी प्रमुखता दी जा रही है, जिसके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, संरक्षण एवं पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में, जेंडर सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया, ताकि महिलाओं एवं पुरुषों के बीच असमानताओं को डेटा के माध्यम से बेहतर समझकर लैंगिक-संवेदनशील एवं समावेशी नीतियों का निर्माण किया जा सके।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में निम्नलिखित गणमान्य अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए:
माननीय मंत्री, योजना एवं विकास विभाग, बिहार – श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव
सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सटीक, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आंकड़े अत्यंत आवश्यक हैं। यह कार्यशाला डेटा-आधारित शासन को सुदृढ़ करने तथा नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”
मुख्य सचिव, बिहार – श्री प्रत्यय अमृत
“गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रभावी नीतियों की आधारशिला है। SDGs के ‘Leave No One Behind’ सिद्धांत को साकार करने के लिए आवश्यक है कि हम अपने डेटा तंत्र को मजबूत करते हुए विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं।”
सचिव, MoSPI, भारत सरकार – डॉ. सौरभ गर्ग
“SDG इंडिकेटर्स की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली, डेटा गुणवत्ता में सुधार तथा राज्यों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यशाला इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”
अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार – डॉ. एन. विजयलक्ष्मी
“बिहार में SDG लोकलाइजेशन को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तर तक निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है। डेटा गैप्स की पहचान, जेंडर-संवेदनशील आंकड़ों का विकास तथा पर्यावरणीय लेखांकन को नीति निर्माण में शामिल करना हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।”
महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी), MoSPI – श्री एन.के. संतोषी
“सांख्यिकी नीति निर्माण की रीढ़ है। SDG संकेतकों की सटीक ट्रैकिंग के लिए राज्यों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।”
रेजिडेंट प्रतिनिधि, UNDP, भारत – डॉ. एंजेला लुसिगी
सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘डेटा, साझेदारी और नवाचार’ का समन्वय आवश्यक है। पर्यावरणीय लेखांकन और जेंडर सांख्यिकी जैसे क्षेत्रों में सुदृढ़ डेटा तंत्र से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि विकास समावेशी और न्यायसंगत हो। UNDP इस दिशा में निरंतर सहयोग प्रदान करता रहेगा।”
इसके अतिरिक्त, श्री एस.सी. मलिक (अपर महानिदेशक, सामाजिक सांख्यिकी, MoSPI) ने SDG इंडिकेटर फ्रेमवर्क, डेटा वैलिडेशन एवं रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में SDG इंडिकेटर ट्रैकिंग, डेटा गुणवत्ता सुधार, पर्यावरणीय लेखांकन, जेंडर सांख्यिकी तथा राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।
इस अवसर पर MoSPI तथा योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार की विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।
यह कार्यशाला न केवल राज्यों के बीच सहयोग एवं ज्ञान-साझेदारी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भारत में SDG लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। साथ ही, यह बिहार में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला राज्य की बढ़ती संस्थागत क्षमता एवं डेटा-आधारित शासन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।












