Inspiring Story: अक्सर लोग समाज सेवा के लिए बड़े एनजीओ (NGO) या सरकारी फंड्स का इंतजार करते हैं, लेकिन गौरव राय ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। अपनी सैलरी, दोस्तों, परिवार और सोशल मीडिया की ताकत के दम पर गौरव आज समाज के निचले तबके के लिए एक बड़ी उम्मीद बन चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है और पाने की अब कोई अभिलाषा नहीं बची है। बिना किसी स्वार्थ और राजनीतिक इच्छा के वे हर दिन जरूरतमंदों के काम आ रहे हैं जिससे उन्हें सुकून की नींद आती है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बच्चों को सशक्त करने का मिशन
गौरव राय का सबसे बड़ा फोकस वुमन एम्पावरमेंट और गरीब बच्चों की शिक्षा पर है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया नेटवर्क को संगठित करके अब तक 265 सिलाई मशीनें जरूरतमंद महिलाओं को दी हैं ताकि वे स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इसके अलावा सिलाई मशीनें, सैनिटरी वेंडिंग मशीनें और साइकिलें मिलाकर करीब 750 यूनिट्स का वितरण किया जा चुका है। गरीब बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए उन्होंने 634 स्कूल बैग, 12,087 जोड़ी जूते-चप्पल, 106 विद्यालयों में खेल का सामान, 2250 कॉपियां और 63 बच्चों को घड़ियां बांटी हैं। यह पूरा क्राउडफंडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन बिना किसी रजिस्टर्ड संस्था या एनजीओ के सिर्फ आपसी विश्वास पर किया गया है।
‘जिंदगी के सिर्फ 5 ओवर बचे हैं, अंतिम यात्रा के लिए रखे 60 हजार’
इस पूरी जर्नी में गौरव का जीवन दर्शन बेहद भावुक और प्रेरित करने वाला है। वे अपनी जिंदगी को साठ साल की मानकर चलते हैं और उनका कहना है कि अब उनके जीवन के सिर्फ ‘पांच ओवर’ का खेल बाकी है। इसके बाद जो भी मिलेगा वह उनके लिए बोनस होगा। अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा समाज को दान करने वाले गौरव ने अपने बैंक अकाउंट में सिर्फ साठ हजार रुपये बचाकर रखे हैं। यह रकम उन्होंने अपनी अंतिम यात्रा के लिए सुरक्षित की है ताकि उनके जाने के बाद परिवार को किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके अच्छे कर्मों के कारण अंतिम समय में चार लोग उनका साथ जरूर देंगे।
सोशल मीडिया का पॉजिटिव इस्तेमाल और समाज के लिए संदेश
गौरव राय मानते हैं कि वे कोई अकेले इंसान नहीं हैं जो ऐसा कर रहे हैं, समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं जो मदद करना चाहते हैं। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि ऐसे लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से एक प्लेटफॉर्म पर संगठित किया जाए। वे अपनी इस पूरी उपलब्धि का क्रेडिट अपनी टीम और सोशल मीडिया कम्युनिटी को देते हैं जो उनकी असली शक्ति हैं। उनका यह निस्वार्थ सेवा भाव साबित करता है कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो किसी भी बड़े बैनर या एनजीओ के बिना भी समाज में एक बड़ा इम्पैक्ट क्रिएट किया जा सकता है।






