विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की वार्षिक साधारण सभा 2026 का उद्घाटन सत्र 3 अप्रैल 2026 को दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ संपन्न हुआ। इस सत्र में सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ डॉ. कृष्ण गोपाल जी का सन्निध्य विशेष रूप से प्राप्त हुआ। उनके साथ अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री रविंद्र कान्हेरे जी, महामंत्री श्री देशराज जी, संगठन मंत्री श्री गोविंद जी महंत, कोषाध्यक्ष रोहित वासवानी जी मंचासीन रहे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि विद्या भारती एक सशक्त शैक्षिक संगठन के रूप में निरंतर अपनी भूमिका का विस्तार कर रही है, जिसकी आधारभूमि राष्ट्रबोध एवं आध्यात्मिक दृष्टि है। उन्होंने ‘एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’ के सिद्धांत को भारत की सांस्कृतिक शक्ति बताते हुए विविधता में एकता के भाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति समर्पण, आध्यात्मिक मूल्यों की स्थापना तथा जीवन के प्रति समग्र दृष्टिकोण विकसित करना है। विद्या भारती का कार्य इसी समन्वय को स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने शिक्षा के तीन प्रमुख आयामों—राष्ट्रबोध, आध्यात्मिक मूल तत्वों की समझ तथा मूल्यनिष्ठ विद्यार्थियों के निर्माण—पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती स्वार्थपरता एवं भोगवादी प्रवृत्तियों के कारण समाज में असहिष्णुता की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसका समाधान राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता के समन्वय में निहित है।
आधुनिक तकनीकी परिवेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव पर विचार रखते हुए कहा कि तकनीक उपयोगी है, परंतु यह मानवीय संवेदनाओं, सृजनशीलता और संस्कारों का स्थान नहीं ले सकती। अतः शिक्षा में मानवीय मूल्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को लौकिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि प्रदान करना आवश्यक है, जिससे वह उद्देश्यपूर्ण एवं मूल्यनिष्ठ जीवन जी सके। डॉ. हेडगेवार के मूल विचारों का विस्तारित स्वरूप ही विद्या भारती का कार्य है, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उद्घाटन सत्र में दिवंगत प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा आगामी वर्ष की योजनाओं के निर्माण हेतु चार दिवसीय चिंतन की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
इस सत्र में डॉ. मधु सावजी, साधना भंडारी जी, राजश्री वैद्य जी तथा अवनीश भटनागर जी के सान्निध्य में “सप्तशक्ति संगम” विषय पर आधारित स्मारिका का गरिमामय विमोचन भी संपन्न हुआ।










