- संसद में ब्रिटिश गृह मंत्री ने सिखों के धार्मिक ककार के रूप में कृपाण धारण करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग को पूरी तरह खारिज किया
चंडीगढ़, 4 जून 2026 : विक्रम सिंह दिगवा द्वारा हेनरी नोवाक की हत्या किए जाने के मामले के बाद ब्रिटेन के सिख सांसदों ने निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में हुई बहस के दौरान सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता तथा उनके धार्मिक ककारों की रक्षा के पक्ष में मजबूती से अपनी बात रखी। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल देते हुए कुछ कट्टर दक्षिणपंथी संगठनों ने सिखों द्वारा धारण किए जाने वाले धार्मिक ककार ‘कृपाण’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई जबकि इस अपराध में वास्तव में कृपाण का प्रयोग हुआ ही नहीं था। हत्या में प्रयुक्त हथियार ‘पेश-कब्ज़’ था जो इंडो-फ़ारसी शैली का एक घातक चाकू है जिसे सुरक्षा कवच को भेदने के उद्देश्य से बनाया जाता है।
उल्लेखनीय है कि यह बहस उस समय हुई जब 23 वर्षीय विक्रम दिगवा को 18 वर्षीय छात्र हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या करने का दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी तथा अन्य सिख सांसदों ने इस बहस के दौरान हस्तक्षेप करते हुए रिफॉर्म यूके और रिस्टोर ब्रिटेन पार्टियों की सीधे तौर पर आलोचना की। ढेसी ने कहा कि ये दोनों पार्टियां एक हिंसक अपराधी की हरकत के आधार पर पूरे सिख जगत को बलि का बकरा बना रही हैं और बिना किसी आधार के दोषी ठहरा रही हैं।
ढेसी ने सदन को याद दिलाया कि दोनों विश्व युद्धों के दौरान लाखों सिख सैनिकों ने ब्रिटिश सेना के साथ मिलकर वीरता से युद्ध लड़े थे तथा वे अपनी पगड़ी और कृपाण धारण करके युद्धभूमि में उतरे थे। उन्होंने गृह मंत्री शबाना महमूद से सिखों को यह आश्वासन देने की अपील की कि वे अपनी आस्था का स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से पालन कर सकेंगे।
ढेसी ने कहा कि ऐसी गलत कार्रवाई को किसी भी प्रकार धार्मिक आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता और इस विचार से पूरा सिख जगत सहमत है। हाउस ऑफ कॉमन्स को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शबाना महमूद ने स्वीकार किया कि कुछ कट्टर दक्षिणपंथी समूहों ने सिखों द्वारा कृपाण धारण करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कृपाण को “सिख धर्म के पाँच पवित्र ककारों में से एक” बताया।
गृह मंत्री ने वर्ष 2019 के ‘ऑफेंसिव वेपन्स एक्ट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून ने लंबी कृपाण से संबंधित पहले से उपलब्ध कानूनी सुरक्षा को स्पष्ट और अधिक मजबूत बनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार किसी एक व्यक्ति के अपराध के लिए पूरे सिखों को दंडित करने के पक्ष में नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा, “हम इस देश में सामूहिक दंड की अवधारणा में बिल्कुल विश्वास नहीं रखते। इसके बजाय हम इस भयावह और दुष्टतापूर्ण घटना के विरुद्ध एकजुट हैं। हम इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले की निंदा करते हैं, न कि उन सभी लोगों की जो उसके धर्म या नस्ली पृष्ठभूमि से जुड़े हैं।”
महमूद ने यह भी कहा कि इस हत्या की घटना का उपयोग समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि किसी एक व्यक्ति के घृणित अपराध के लिए पूरे सिख जगत को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
इस बहस ने ब्रिटेन तथा विश्वभर में सिख क़ौम का व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। धार्मिक एवं सामुदायिक नेताओं ने एक स्वर में न केवल इस हत्या की निंदा की है बल्कि उन राजनीतिक प्रयासों की भी कड़ी आलोचना की है जिनके माध्यम से सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा पर प्रतिबंध लगाने का आधार तैयार करने की अनुचित कोशिश की जा रही है।








