हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 21फरवरी। छह दिवसीय इंडिया ए. आई. इम्पैक्ट सम्मिट – 2026 आज यहां प्रगति मैदान में कैरियर एवं प्रगति के अनेक रास्ते दिखाते हुए सम्पन्न हो गया। ए. आई. एक्स्पो में अंतिम दिन विशेष रूप से युवाओं का दबदबा रहा। साथ ही बहुत सारे स्टॉल और मंडप आज सुबह से ही खाली होते दिखाई दिये। अप्रत्याशित रूप से एक्स्पो की अवधि एक दिन बढ़ जाने के कारण ए. आई. उद्यमियों को लाभ कम, नुकसान अधिक उठाना पड़ा। यहां तक कि राज्यों के सरकारी मंडप में भी गतिविधि आज कम दिखाई दी।

16 फरवरी से आरंभ ए. आई. एक्स्पो पहले पांच दिन का आयोजन था और शुक्रवार 20 फरवरी को खत्म होना था लेकिन अब छठे दिन के साथ यह शनिवार, 21 फरवरी को समाप्त हुआ।
अंतिम दिन दिल्ली और आस-पास से आये विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों ने एक्स्पो में ए. आई. के विभिन्न आयामों की खोज की। गाजियाबाद स्थित राजकुमार गोयल प्रोद्योगिकी संस्थान और दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन महाविद्यालय एवं कालिंदी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने एक्स्पो का भरपूर सदुपयोग किया। बी.टेक. छात्रा प्रज्ञा गुप्ता ने हॉल एक से पांच तक में मेकाट्रानिक्स से संबंधित ए. आई. की खोज की जबकि उनके दो साथियों
ने हॉल छह में ए. आई. गतिविधियों का अवलोकन किया। वहीं राजस्थान की दीप्ति सोनी और झारखंड की सिमरन कुमारी ने ए. आई. में नये कैरियर की जानकारी ली। लेकिन एच. आर. में विशेष जानकारी लेने आईं खुशी को अपेक्षित जानकारी नहीं मिल पायी। हालांकि उन्होंने एक्स्पो को बेहद उपयोगी बताया।

देश – विदेश की नामी कंपनियों और अनेक नये स्टार्ट अप की प्रदर्शनी में आम दर्शकों के लिए भी बहुत कुछ दिलचस्प रहा। विशेष कर गड्ढों को ढूंढने और उसकी मरम्मत करने और रियलिटी सेक्टर में ए. आई. के प्रयोग की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया।
आज जो दर्शक आये थे, वे गूगल, लिंक्डइन, टाटा, टेक महेंद्रा, जियो जैसे एक दर्जन मंडप में विशेष रुचि लेते हुए दिखाई दिये।

प्रदर्शकों में से अनेक ने सिर्फ दूसरे दिन के आयोजन और व्यवस्था को अच्छा बताया। कुछ ने बताया कि वास्तव में सारा जोश सिर्फ तीन दिन तक रहा और उसके बाद सब कुछ औपचारिक रह गया। गलगोटिया विश्वविद्यालय के चीनी रोबोट कांड ने सम्मेलन और प्रदर्शनी का सारा मजा किरकिरा कर दिया। दिलचस्प तथ्य यह है कि आज अंतिम दिन भी गलगोटिया विश्वविद्यालय का मंडप और उसका नाम हटाया नहीं गया था ! उसे देख कर उस कांड की याद बार – बार आ रही थी। इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक नियंत्रण की असफलता ने भी दिल्ली में व्यवस्था की पोल खोल दी।








