हरेन्द्र प्रताप की खोजी रपट
नई दिल्ली, 8 जनवरी। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक सरकारी पुस्तक प्रकाशित की है जिसमें सबसे पीछे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ओर से भारतीय महिला टीम द्वारा आई सी सी महिला विश्व कप जीतने की चर्चा की गई है। इसमें सबसे अंत में प्रधानमंत्री की ओर से लिखा गया है कि हमारी महिला खिलाडियों ने कबड्डी वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास ही रच दिया। हिन्दी में लिखे गए इस संक्षिप्त वक्तव्य में सिर्फ यही दो वाक्य देवनागरी लिपि में हैं। इनके बीच के वाक्यों में देवनागरी लिपि और रोमन लिपि को मिला कर भाषा की ऐसी खिचड़ी पकाई गई है जिसकी अनुमति भारत का संविधान नहीं देता है !
भारत का संविधान इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है कि राजभाषा हिन्दी की लिपि देवनागरी लिपि है। मतलब यह कि राजभाषा हिन्दी रोमन लिपि में नहीं लिखी जा सकती है। फिर जानबूझकर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से नौकरशाही ने ऐसी चूक क्यों कराई ? यह चूक संविधान विरोधी है।

इस मुद्रित वक्तव्य को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है कि संभवतः प्रधानमंत्री ने स्वयं ऐसा नहीं लिखा होगा। यदि वे स्वयं लिखते तो हिन्दी के बीच रोमन लिपि का प्रयोग कभी नहीं करते क्योंकि उन्हें भारत की संस्कृति और सभ्यता की चिंता बाकी लोगों से अधिक है और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर भी वे बेहद सजग हैं।
इस प्रकाशन को देख कर ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री ने किसी अवसर पर ऐसा कहा होगा। बोलते समय हिन्दी कभी – कभी हिंग्लिश हो जाती है और उन्होंने एक्शन जैसे अंग्रेजी के दो – चार शब्दों का प्रयोग अपने हिन्दी वक्तव्य में किया होगा। लेकिन वाचिक शब्दों को लिखित में देवनागरी हिन्दी या देवनागरी अंग्रेजी में न लिखकर अथवा उसे हिन्दी में न अनूदित कर देवनागरी लिपि के बीच में प्रधानमंत्री की ओर से रोमन लिपि का जबरन प्रयोग करा देना प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है और इससे राजभाषा की छवि भी धूमिल हुई है।
इस मामले में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मनमाने ढंग से की गई औपबंधिक नियुक्तियां, स्थाई अधिकारियों पर बढ़ते काम का दबाव, प्रकाशन के कार्यों में लापरवाही तथा निपुण लोगों को दरकिनार किया जाना इन सबके लिए जिम्मेदार हैं।
यह बड़ी गलती सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों से हुई है। भाषा के मामले में गृह मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अधिक सजग कहलाते हैं। उनसे हुई ऐसी किसी चूक की नकल अन्य मंत्रालयों द्वारा की जा सकती है। इस संबंध में विस्तृत खोजबीन जारी है।













