रायपुर/जशपुर: छत्तीसगढ़ को बाल विवाह से मुक्त बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को जशपुर से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाई। यह रथ मुख्यमंत्री के गृह ज़िले जशपुर से राज्यभर की यात्रा पर निकलेगा और 8 मार्च (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) तक गांव-गांव जाकर बाल विवाह के ख़िलाफ़ जागरूकता फैलाएगा।
यह पहल Just Rights for Children (JRC) की है और भारत सरकार के 100-दिवसीय गहन राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश से बाल विवाह का पूरी तरह ख़ात्मा करना है। JRC देश के सबसे बड़े बाल अधिकार नेटवर्क्स में से एक है, जिसके साथ 250 से अधिक एनजीओ 450 से ज़्यादा ज़िलों में काम कर रहे हैं।
गांव-गांव पहुंचेगा संदेश
‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को जागरूकता संदेशों, नारों, लाउडस्पीकर और शपथ-पट्टिका से सजाया गया है। बेहतर सड़कों वाले इलाक़ों में चारपहिया वाहनों से यात्रा होगी, जबकि दूर-दराज़ और कम कनेक्टिविटी वाले गांवों तक बाइक और साइकिल कारवां के ज़रिए पहुंचा जाएगा।
इस रथ यात्रा का आयोजन JRC की जशपुर सहयोगी संस्था समर्पित सेंटर फॉर पॉवर्टी एलीविएशन एंड सोशल रिसर्च ने किया है।
मुख्यमंत्री का बयान
रथ को रवाना करने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा,
“छत्तीसगढ़ में बाल विवाह के मामलों में पहले ही कमी आई है और हमने बालोद ज़िले को बाल विवाह मुक्त घोषित किया है। सरकार, सिविल सोसाइटी और ज़िला प्रशासन के साझा प्रयासों से हमें पूरा भरोसा है कि इस सामाजिक अपराध को पूरी तरह समाप्त किया जा सकेगा।”
छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां
ग़ौरतलब है कि बालोद ज़िला वर्ष 2025 में देश का पहला बाल विवाह मुक्त ज़िला बना था। इसके अलावा सूरजपुर ज़िले में 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ से उम्मीद है कि यह संदेश राज्य के आख़िरी गांव और आख़िरी परिवार तक पहुंचेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर असर
Child Marriage Free India अभियान के राष्ट्रीय संयोजक बिधान चंद्र ने कहा कि छत्तीसगढ़ मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, साझेदारी और ज़मीनी कार्रवाई के कारण देश के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है।
उनके मुताबिक, बीते एक साल में देशभर में लगभग 1.98 लाख बाल विवाह रोके गए, जिनमें से 3,988 मामले अकेले छत्तीसगढ़ में रोके गए।
यात्रा में क्या-क्या होगा?
रथ यात्रा के दौरान पंचायतों, ज़िला प्रशासन, सीएमपीओ और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर समुदायों से संवाद किया जाएगा। स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक जगहों पर नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सर्वाइवर स्टोरीज़ के ज़रिए जागरूकता फैलाई जाएगी। इसी तरह की यात्राएं फिलहाल देश के 25 राज्यों के 451 ज़िलों में चल रही हैं।
क़ानूनी चेतावनी
सरकार ने साफ़ किया है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या जानबूझकर शामिल होने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कुल मिलाकर, ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को छत्तीसगढ़ सरकार, सिविल सोसाइटी और समुदायों की साझा लड़ाई के एक मज़बूत प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है—जिसका लक्ष्य है बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़।







