हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 फरवरी। देश की राजधानी नई दिल्ली में शुरू हुए दुनिया के सबसे बड़े ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026’ में बिहार जैसे राज्य ने भी अपना दम दिखाया। बिहार के इनोवेटर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ जुड़ने में सफल रहे हैं। सम्मिट के दौरान बिहार सरकार ने कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ-साथ आईआईटी, पटना के साथ कुल 468 करोड़ रुपये के समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये।
इनोवेशन, इनक्यूबेशन और रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने एमओयू साइन किया। बिहार ने राज्य को एआई सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (एआईसीओई) बनाने के लिए कुल 60 करोड़ रूपये और आईआईटी, पटना में रिसर्च पार्क स्थापित करने के लिए कुल 250 करोड़ रूपये के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं। बिहार एआईसीओई स्थापित करने के लिए टाइगर एनालिटिक्स इंडस्ट्री पार्टनर बनेगा, जबकि आईआईटी, पटना एकेडमिक पार्टनर होगा।
इसके अलावा, बिहार जीसीसी पॉलिसी 2026 और बिहार आईटी पॉलिसी 2024 के तहत मशहूर जीसीसी ईकाइयों और आईटी ईकाइयों जैसे रेड साइबर (103 करोड़), ग्रो क्यूआर (30 करोड़), सीआईपीएल (25 करोड़) आदि के साथ भी एमओयू पर हस्ताक्षर किये गए।
बिहार सरकार के इस फैसले से नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राज्य में 10,000 से भी अधिक नई नौकरियों के अवसर उपलब्ध होने की संभावना है। इसके अलावा, 50,000 से अधिक युवाओं को एआई से जुड़े कार्यक्रमों के ज़रिए स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग उपलब्ध होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि छह दिन के इस सम्मिट में 100 से भी अधिक टेक्नोलॉजी कंपनियों के सीईओ और 135 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, 20 से ज़्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 50 से ज़्यादा देशों के मंत्री भी इस सम्मिट में शिरकत करने में सफल रहे हैं । ज्ञातव्य है कि बिहार सरकार ने पिछले दिनों ही बिहार जीसीसी पॉलिसी 2026 और बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2026 को मंज़ूरी दी है। इसका उद्देश्य बिहार को पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के लिए एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करना है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मिट और एक्सपो 2026 में बिहार स्टेट पैवेलियन का उद्घाटन किया था। उस मौके पर माननीय मंत्री, पंचायती राज मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। बिहार सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह, उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल और राज्यसभा के माननीय सदस्य संजय कुमार झा ने अपनी मौजूदगी से इस अवसर को महत्वपूर्ण बना दिया।
इस मौके पर बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, कृषि विभाग के निदेशक सौरभ यादव, आईआईटी, पटना के प्रोफेसर प्रीतम कुमार और आईआईटी, पटना के निदेशक प्रोफेसर टीएन सिंह भी मौजूद थे।
बिहार को पूर्वोत्तर भारत का टेक हब बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई बड़े इनिशिएटिव लिए हैं। इनमें बिहार एआई मिशन के तहत इंजीनियरिंग के एक मेगा एआई कोर की घोषणा, इंडस्ट्री पार्टनर्स और एकेडमिक पार्टनर्स के साथ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर, बड़े निवेशकों के साथ इन्वेस्टमेंट इंटेंट लेटर पर हस्ताक्षर, राज्य की पॉलिसी की घोषणा, बिहार जीसीसी पॉलिसी 2026 और बिहार प्रदेश सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2026 की लॉन्चिंग और आईआईटी, पटना में एक रिसर्च पार्क की स्थापना आदि शामिल हैं। जिस तरह भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक ग्लोबल एजेंडा-सेटर के रूप में उभर रहा है, वैसे ही बिहार भी पूर्वोत्तर भारत के एक टेक्नोलॉजी हब के रूप में अपनी पहचान बनाने की ओर तेजी से अग्रसर है। इसके लिए बिहारी प्रतिभा को पहचानने की आवश्यकता है।







