Bihar Swine Fever: पशुपालन विभाग के निदेशक श्री नवदीप शुक्ला ने कहा कि क्लासिकल स्वाइन फीवर से बचाव के लिए राज्य में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 10 दिनों में 2,32,160 सूकरों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह टीकाकरण राज्य के सभी जिलों में पूर्णतः निःशुल्क किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक टीकाकरण की प्रक्रिया चल रही है। केवल 3 महीने से अधिक उम्र के सूकरों को यह टीका लगाया जा रहा है । उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि किसी भी प्रकार की समस्या या जानकारी के लिए वे पशुपालन निदेशालय से संपर्क करें।
3 महीने से अधिक उम्र के सभी सूकरों को टीका लगाया जा रहा है
राज्य के पशुपालन विभाग द्वारा सूकरों में होने वाली घातक बीमारी क्लासिकल स्वाइन फीवर से बचाव के लिए एक विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। राज्य के सभी 38 जिलों में यह अभियान एक साथ संचालित किया जा रहा है। सभी जिलों के प्रत्येक गांव और वार्ड में निःशुल्क टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। टीकाकरण का समय प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत 3 महीने से अधिक उम्र के सभी सूकरों को टीका लगाया जा रहा है।
पशुपालन निदेशालय, बिहार द्वारा सभी जिला पशुपालन पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि टीकाकरण अभियान प्रभावी रूप से संचालित हो सके। पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम का भरपूर लाभ उठाएं और अपने सूकरों को क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखें। कोई भी पशुपालक यदि टीकाकरण के दौरान किसी प्रकार की समस्या का सामना करता है, जैसे कि टीकाकरण न होने या टीकाकरण के नाम पर राशि की मांग, तो वह पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना के नियंत्रण कक्ष टेलीफोन नंबर 0612-2230942 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। अधिक जानकारी और सहायता के लिए पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार, पटना के नियंत्रण कक्ष (टेलीफोन नंबर 0612-2226049) पर संपर्क किया जा सकता है।
पशुपालन निदेशालय ने सभी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों से भी अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें, ताकि किसी भी योग्य सूकर का टीकाकरण न छूटे और राज्य में क्लासिकल स्वाइन फीवर के प्रसार को पूरी तरह रोका जा सके।
क्या है क्लासिकल स्वाइन फीवर
क्लासिकल स्वाइन फीवर एक वायरस जनित घातक बीमारी है, जो मुख्य रूप से सूकरों को प्रभावित करती है। यह बीमारी मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं है और अन्य पालतू जानवरों में नहीं फैलती है, लेकिन सूकरों में अत्यधिक मृत्यु दर का कारण बनती है। यह बीमारी सूकर पालन व्यवसाय को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।
केंद्र सरकार के पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत इस बीमारी की रोकथाम के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि वर्ष 2030 तक क्लासिकल स्वाइन फीवर का पूर्ण उन्मूलन किया जा सके।
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार ने इस अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा और पशुधन को रोगमुक्त रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। विभाग ने सभी पशुपालकों से अनुरोध किया है कि वे समय पर टीकाकरण कराकर अपने पशुधन की रक्षा करें और इस अभियान को सफल बनाएं।