बिहार के सरकारी शिक्षकों को बिना वेरिफिकेशन के नहीं मिलेगी सैलरी

Sonu Nigam20 October 20262 min read0 viewsबिहार
बिहार के सरकारी शिक्षकों को बिना वेरिफिकेशन के नहीं मिलेगी सैलरी

बिहार के भागलपुर में सामने आए करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले ने पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। इस बड़े फर्जीवाड़े के बाद अब मुजफ्फरपुर जिला शिक्षा विभाग ने भी कमर कस ली है। विभाग ने जिले के सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और सर्विस डेटा का गहन ऑडिट शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता को रोका जा सके।

दरअसल, भागलपुर में तनुश्री नाम की एक फर्जी शिक्षिका को करीब 98.12 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया, जिसके बाद वित्त विभाग और शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पांडे ने राज्यव्यापी निर्देश जारी किए हैं। अब मुजफ्फरपुर में भी सभी भुगतानों का 100 प्रतिशत सत्यापन किया जाएगा।

28 हजार कर्मचारियों के वेतन पर तलवार, ब्लॉक स्तर पर सुस्ती

मुजफ्फरपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि अब एचआरएमएस (HRMS) डेटा का मिलान भौतिक सर्विस रिकॉर्ड से किया जाएगा। जिले के 28,000 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए यह वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में ब्लॉक स्तर पर भारी सुस्ती देखी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक केवल कुढ़नी ब्लॉक ने ही अपनी रिपोर्ट जमा की है, जिससे विभाग में नाराजगी है।

इस ऑडिट को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल है, क्योंकि वेरिफिकेशन की समय सीमा 22 अक्टूबर तय की गई है। दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले अगर डेटा का मिलान नहीं हुआ, तो अक्टूबर महीने के वेतन में देरी होने की पूरी संभावना है।

गौरतलब है कि भागलपुर घोटाले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शशि चंदन चौधरी की गिरफ्तारी हुई और डेटा एंट्री ऑपरेटर अविनाश राज को बर्खास्त किया गया। जांच में पता चला कि एचआरएमएस पोर्टल पर फर्जी आईडी बनाकर और डिजिटल सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल कर बैंक ट्रांजैक्शन किए गए थे। इसी सिस्टम फेलियर को ठीक करने के लिए अब मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार में यह सख्ती बरती जा रही है।

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