71 की उम्र मे 16 हजार किमी का सफर इंदौर के लक्ष्मण ने पुरी की ग्लोबल यूनिटी कांवड़ यात्रा

Sonu Nigam18 October 20262 min read0 viewsबिहार
71  की उम्र मे 16 हजार किमी का सफर  इंदौर के लक्ष्मण ने पुरी की ग्लोबल यूनिटी कांवड़ यात्रा

कहते हैं कि अगर मन में दृढ़ संकल्प और श्रद्धा हो, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी 71 वर्षीय लक्ष्मण ने। उन्होंने अपनी अटूट आस्था और मानवता के प्रति प्रेम को दर्शाते हुए 16,000 किलोमीटर लंबी 'ग्लोबल नेशनल यूनिटी कांवड़ यात्रा' को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस लंबी और कठिन यात्रा का समापन बिहार के औरंगाबाद में हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।

लक्ष्मण ने इस विशेष यात्रा की शुरुआत 7 जुलाई 2024 को की थी। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि दुनिया में शांति का संदेश फैलाना था। उन्होंने यह यात्रा देश के उन वीर जवानों के सम्मान में की जिन्होंने पुलवामा और कारगिल जैसे युद्धों में अपनी जान कुर्बान कर दी। इसके साथ ही, उन्होंने कोविड-19 महामारी, सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्रद्धा और सेवा का संगम

अपनी यात्रा के दौरान लक्ष्मण ने कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का दौरा किया। वे बिहार के गया पहुंचे, जहां उन्होंने फल्गु नदी के तट पर पूर्वजों का पिंडदान किया। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर गए, जहां उन्होंने विश्व शांति और दिवंगत आत्माओं की मुक्ति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। जब वे रविवार को बिहार के औरंगाबाद पहुंचे, तो लोगों ने उन्हें मालाएं पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया। उनके पैरों में बंधी घंटियां और हाथ में लहराता तिरंगा उनकी अटूट देशभक्ति और संकल्प की कहानी बयां कर रहा था।

लक्ष्मण का मानना है कि दूसरों के लिए जीना ही जीवन का असली सार है और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। वे केवल यात्रा ही नहीं करते, बल्कि पिछले कई वर्षों से समाज सेवा में भी जुटे हैं। उन्होंने मूक-बधिर, दृष्टिहीन और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा किया है। साथ ही, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं के समय उन्होंने जिला प्रशासन को राहत कोष भी उपलब्ध कराया है।

71 साल की उम्र में इतनी लंबी दूरी तय करना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लक्ष्मण ने संकल्प लिया है कि जब तक उनका शरीर साथ देगा, वे इसी तरह यात्राएं करते रहेंगे और समाज की सेवा में अपना जीवन समर्पित रखेंगे।

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