दुनिया भर मे Viral बिहार का मिथिला मखाना, केंद्रीय mantrपीयूष गोयल ने बताया 'सुपरफूड'

बिहार की मिट्टी और किसानों की मेहनत का जादू अब सात समंदर पार नजर आने लगा है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बिहार के जीआई-टैग्ड (GI-tagged) मिथिला मखाने की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अपनी बेहतरीन पौष्टिकता और स्वाद के कारण मिथिला मखाना आज दुनिया भर के लोगों के दिलों को जीत रहा है।
सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए पीयूष गोयल ने मखाने को एक 'सुपरफूड' करार दिया। उन्होंने इस वैश्विक सफलता का श्रेय बिहार के मेहनती किसानों को दिया, जिनकी दिन-रात की मशक्कत ने इस स्थानीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर बिहार के स्थानीय खजानों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
निर्यात में उछाल और सरकारी प्रोत्साहन
आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका सहित 20 से अधिक देशों में 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और उससे बने उत्पादों का निर्यात किया है। खास बात यह है कि भारत के कुल मखाना उत्पादन में अकेले बिहार की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है, जो इसे देश का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र बनाती है।
मखाने के व्यापार को आसान बनाने और इसे नई पहचान देने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं:
- अलग ट्रेड कोड: जुलाई 2025 से मखाने के लिए एक अलग हार्मोनइज्ड सिस्टम (HS) कोड लागू किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आसानी होगी।
- नेशनल मखाना बोर्ड: बजट 2025-26 की घोषणा के बाद 15 सितंबर 2025 को बिहार में औपचारिक रूप से नेशनल मखाना बोर्ड की शुरुआत की गई।
- बड़ा बजट आवंटन: सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक मखाने के विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना, किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना और कटाई के बाद के प्रबंधन को आधुनिक बनाना है। इसके अलावा, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर देकर इसे दुनिया के हर कोने तक पहुँचाने की तैयारी है। हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच बढ़ती मांग और स्टार्टअप्स के नए प्रयोगों ने मिथिला मखाने की राह को और आसान बना दिया है।