केले के पौधे को स्नान कराकर उसे धोती पहनाई जाती है फिर मईया कि पुजा कि जाती है,1958 से परम्परा को जीवित रखता अपना बिहार

Sonu Nigam19 October 20262 min read0 viewsबिहार
केले के पौधे को स्नान कराकर उसे धोती पहनाई जाती है फिर मईया कि पुजा कि जाती है,1958 से परम्परा को जीवित रखता अपना बिहार

बिहार के सुपौल जिले के पिपरा बाजार में स्थित सुभाष चौक का दुर्गा मंदिर अपनी एक खास पहचान के लिए मशहूर है। यहां शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना किसी आम तरीके से नहीं, बल्कि सदियों पुरानी बंगाली परंपरा के अनुसार की जाती है। इस अनूठी पूजा पद्धति और मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को देखने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मां दुर्गा की प्रतिमा के लिए अंग-वस्त्र, आभूषण और अन्य जरूरी पूजन सामग्री सीधे बंगाल से मंगवाई जाती है। यहां पूरी पूजा बंगाली पुरोहितों द्वारा विधि-विधान से संपन्न कराई जाती है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होती है।

1958 से पहले की विरासत और अनोखे रीति-रिवाज

मंदिर के इतिहास की बात करें तो प्रबंधन के अनुसार, साल 1958 से पहले यहां एक कच्चा मंदिर था। बाद में मधुसूदन डे और शारदा प्रसाद डे के प्रयासों से एक पक्के मंदिर का निर्माण कराया गया, जिसके बाद से बंगाली पद्धति से पूजा की यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।

यहां होने वाले अनुष्ठान बेहद दिलचस्प और धार्मिक महत्व वाले होते हैं। पूजा के छठे दिन बेल के पेड़ के नीचे कलश स्थापना की जाती है। इसके बाद सप्तमी के दिन एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें केले के पौधे को स्नान कराकर उसे धोती पहनाई जाती है और फिर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पास के पोखर में ले जाकर उसकी पूजा की जाती है।

इस मंदिर की एक और खास बात यहां की बलि परंपरा है। यहां पशु बलि के बजाय 'निशा और वैष्णव पद्धति' का पालन किया जाता है, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से झींगे की बलि दी जाती है। साथ ही, बंगाली महिलाएं अपने घरों से विशेष प्रसाद बनाकर लाती हैं, जिसे मां दुर्गा को भोग लगाया जाता है।

अष्टमी के दिन यहां कन्या पूजन का आयोजन होता है, जिसमें मंदिर कमेटी द्वारा कुंवारी कन्याओं को वस्त्र भेंट किए जाते हैं। वर्तमान में मंदिर की सजावट और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बद्री प्रसाद गुप्ता, सचिव शंकर चौधरी और निताय डे सहित युवक संघ के सदस्य पूरी सक्रियता से जुटे हुए हैं, ताकि इस ऐतिहासिक उत्सव को भव्य रूप दिया जा सके।

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