जन सुराज का बड़ा ऐलान जीत के साथ खत्म होगी शिक्षा नीति और निजी कॉलेज खबर पूरा पढ़ें: प्रशांत किशोर

बिहार की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव का दावा करते हुए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा है कि विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उनके प्रत्याशियों की जीत राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी। नवादा में आयोजित एक जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज की जीत से राज्य में लंबे समय से चली आ रही वित्तरहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और निजी कॉलेजों को सरकारी ढांचे में अंगीभूत कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों, स्नातकों और शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि इन मुद्दों को अब और अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए केवल चुनाव ही काफी नहीं है, बल्कि एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा ताकि शिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. अनुज सिंह और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. दिव्या ज्योति सहित सभी जन सुराज प्रत्याशियों को विजयी बनाएं।
शिक्षा व्यवस्था और रोजगार पर बड़ा सवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव महज एक प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह युवाओं और शिक्षकों के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब मांगने का अवसर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हैं, तो उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
वहीं, स्नातक प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार नए स्कूल और कॉलेज खोलकर शिक्षकों की बहाली कर सकती है, तो पहले से मौजूद योग्य शिक्षकों और संसाधनों वाले निजी कॉलेजों को अंगीभूत क्यों नहीं किया जा सकता? उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 18 वर्षों तक प्रतिनिधि रहने के बावजूद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया गया, जो कि शिक्षकों और स्नातकों के साथ अन्याय है।
डॉ. अनुज सिंह ने वादा किया कि जीत के बाद स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने, बेरोजगारी भत्ता दिलाने और वित्तरहित संस्थानों को अंगीभूत कराने के लिए एक बड़ा जनसंघर्ष छेड़ा जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अब बिहार के शिक्षक और स्नातक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं और सम्मानजनक भविष्य के लिए बदलाव चाहते हैं।