मंदिर जहां नवरात्र में माता रानी के साथ महाकाल की भी 9 दिन होती है धूमधाम से पूजा पा, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

किशनगंज के रुईधासा स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शनिवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप, मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया।
मां दुर्गा के साथ-साथ महाकाल बाबा
सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालु मां कालरात्रि के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना कर रहे थे। गौरतलब है कि नवरात्र के पहले दिन से ही यहां मां दुर्गा की विशेष आराधना चल रही है, और इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां मां दुर्गा के साथ-साथ महाकाल बाबा की भी नियमित पूजा की जाती है। शाम की आरती का नजारा और भी भव्य रहा, जहां भक्तों ने सामूहिक रूप से माता का आशीर्वाद लिया।
भक्तों के कष्ट हरती हैं 'शुभंकरी' मां कालरात्रि
पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पुरोहित गुरु साकेत ने बताया कि मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही विकराल दिखता हो, लेकिन वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली हैं, इसीलिए उन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस और मानसिक शांति मिलती है। वे भक्तों के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।
धार्मिक परंपरा
धार्मिक परंपरा के अनुसार, सप्तमी के दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाया जाता है, जिसे श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित किया। गुरु साकेत ने कहा कि नवरात्र का यह पर्व हमें आस्था, साधना और आत्मिक शक्ति का संदेश देता है। मंदिर में भक्तों का उत्साह यह दर्शाता है कि लोगों की अटूट श्रद्धा आज भी इन आध्यात्मिक केंद्रों से जुड़ी हुई है।